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चिराग की बचकाना हरकत

गंवा सकते हैं अपनी संसद सदस्यता भी
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-07-10 11:23 UTC
चिराग पासवान की समस्या का अंत नहीं हो रहा है और वे खुद अपनी समस्याओं को अपनी बचकानी हरकतों से बढ़ाते जा रहे हैं। देश की राजनीति कैसे चलती है, प्रधानमंत्री के क्या अधिकार हैं और संसद के स्पीकर किस आधार पर करते हैं, इन सबकी जानकारी का अभाव होने के कारण वे अपनी किरकिरी खुद करवा रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा अपने कैबिनेट के विस्तार के पहले जब पटना के राजनैतिक हलकों में चर्चा तेज थी कि उनके चाचा पशुपति कुमार पारस भी मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं, तो उन्होंने प्रधानमंत्री को ही धमकी देनी शुरू कर दी कि यदि उनके चाचा को मंत्री बनाया गया, तो प्रधानमंत्री के खिलाफ कोर्ट में जाएंगे। हालांकि अपने कुछ सलाहकारों के कहने पर अपनी धमकी में उन्होंने थोड़ा सा सुधार कर दिया और कहा कि यदि लोकजनशक्ति पार्टी के सांसद के रूप में पारस का मंत्री के रूप में शपथग्रहण होता है, तब वे कोर्ट में जाएंगे।

रफैल सौदे में फ्रांसीसी न्यायिक जांच भारत में इसी तरह की जांच को सही ठहराती है

हस्ताक्षरकर्ता होने के नाते अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते नरेंद्र मोदी
प्रकाश कारत - 2021-07-09 08:59 UTC
’भ्रष्टाचार’, ’प्रभाव-पेडलिंग’, ’मनी लॉन्ड्रिंग’, ’पक्षपात और अनुचित कर छूट’ में 7.87 बिलियन डॉलर के राफेल-इंडिया सौदे में 14 जून, 2021 को फ्रांस में एक न्यायिक जांच का फैसले ने उस उस युद्धक विमान की खरीद से संबंधि तमामले को एक नया मोड़ दिया है। उस बड़े घोटाले को दबाने की नरेंद्र मोदी सरकार ने पूरी कोशिश की है। सौदे में न्यायिक जांच का निर्णय भ्रष्टाचार विरोधी फ्रांसीसी गैर सरकारी संगठन शेरपा की शिकायत पर आधारित था। यह निर्णय स्वतंत्र फ्रांसीसी ऑनलाइन खोजी पत्रिका मेडियापार्ट द्वारा प्रकाशित खोजी लेखों (“राफेल पेपर्स“ शीर्षक से) की एक श्रृंखला से प्रभावित था।

मोदी मंत्रिपरिषद में फेरबदल और विस्तार

क्या यह उत्तर प्रदेश चुनाव की जीत के लिए पर्याप्त है?
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-07-08 09:46 UTC
मोदी मंत्रिपरिषद से 12 मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और 34 नये मंत्रियों को शामिल कर लिया गया है। 2019 की चुनावी जीत के बाद मंत्रिपरिषद के किया गया यह पहला फेरबदल और विस्तार है। यह विस्तार बंगाल चुनाव की हार के बाद उत्तर प्रदेश चुनाव में हार की आशंका के बीच किया गया है। जाहिर है, इसका सबसे प्रमुख राजनैतिक उद्देश्य उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत सुनिश्चित करना ही है। कुछ लोगों को बाहर करने के पीछे मोदी की अपनी छवि चमकाने का उद्देश्य भी है और छवि भी अंततः चुनाव जीतने के ही काम आती है। इसलिए रविशंकर प्रसाद, सदानंद गौड़ा, हर्षवर्धन और जावड़ेकर जैसे मंत्रियों को भी हटा दिया गया है।

