Loading...
 
Skip to main content

View Articles

लोकसभा चुनाव तक सभी विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस ही आमने-सामने होंगी

यदि कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया, तो बिखराव से बचना मुश्किल
अनिल जैन - 2022-02-15 11:24 UTC
इस समय पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं। इन चुनावों से लेकर 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव तक जितने भी राज्यों में विधानसभा के चुनाव होना हैं, उनमें से एक उत्तर प्रदेश को छोड़ कर बाकी सभी राज्यों में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होना है। इनमें से एक उत्तर प्रदेश को छोड़ कर बाकी सभी राज्यो मे कांग्रेस या तो सरकार में है या मुख्य विपक्षी पार्टी है। इन राज्यों में प्रादेशिक पार्टियां या तो नहीं है या बहुत मामूली हैसियत रखती है। कांग्रेस की जगह लेने के लिए हाथ पैर मार रही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की भी कोई खास हैसियत इन राज्यों में नहीं है।

झारखंड का भाषा विवाद

नहीं संभला, तो हो सकते हैं हिंसक टकराव
उपेन्द्र प्रसाद - 2022-02-14 10:49 UTC
झारखंड में चल रहा भाषा विवाद बद से बदतर रूप लेता दिखाई पड़ रहा है। वहां के आदिवासी और दक्षिणी झारखंड में रहने वाले कुछ गैर आदिवासी भी एक ऐसी समस्या पैदा कर रहे हैं, जो निहायत ही हास्यास्पद है। यह हास्यास्पद तो है, लेकिन इस समस्या ने यदि विकराल रूप धारण किया, तो यह एक बड़ी समस्या बन जाएगी और यह सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं रहेगी।

बजट से जनता की नाउम्मीदी

चारों ओर निराशा का माहौल है
कृष्णा झा - 2022-02-12 11:19 UTC
बजट आ गया। लेकिन उससे उपजने वाली खुशियां नहीं हैं। नाउम्मीदी, असुरक्षा, ध्वस्त होती आर्थिक व्यवस्था में भविष्य का अंधकार ही दीखता है। इसमें बेरोजगार, भूखी जनता के लिये कोई सांत्वना नहीं है। जो कुछ भी इस बजट से आने वाला है, उसे सिर्फ गिरती आर्थिक स्थिति और जीवन स्तर में भारी खालीपन की ही संज्ञा दी जा सकती है। बुनियादी जरूरतों के साथ भी समझौता करना मजबूरी बन गई है। यहां तक कि मध्यम वर्ग भी इस समझौते से गुजर रहा है। इस हाल में किसी भी माल की खपत एक सपना ही है। बाजार जो रंग-बिरंगी चीजों से भरा है, उन्हें खरीदने की न शक्ति बची है और न इच्छा। इसमें उपभोक्ता के आगे आकर खरीद में हिस्सा लेने की कल्पना भी उनकी गरीबी का उपहास ही है।

मेघालय में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार में कांग्रेस की भागीदारी

भाजपा विरोधी गठबंधन के मजबूत निर्माता के रूप में राहुल गांधी की छवि को लगा झटका
नित्य चक्रवर्ती - 2022-02-11 10:40 UTC
मेघालय में कांग्रेस विधायक दल के पांच सदस्यों का भाजपा के साथ सरकार में शामिल होने का निर्णय आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ एकता बनाने के राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों के प्रयासों के लिए एक बड़ा झटका है। पिछले हफ्ते गांधी ने नरेंद्र मोदी सरकार को नंगा करने और एक धर्मनिरपेक्ष और समावेशी भारत की दृष्टि पेश करने के लिए सदन में एक भावपूर्ण भाषण दिया। उनके भाषण ने दो साल बाद आने वाली राष्ट्रीय लड़ाई में भाजपा को चुनौती देने के लिए कांग्रेस सहित गैर-भाजपा दलों के लिए एक मंच पर काम करने का रास्ता खोल दिया।

कर्नाटक का हिजाब विवाद

मतांध जिस भी संप्रदाय के हों, उनका विरोध होना चाहिए
उपेन्द्र प्रसाद - 2022-02-10 10:32 UTC
पांच राज्यों में विधानसभाओं के चुनाव हो रहे हैं और उधर कर्नाटक में हिजाब का विवाद चल रहा है। वह विवाद अब राष्ट्र-व्यापी स्वरूप प्राप्त करता दिखाई दे रहा है, जिसकी गूंज सुप्रीम कोर्ट तक में सुनी गई। देश के सबसे बड़े कोर्ट में याचिका दाखिल कर कर्नाटक हाई कोर्ट में चल रहे उस मामले को खुद देखने का आग्रह किया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया। फिलहाल उस मामले की सुनवाई कर्नाटक हाई कोर्ट के तीन सदस्यों का बेंच कर रहा है।

योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव को अपनी सीटों से जीत का पूरा भरोसा

भाजपा ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख को टक्कर देने के लिए विशाल संसाधन जुटाए
प्रदीप कपूर - 2022-02-09 11:15 UTC
लखनऊः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहली बार अपना विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें अपने प्रतिद्वंद्वियों से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन दोनों को ही जीत हासिल करनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश चुनावः मुस्लिम राजनीति की कड़ी परीक्षा

सवाल यह है कि अल्पसंख्यक अपनी झुंड मानसिकता दिखाएंगे या नहीं
हरिहर स्वरूप - 2022-02-07 10:37 UTC
जैसे-जैसे निर्णय की तारीख नजदीक आ रही है, उत्तर प्रदेश में पार्टियों के बीच उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक सूत्र को सही करने के लिए हाथापाई हो रही है। पिछले कुछ दिनों में बसपा, समाजवादी पार्टी और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन जैसे प्रमुख राजनीतिक खिलाड़ियों ने बड़ी संख्या में मुस्लिम उम्मीदवारों की घोषणा की है। एनडीए ने भी एक मुस्लिम उम्मीदवार की घोषणा की है। यूपी के मुस्लिम बहुल जिलों के पहले चरण के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है, जिसके परिणाम सत्ता की कुंजी हो सकते हैं।

मोदी सरकार और पेगासस का भूत

न्यूयॉर्क टाइम्स का नया खुलासा
कृष्णा झा - 2022-02-05 11:16 UTC
‘‘.....इजरायल की सरकार की समझदारी थी कि इस सशक्त गुप्तशस्त्र को दमन में नहीं उपयोग किया जाय पर पेगासस को पोलैंड, हंगरी और भारत जैसे देशों को ही बेचा गया जिन्हें मानवीय अधिकारों के उल्लंघन के लिये जाना जाता था.....’’ न्यूयार्क टाइम्स के दो पत्रकार, रोनेन बर्गमैन और मार्क मैजेट्टी अपने अखबार में इसी तथ्य को उजागर करते हैं। वे भारत सरकार के पेगासस, जो जासूसी का एक अन्यतम साधन है, को इजरायल की सरकार से 2017 में खरीदने के सौदे को प्रकाश में ला रहे हैं। यह सुरक्षा का सबसे बड़ा सौदा था जिसमें सरफेस टू सरफेस मिसाइल लॉन्चर्स और संचार के लिये इजरायल से आधुनिकतम तकनीक की खरीदारी पर अप्रैल, 2017 में मुहर लगाई गईं। इस सौदे के बाद जुलाई 4-6, 2017 में भारत के प्रधानमंत्री कई वर्षों में पहली बार मैत्रीपूर्ण यात्रा पर इजरायल आए। न्यूयॉंर्क टाइम्स के इन दोनों पत्रकारों के अनुसार इजरायल के लिये पेगासस एक कूटनीतिक शहद के समान था, जिसका उपयोग उन देशों को एकसाथ इकट्ठा करने में किया जाना था जो किसी भी नैतिकता के बंधन से मुक्त थे, दक्षिणपंथी राष्ट्रवाद को मानते थे, अल्पसंख्यकों को कुचलकर बहुसंख्यकों की बुनियाद पर देश की सरकार चलाते थे और जनवाद की ताकत को तोड़ने की कोशिश में लगे रहते थे।

उत्तर प्रदेश चुनाव के पहले चरण में अखिलेश-जयंता गठबंधन को बढ़त

10 फरवरी को 58 सीटों पर जाट-मुसलमान होंगे निर्णायक कारक
प्रदीप कपूर - 2022-02-04 16:54 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश में पहले चरण में 10 फरवरी को 58 विधानसभा सीटों पर मतदान यूपी के बाकी निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मूड और रुझान तय करेगा।

मोदी सरकार के नौवें बजट प्रस्तावों से असमानता और बढ़ेगी

वर्तमान संकट की परवाह किए बिना 2047 में एक नए भारत की योजना बनाना
नित्य चक्रवर्ती - 2022-02-03 17:20 UTC
1 फरवरी को संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत नरेंद्र मोदी सरकार के बजट 2022-23 को कोई कैसे दर्शाता है? बजट तब पेश किया गया जब महामारी की तीसरी लहर अभी खत्म नहीं हुई है, लेकिन निश्चित रूप से पूरे देश में इसकी तीव्रता कम हो रही है। महामारी से प्रभावित लोगों का संकट जारी है और अब तक के सभी अध्ययनों ने संकेत दिया है कि भारतीय समाज में असमानता बढ़ गई है क्योंकि गरीबों और मध्यम वर्ग की आय का स्तर काफी नीचे चला गया है।