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जिन्ना की धर्म-निरपेक्षता

राजकिशोर - 2009-08-20 10:01 UTC
मुहम्मद अली जिन्ना का मैं फैन नहीं हूं। न ही पाठक हूं जसवंत सिंह का हूं। मुझे यह भी ठीक-ठीक मालूम नहीं कि जिन्ना धर्मनिरपेक्ष थे या नहीं । जब जिन्ना की तारीफ में किताब लिखने के कारण जसवंत सिंह को भाजपा से निकाल दिया गया, तो मैंने सोचा कि अब तो जिन्ना के बारे में कुछ जान ही लेना चाहिए। मेरा मानना है कि कोई जना धार्मिक है, धर्मनिरपेक्ष है, आधुनिक है या प्रगतिशील है, यह जानने में उसके विचारों, उसकी राजनीति या उसके साहित्य से अधिक उसका निजी और पारिवारिक जीवन ज्यादा सहायक हो सकता है। इसलिए मुहम्मद अली जिन्ना की धर्मनिरपेक्षता की बाबत स्टेनली वोलपर्ट द्वारा लिखित, मुहम्मद अली जिन्ना की प्रामाणिक और प्रसिद्ध जीवनी (हिन्दी अनुवाद अभय कुमार दुबे, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, 2008) से पाकिस्तान के राष्ट्रपिता निजी जीवन की कुछ घटनाओं को मैं यहां प्रस्तुत करना चाहता हूं।
शिक्षा

पत्रकारिता का पुनर्वर्गीकरण और इसके भेद

अनुसंधान को आगे बढ़ाने की जरुरत
डॉ ज्ञान पाठक - 2009-06-16 08:52 UTC
पत्रकारिता का अस्तित्व में आना ही तब संभव हुआ जब सूचनाओं के व्यक्तिगत संप्रेषण को सार्वजनिक करने की जरुरत महसूस हुई। इसके लिए अनेक माध्यमों का सहारा लिया गया और सूचनाओं को अनेकानेक तरीकों से प्रस्तुत किया गया। लेकिन ...
पिरामिड और एक परछाईं

आशा और निराशा के बीच

पाठकों से सीधी बात करती कविताएं
ज्ञान पाठक - 2008-02-21 17:47 UTC
पिरामिड और एक परछाईं रांची विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के पूर्व प्राध्यापक केशव प्रसाद की हाल की कविताओं का संग्रह है जिसमें कवि अपने पाठकों से सीधी बातचीत करते हैं।
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