कानकुन जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के निहितार्थ
- 2010-12-19 05:31 UTCमेक्सिको के कानकुन शहर में दो सप्ताह तक चले जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में तीखे मतभेदों के बावजूद अंतत: एक सर्वमान्य समझौता हो ही गया। संयुक्त राष्ट्र के तत्वाधान में हाल ही में सम्पन्न हुए इस समझौते का लाभ भारत जैसे विकासशील देशों को किस प्रकार और किस सीमा तक मिल सकता है, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। कानकुन सम्मेलन के दौरान वास्तव में विकासशील देशों की घेराबंदी करने की ही कोशिश हुई है। यह ठीक है कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर इस समझौते को आगे की दिशा में एक सार्थक और सकारात्मक कदम कहा जा सकता है। कोपेनहेगन के अनुभव के कारण यह आशंका व्यक्त की जा रही थी कि कानकुन में भी कोई नतीजा नहीं निकलेगा, लेकिन संतोष की बात है कि सम्मेलन की समाप्ति एक आम सहमति के साथ हुई।