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चुनाव पूर्व सर्वेक्षण - क्या इसपर रोक लगाना उचित होगा?

उपेन्द्र प्रसाद - 2010-10-23 14:30 UTC
भारत के निर्वाचन आयोग ने केन्द्र सरकार से मांग की है कि वह जनप्रतिधित्व कानून में संशोधन कर चुनाव से पहले होने वाले सर्वेक्षणों पर रोक लगा दे, क्यांेकि इसके कारण स्वच्छ एवं स्वतंत्र मतदान में वाधा पैदा हो रही है। आयोग ने जिस दिन केन्द्र सरकार को यह पत्र लिखा था, उसकी पूर्व संघ्या को एक चैनल ने बिहार के हो रहे विधानसभा चुनाव से संबंधित एक सर्वे के नतीजे जारी किए थे। जाहिर है, उन नतीजों ने ही निर्वाचन आयोग को वह पत्र लिखने के लिए प्रेरित किया।

भ्रष्टाचार आज की सबसे बड़ी समस्या

सभी दलों को एकजुट होकर लोकपाल विधेयक पारित करना चाहिए
कल्याणी शंकर - 2010-10-22 14:26 UTC
एक बार फिर केन्द्र सरकार कह रही है कि वह लोकपाल विधेयक को अगले सत्र में संसद में लाएगी। यदि इस बार इसे संसद में पेश किया गया, तो यह इसे पारित कराने का 10वां प्रयास होगा। इसके पहले के 9 प्रयास विफल रहे हैं। आज का राजनैतिक माहौल भ्रष्टाचार की चर्चा से गूंज रहा है। राष्ट्रमंडल खेलों में हजारों करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार के दोषियों को सजा देने की मांग की जा रही है। उम्मीद की जाती है कि इस माहौल में लोकपाल विधेयक को कानून बनाने में केन्द्र की सरकार सफल हो पाएगी।

उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनावो में जबर्दस्त उत्साह

विकास की राशि ने आकर्षण बढ़ाया
प्रदीप कपूर - 2010-10-21 14:24 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में लोगों का उत्साह देखते बना रहा है। वे भारी संख्या में इन चुनावों में हिस्सा ले रहे हैं। इससे पता चलता है कि जमीनी स्तर पर लोकतंत्र कितना मजबूत हो गया है। वैसे इसका एक कारण ग्रामीण योजनाओं के लिए भारी पैमाने पर सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे धन भी हैं। इसके कारण गांव के अमीर और गरीब- सभी तबके पंचायत चुनावों में दिलचस्पी लेने लगे हैं।

वैचारिक राजनीति ने बिहार में जमीन पकड़ ली

डॉ. अतुल कुमार - 2010-10-21 12:54 UTC
कहा जाता है कि राजनीति को सही मायनों में हिन्दुस्तान की अवाम ने अभी नहीं समझा है। प्रशासन पर जनता की आशा और आकांक्षा के अनुरूप नीति बनाना तथा कार्य करने की व्यवस्था लोकतांत्रिक पृष्ठभूमि है। जनप्रतिनिधि का दायित्व यही है। वोट व्यवस्था के लिए व्यवस्थित रूपके लिए है। पर इस मकसद में मतदान मुहिम कम से कम पूरी तरह तो सफल नहीं। चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता के साथ समाज को प्रतिनिधि चयन हेतु जागरूक करना भी एक दायित्व है। अच्छे चरित्र के प्रत्याशियों का चुनाव में पजींकृत दलों के लिए जरूरी हो। स्वस्थ राजनीति का अर्थ राजनैतिक परिदृश्य में सत्तासंचालन हेतु जनप्रतिनिधि का चयन किया जाना होता है। जनप्रतिनिधि के दायित्व प्रशासन को जनता के लिए कार्य करने हेतु प्रेरित और नियंत्रित रखना मात्र है। मगर हो क्या रहा है।

घोटाले के बाद अब जांच का खेल

क्या आइपीएल जांच की कहानी दुहराई जाएगी?
उपेन्द्र प्रसाद - 2010-10-20 14:18 UTC
राष्ट्रमंडल खेल समाप्त होने के तत्काल बाद इस खेलों के दौरान हुए घोटाले की जांच भी शुरू हो गई और सबसे बड़ी बात तो यह है कि जांच की पहल प्रधानमंत्री के एक निर्णय से हुई, जिसके तहत उन्होंने एक सेवानिवृत्त अधिकारी को जांच के काम में लगा दिया। खेलों के सफल आयोजन के लिए बाहवाही लेने का ज्यादा समय न तो दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को मिला और न ही सुरेश कलमाड़ी को। हां, दोनों ने एक दूसरे पर दोषारोपण करना जरूर कर दिया।

