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शिक्षा

पत्रकारिता का पुनर्वर्गीकरण और इसके भेद

अनुसंधान को आगे बढ़ाने की जरुरत
डॉ ज्ञान पाठक - 2009-06-16 08:52 UTC
पत्रकारिता का अस्तित्व में आना ही तब संभव हुआ जब सूचनाओं के व्यक्तिगत संप्रेषण को सार्वजनिक करने की जरुरत महसूस हुई। इसके लिए अनेक माध्यमों का सहारा लिया गया और सूचनाओं को अनेकानेक तरीकों से प्रस्तुत किया गया। लेकिन ...
पिरामिड और एक परछाईं

आशा और निराशा के बीच

पाठकों से सीधी बात करती कविताएं
ज्ञान पाठक - 2008-02-21 17:47 UTC
पिरामिड और एक परछाईं रांची विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के पूर्व प्राध्यापक केशव प्रसाद की हाल की कविताओं का संग्रह है जिसमें कवि अपने पाठकों से सीधी बातचीत करते हैं।
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