दूरदर्शन पर धारावाहिके के आगमन एवं प्रसारण यात्रा काफी लम्बी है। या यूं कहिए पांच दशक पुरानी दास्तां जो बयां करने के लिए काफी शब्दों की आवश्यकता पड़ेगी। यात्रा की शुरूआत लोकप्रिय लेखकों की कहानियों पर आधारित धारावाहिकों की यात्रा आरम्भ हुई। ग्रामीण जनता के संघर्ष की कहानियां तो मुंशी प्रेमचन्द ने अपनी सशक्त कलम से पन्नों पर उतारी और बाद में दूरदर्शन ने अपनी दूरदृष्टि को अपनाकर आम जनता तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया। शहरी और ग्रामीण जनता के मनोरंजन को ध्यान में रखकर शरत चन्द्र और रविन्द्रनाथ टैगोर के साथ ही साथ शरत जोशी और मनोहर ‘याम जोशी एवं कुन्दन तथा कुमार वासुदेव जैसे दिग्दर्शकों ने अपनी बुद्विमत्ता के अनुसार हमलोग और बुनियाद के माध्यम से आम जनता का मनोरंजन किया इसे देखते हुए फिल्मी दुनिया के दिग्गजों ने भी दूरदर्शन पर अपना भाग्य रामायण और महाभारत एवं टीपू सुल्तान के माध्यम से दूरदर्शन पर अपनी उपस्थिति दर्ज की। रामानन्द सागर, संजय खान, प्रेम किशन, बी.आर.चोपड़ा तथा जी.पी.सिप्पी जैसे दिग्गजों ने लम्बे धारावाहिकों की श्रृंखला शुरू की।