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अरंगशेखर

अरंगशेखर या अनंगशेखर समान वर्ण वाले दण्डक छन्द का एक भेद है।

इस छन्द का प्रचलन बारहवीं शताब्दी से माना जाता है।

उत्साह, वीरता तथा स्तुति की अभिव्यक्ति में इस छन्द का प्रयोग बहुतायत में मिलता है।
इसके उदाहरण के रुप में जयशंकर प्रसाद की कविता 'हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती' का उल्लेख किया जा सकता है जिसमें अनंगशेखर छन्द की गति दिखायी देती है।


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