आंवला त्रिफला वर्ग के तीन फलों में से एक है।
इसके अनेक औषधीय गुण हैं। इसका स्वाद कसैला होता है।
सर्दी जुकाम दुनिया का सबसे आम रोग है और इससे छुटकारा पाने के तरीके भी सामान्य ही हैं। लेकिन जितनी अवधि तक यह रोग रहता है, हमें परेशान किए रहता है। अभी तक मानव समाज इसका कोई सटीक हल नहीं पा सका है। 12वीं सदी के चिकन सूप से लेकर आधुनिक जमाने के एंटीहिस्टामीन्स तक हमने सब आजमा लिए हैं। लेकिन जिसे खाते ही जुकाम छूमंतर हो जाए वह नुस्खा अभी तक हमें हासिल नहीं हो सका है।आधुनिक दवाओं में दर्द एवं ज्वर निवारक हैं, बंद नाक को खोलने वाली औषधियां हैं। खांसी को बंद करने वाले सिरप हैं, एंटीहिस्टामींस हैं। ये सभी तरीके कुछ हद तक कामयाब हुए हैं, लेकिन पूरी सफलता पाने में कोई काम नहीं आया। सामान्य सर्दी जुकाम होने के बाद उससे निजात पाने के लिए तो तरीके ढूंढ़े गए हैं, लेकिन इसकी रोकथाम के तरीकों को विकसित करने पर ध्यान कम ही दिया गया है। हालांकि आयुर्वेद जैसी प्राचीन परंपरा में रोकथाम पर ध्यान दिया गया है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता: आयुर्वेद हमें बताता है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बना कर खांसी, सर्दी, खराब गले की समस्या से ठीक तरीके से निपटा जा सकता है। दूसरी ओर खांसी-जुकाम की आधुनिक दवाएं इस रोग से मुक्ति तो नहीं दे पातीं, किंतु इसके लक्षणों का इलाज करने में कारगर सिद्ध हुई हैं। इसलिए सर्दी जुकाम से निपटने के लिए हमें बहुविध दृष्टिकोण अपनाना होगा यानी इलाज की नई दवाओं के साथ-साथ रोकथाम के पुराने तरीकों को भी मिलाना होगा। इन दोनों को एक करने के लिए हमें बहुत ध्यान से काम करना होगा।
रोकथाम के पुराने तौर तरीके
- आंवला बहुत महत्वपूर्ण है। आंवले को खांसी, सर्दी और श्वसनप्रणाली के अन्य संक्रमणों के उपचार हेतु प्रयोग किया जाता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। आंवले में संतरे के मुकाबले 20 गुणा विटामिन सी होता है। सेब के मुकाबले आंवले में 3 गुणा अधिक प्रोटीन और 160 गुणा अधिक एस्कॉर्बिक एसिड होता है। आंवले में बहुत से खनिजों और अमीनोएसिड की उच्च मात्रा होती है।
- अदरक की चाय बुखार को तोड़ती है और नाक, गले और फेफड़ों में जमा बलगम को हटाती है। यदि आप बेहद अधिक सर्दी जुकाम की स्थिति से गुजर रहे हैं ,तो दो चम्मच ताजा अदरक लेकर 2 कप पानी में डालें, इसको 30 मिनट तक धीमी आंच पर उबालें, हर दो घंटे बाद इस गुणकारी चाय का आनंद लें।
- सर्दी जुकाम में चिकन और सब्जियों का सूप बड़ा लाभकारी होता है। यदि आप अपने सूप में काली मिर्च मिला लें तो न केवल आपको कई प्रकार की पीड़ाओं से राहत मिलेगी बल्कि यदि बुखार है तो वह भी कम होगा।
- हर्बल चाय ऐसे में लाभकारी होती है। चंद्रगंधा की चाय या नीबू अथवा अदरक की चाय राहत प्रदान करती है। लहसुन भी जुकाम के इलाज में सहायक है।
- गर्म और चटपटी जड़ी बूटियां जैसे काली मिर्च, सूखी अदरक या चित्रक खांसी और सर्दी में फायदेमंद होती हैं।
