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संघ का भोपाल सम्मेलन

भाजपा से अलग मत जाहिर किए गए
एल एस हरदेनिया - 2010-03-09 08:45 UTC
भोपालः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का भोपाल में कुठ दिन पहले ही एक सम्मेलन हुआ। उस सम्मेलन में यदि लोगों की उपस्थिति कोई संकेत है, तो मानना पड़ेगा कि मध्य प्रदेश में संघ अपना आघार खो रहा है।

राजनीति में आरक्षण के खिलाफ

राजकिशोर - 2010-03-08 03:14 UTC
मामला महिलाओं का है। वर्तमान समय में किसकी हिम्मत है कि महिलाओं के मिलनेवाली किसी सुविधा का विरोध करे। ऐसा व्यक्ति तत्काल स्त्री-विरोधी करार दिया जाएगा। मुझे ऐसा कहलाने का कोई शौक नहीं है। महिलाओं को उनके हक मिलें, इससे मुझे हार्दिक प्रसन्नता होगी। मैं तो यहां तक चाहता हूं कि स्त्री होने के नाते उन्हें पुरुषों से कुछ ज्यादा ही अधिकार मिलें। इसलिए नहीं कि अतीत में उनके साथ बहुत दुर्व्यवहार हुआ है। इसलिए कि प्रकृति ने उन्हें कुछ अलग बनाया है और कुछ खास जिम्मेदारियां सौंपी हैं।
भारत

कांग्रेस आलाकमान के ताजा निर्णय के खतरे

नाकाम हो सकता है मिशन 2012
प्रदीप कपूर - 2010-03-08 03:14 UTC
लखनऊः कांग्रेस आलाकमान द्वारा उत्तर प्रदेश में उठाए गए ताजा कदमों से राज्य में कांग्रेस और उसकी प्रदेश अघ्यक्षा रीता जोशी बहुगुणा के कमजोर हो जाने का खतरा पैदा हो गया है।
भारत

संसद में महिला आरक्षण विधेयक

क्या एक बार फिर इतिहास दुहराया जाएगा?
उपेन्द्र प्रसाद - 2010-03-06 09:12 UTC
महिला आरक्षण विधेयक एक बार फिर संसद मे पेश किया जाएगा। 1996 से अब तक यह इतनी बार संसद में पेश किया गया है कि पेश किया जाना अब कोई बड़ी बात नहीं रही। बड़ी बात तो तब होगी, जब महिला आरक्षण विधेयक पास कर दिया जाएगा। पहले यह लोकसभा में पेश किया जाता था और लोकसभा भंग होने अथवा उसका कार्यकाल पूरा होने बाद लैप्स कर जाता था। पर मनमोहन सिंह सरकार ने पिछली बार समझदारी दिखाते हुए इस विधेयक को राज्य सभा में पेश किया था, जो एक स्थाई सदन है और जो न तो कभी भंग होती और न ही कभी उसका कार्यकाल पूरा होता है।

विपक्ष की बढ़ती एकता: क्या कांग्रेस इसका मुकाबला करेगी?

कल्याणी शंकर - 2010-03-05 09:50 UTC
बजट प्रस्तावों के द्वारा डीजल और पेट्रोल की कीमतों में वृद्घि के मसले पर विपक्षी पार्टियां एकजुट हो रही हैं। क्या केन्द्र सरकार को उनकी एकता से डरना चाहिए? आखिर केन्द्र सरकार उनकी सम्मिलित चुनौतियों का सामना कैसे करेगी? यह सच है कि केन्द्र सरकार अब पूर्ण बहुमत में है, इसलिए वह पहले की तरह कतजोर नहीं है। लेकिन फिर भी वह विपक्षी दलों द्वारा मिल रही सम्मिलित चुनौती की उपेक्षा नहीं कर सकती।

दिल्ली में स्वीकृत पद से अधिक है पुलिस बल जबकि कश्मीर में है भारी कमी

एस एन वर्मा - 2010-03-05 06:14 UTC
नई दिल्ली। नक्सलवाद ओर आतंकवाद से जूझ रहे प्रदेशों में जहां पुलिस बल और संसाधनों की भारी कमी है वहीं देश की राजधानी दिल्ली में पुलिस बलों की संख्या भर्ती मानको के अनुसार तए गए स्वीकृत पदों से काफी ज्यादा है। यह और बात है कि दिल्ली पुलिस के जवान अच्छी खासी संख्या में वीआईपी सुरक्षा में लगे होते हैं। जिन्हें दिल्ली में आपराधिक वारदातों के शिकार बन रहे आम आदमी की कोई फ्रिक नहीं होती है।

फैल रहा है पंजाब में सांप्रदायिकता का जहर

अकाली दल- भाजपा गठबंधन इसके लिए जिम्मेदार
बी के चम - 2010-03-04 10:08 UTC
चंडीगढ़ः अकाली दल और भाजपा गठबंधन के सत्ता में आने के बाद पंजाब में सांप्रदायिकता तेजी से पांव पसार रही है। अकाली दल और भाजपा के नेता इस तथ्य को मानने से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन दोनों का एक साथ होना ही इस बात की गारंटी है कि पंजाब में सांप्रदायिकता पांव नहीं फैला सकती।

भारत में बेरोजगार कितने - सरकार को मालूम नहीं

ज्ञान पाठक - 2010-03-03 17:46 UTC
नई दिल्ली: भारत में इस समय बेरोजगारों की संख्या कितनी है यह केन्द्र की डा. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार को नहीं मालूम। आज राज्य सभा में इसका खुलासा तब हुआ जब एक प्रश्न के लिखित उत्तर में श्रम और रोजगार राज्यमंत्री श्री हरीश रावत का जवाब आया। इससे यह भी साफ जाहिर होता है कि कांग्रेस नेतृत्व वाली यह संप्रग सरकार बेरोजगारों के प्रति कितनी लापरवाह है।
भारत

सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों के विकास के लिए विशेषज्ञ दल गठित

विशेष संवाददाता - 2010-03-03 16:53 UTC
नई दिल्ली: सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के संवर्धन और विकास के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक स्वतंत्र निकाय के गठन पर उपयुक्त सिफारिशों के लिए एक विशेषज्ञ दल का गठन किया गया है। दल की अध्यक्षता श्री बरूण मैरा सदस्य (उद्योग, योजना आयोग) द्वारा की जाएगी और यह तीन महीने की अवधि के भीतर अपनी संस्तुतियां प्रस्तुत करेगा।

शशि थरूर आखिर कैसे काबिज हैं मंत्री पद पर

उपेन्द्र प्रसाद - 2010-03-03 13:14 UTC
विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर एक के बाद एक विवाद पैदा किए जा रहे हैं। जिस तरह के गैर जिम्मेवाराना बयानबाजी वे कर रहे हैं, वैसा करके वे न तो किसी सरकार में और न ही किसी अन्य जिम्मेदारी के पद पर रह सकते हैं। फिर भी वे मनमोहन सिंह सरकार में बखूबी बने हुए हैं। उनके गैर जिम्मेदाराना बयानों से सरकार की नहीं उनकी अपनी पार्टी कांग्रेस की भी फजीहत होती है, लेकिन उन्हें अंतिम मौका देने की बात करके उनकी पार्टी उन्हें माफ कर देती है और प्रधानमंत्री को भी उनमें ऐसा कुछ नहीं दिखाई देता है, जिसके कारण उन्हें सरकार से निकाला जा सके।