केरल के स्थानीय निकाय चुनाव

क्या वाम लोकतांत्रिक मोर्चा 2005 के प्रदर्शन को दुहरा पाएगा?
पी श्रीकुमारन - 2010-10-19 14:16 UTC
तिरुअनंतपुरमः क्या वामलोकतांत्रिक मोर्चा स्थानीय निकायों के हो रहे चुनावों में अपने 2005 के प्रदर्शन को दुहरा पाएगा? यह सवाल सत्ताधारी मोर्चा के कार्यकर्त्ताओं के ही नहीं अल्कि विपक्षी मोर्चा के कार्यकत्ताओं और नेताओं को भी उद्वेलित कर रहा है।

प्रधानमंत्री खुद आ गए हैं सवालों के घेरे में

भ्रष्टाचार ने धूमिल कर दी है प्रधानमंत्री की छवि
विशेष संवाददाता - 2010-10-18 14:13 UTC
नई दिल्लीः पिछले दिनों प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री के पुरष्कार से नवाजा गया। उनके बड़े से बड़े आलोचक भी उनकी विद्वता का लोहा मानते हैं और उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी पर सवाल नहीं खड़ा करते। इन्दिरा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के बाद सबसे ज्यादा समय तक देश का प्रधानमंत्री पद पर रहने का भी उन्होंने रिकार्ड बना लिया है। यही कारण है कि जब 2009 में प्रधानमंत्री के पद पर उनकी दुबारा वापसी हुई, तो राष्ट्र ने उनकी सराहना की। लोगों को लगा कि उनकी पार्टी और गठबंधन को मिली ज्यादा सीटों के बदौलत वे पहले की अपेक्षा और भी बेहतर काम कर पाएंगे।

बिहार के चुनावी माहौल में घुला कडु़वाहट

एस एन वर्मा - 2010-10-18 04:41 UTC
नई दिल्ली , 18 अक्टूबर। बिहार में राजनीतिक दलों के चुनाव प्रचार अभियान चरम पर है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के चुनाव अभियान में कूद पड़ने के बाद आरेाप प्रत्यारोप का दौर मंे तेजी आ गयी है। कांग्रेंस,जद यू, बीजेपी और राजद नेताओं के भाषणों में कडु़वाहट घुलता जा रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा बिहार सरकार पर घोटाले के आरोप लगाए जाने के बाद नीतिश और अरुण जेटली के तिलमिलाने पर आज कांग्रेस ने चुटकी लेते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मुहैया कराए गए पैसा का हिसाब मांग कर प्रधानमंत्री व सोनिया ने कोई गुनाह नहीं किया है। लोकतंत्र में विपक्षी दलों का इस तरह का प्रश्न पूछने का अधिकार बनता है।

कर्नाटक संकट के पीछे धन की ताकत

दल बदल विधेयक पर फिर से विचार की जरूरत
कल्याणी शंकर - 2010-10-16 14:09 UTC
कर्नाटक में एक बड़ा नाटक चल रहा है और एक बहुत ही छोटी राजनीति हो रही है। इस नाटक में न तो भाजपा और न ही कांग्रेस कोई अच्छी भूमिका में है। स्पीकर और जनता दल (एस) की भूमिका को भी सराहा नहीं जा सकता। यानी इस खेल में सबके हाथ गंदे हैं। अदालत ने भी अपने आदेश को सुरक्षित रखकर भ्रम को बढ़ाने का ही काम किया है। मुख्यमंत्री यदुरप्पा ने तीन दिनों के अंदर दो बार विधानसभा में बहुमत हासिल करने का रिकार्ड बनाया है। यदि हाई कोर्ट स्पीकर द्वारा 11 भाजपा विधायकों की सदस्यता समाप्ति के निर्णय पर रोक लगा देता है, तो मुख्यमंत्री एक सप्ताह के अंदर तीसरी बार अपना बहुमत साबित करते दिखाई पड़ सकते हैं।
दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों की सफल समाप्ति

क्या कॉमनवेल्थ के लुटेरे दंडित होंगे?

उपेन्द्र प्रसाद - 2010-10-15 14:06 UTC
नई दिल्लीः दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल समाप्त हो चुके हैं। इस खेल के पहले भारत की छवि दुनिया भर में खराब हो रही थी। खेल शुरू होने के बाद अंत होने तक सबकुछ ठीकठाक रहा और उसके आगे देश की जगहंसाई नहीं हुई। लेकिन पहले जो कुछ हुआ, वह बहुत ही शर्मनाक था। खेल के आयोजन और उससे संबंधित निर्माणों में हजारों करोड़ रुपए के घपले होने की खबरें भी आ रही थीं। वे खबरें निराधार नहीं थी।
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