इसके अनेक औषधीय गुण हैं। इसका स्वाद कसैला होता है।
सर्दी जुकाम दुनिया का सबसे आम रोग है और इससे छुटकारा पाने के तरीके भी सामान्य ही हैं। लेकिन जितनी अवधि तक यह रोग रहता है, हमें परेशान किए रहता है। अभी तक मानव समाज इसका कोई सटीक हल नहीं पा सका है। 12वीं सदी के चिकन सूप से लेकर आधुनिक जमाने के एंटीहिस्टामीन्स तक हमने सब आजमा लिए हैं। लेकिन जिसे खाते ही जुकाम छूमंतर हो जाए वह नुस्खा अभी तक हमें हासिल नहीं हो सका है।आधुनिक दवाओं में दर्द एवं ज्वर निवारक हैं, बंद नाक को खोलने वाली औषधियां हैं। खांसी को बंद करने वाले सिरप हैं, एंटीहिस्टामींस हैं। ये सभी तरीके कुछ हद तक कामयाब हुए हैं, लेकिन पूरी सफलता पाने में कोई काम नहीं आया। सामान्य सर्दी जुकाम होने के बाद उससे निजात पाने के लिए तो तरीके ढूंढ़े गए हैं, लेकिन इसकी रोकथाम के तरीकों को विकसित करने पर ध्यान कम ही दिया गया है। हालांकि आयुर्वेद जैसी प्राचीन परंपरा में रोकथाम पर ध्यान दिया गया है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता: आयुर्वेद हमें बताता है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बना कर खांसी, सर्दी, खराब गले की समस्या से ठीक तरीके से निपटा जा सकता है। दूसरी ओर खांसी-जुकाम की आधुनिक दवाएं इस रोग से मुक्ति तो नहीं दे पातीं, किंतु इसके लक्षणों का इलाज करने में कारगर सिद्ध हुई हैं। इसलिए सर्दी जुकाम से निपटने के लिए हमें बहुविध दृष्टिकोण अपनाना होगा यानी इलाज की नई दवाओं के साथ-साथ रोकथाम के पुराने तरीकों को भी मिलाना होगा। इन दोनों को एक करने के लिए हमें बहुत ध्यान से काम करना होगा।
रोकथाम के पुराने तौर तरीके
- आंवला बहुत महत्वपूर्ण है। आंवले को खांसी, सर्दी और श्वसनप्रणाली के अन्य संक्रमणों के उपचार हेतु प्रयोग किया जाता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। आंवले में संतरे के मुकाबले 20 गुणा विटामिन सी होता है। सेब के मुकाबले आंवले में 3 गुणा अधिक प्रोटीन और 160 गुणा अधिक एस्कॉर्बिक एसिड होता है। आंवले में बहुत से खनिजों और अमीनोएसिड की उच्च मात्रा होती है।
- अदरक की चाय बुखार को तोड़ती है और नाक, गले और फेफड़ों में जमा बलगम को हटाती है। यदि आप बेहद अधिक सर्दी जुकाम की स्थिति से गुजर रहे हैं ,तो दो चम्मच ताजा अदरक लेकर 2 कप पानी में डालें, इसको 30 मिनट तक धीमी आंच पर उबालें, हर दो घंटे बाद इस गुणकारी चाय का आनंद लें।
- सर्दी जुकाम में चिकन और सब्जियों का सूप बड़ा लाभकारी होता है। यदि आप अपने सूप में काली मिर्च मिला लें तो न केवल आपको कई प्रकार की पीड़ाओं से राहत मिलेगी बल्कि यदि बुखार है तो वह भी कम होगा।
- हर्बल चाय ऐसे में लाभकारी होती है। चंद्रगंधा की चाय या नीबू अथवा अदरक की चाय राहत प्रदान करती है। लहसुन भी जुकाम के इलाज में सहायक है।
- गर्म और चटपटी जड़ी बूटियां जैसे काली मिर्च, सूखी अदरक या चित्रक खांसी और सर्दी में फायदेमंद होती हैं।