प्रधानमंत्री ने अपने 1 जुलाई के संबोधन में चिकित्सा पेशेवरों से असत्य कहा

टीकाकरण कार्यक्रम की सफलता के बारे में शेखी बघारना गलत है
डॉ. अरुण मित्रा - 2021-07-07 10:18 UTC
चिकित्सा एक पेशा नहीं एक जुनून है। रोग की रोकथाम और रोगियों का उपचार करने से डॉक्टर को अपार खुशी मिलती है। कारण के लिए समर्पित व्यक्ति प्रशंसा की आवश्यकता से परे होता है। हालांकि सरकार के मुखिया के मुंह से चिकित्सा पेशेवर के काम की मान्यता अलग बात है। प्रधानमंत्री ने 1 जुलाई को डॉक्टरों की प्रशंसा करने के लिए शब्दों का उपयोग करने की कला का बहुत अच्छी तरह से उपयोग किया, जो एक चिकित्सक, शिक्षाविद्, परोपकारी, स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता, जिन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया, की स्मृति को समर्पित किया।

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री परिवर्तन

रावत हो या धामी, चुनाव तो मोदी के चेहरे पर ही होना है
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-07-05 09:34 UTC
उत्तराखंड को लेकर भाजपा नेतृत्व बेचैन है। वह बेचैन तो उत्तर प्रदेश को लेकर भी था और इसलिए वहां मुख्यमंत्री योगी को हटाना चाहता था, लेकिन योगी हटने को तैयार ही नहीं हुए। उन्हें जबर्दस्ती हटाया जा सकता था, लेकिन उनके साथ जोर जबर्दस्ती करने के खतरे थे, क्योकि योगी स्वतंत्र दिमाग के आदमी हैं। वह एक अलग पार्टी बना लेते और प्रदेश की सभी सीटों से उम्मीदवार खड़ा कर देते। इससे अंततः भाजपा का ही नुकसान हो जाता। इसलिए उनको हटाया नहीं जा सका।

रूठा मानसून, संकट में खेती और निष्ठुर राजनीति

मौसम विभाग की भविष्यवाणी आमतौर पर गलत साबित होती है
अनिल जैन - 2021-07-03 12:19 UTC
भारत में मानसून को लेकर मौसम विभाग का अनुमान या भविष्यवाणी आमतौर पर गलत ही साबित होती है। इसलिए इस बार भी ऐसा हो रहा है तो कोई आश्चर्य नहीं। इस बार भी मौसम विभाग ने मानसून समय पर आने की भविष्यवाणी करते हुए 104 से 110 फीसद वर्षा की संभावना जताई है। इस स्थिति को सामान्य से अधिक वर्षा माना जाता है, लेकिन मौसम विभाग का यह अनुमान हकीकत से दूर नजर रहा है। मानसून की आमद में हो रही देरी से पिछले दिनों बेमौसम बारिश की मार झेल चुके कृषि क्षेत्र का संकट और गहरा हो गया है। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों से पैदा हुआ संकट भी अभी कायम है, जिसके खिलाफ पिछले सात महीने से कई राज्यों के किसान आंदोलन कर रहे हैं।

मोदी-शाह की जोड़ी जम्मू-कश्मीर पर अपने गेम प्लान के साथ आगे बढ़ रही है

24 जून की बैठक में सिर्फ दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के लोगों के बीच खाई बढ़ी
प्रकाश कारत - 2021-07-02 09:35 UTC
मोदी-शाह की जोड़ी अपने हिंदुत्व विश्वासों के आधार पर जम्मू-कश्मीर के आवश्यक चरित्र को बदलने की अपनी जिद को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

विपक्ष ने लगाया जिला पंचायत चुनाव में सत्ता के दुरूपयोग का आरोप

भाजपा के 21 जिला परिषद अध्यक्ष निर्विरोध निर्वाचित
प्रदीप कपूर - 2021-07-01 14:57 UTC
लखनऊः विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ भाजपा पर अधिक से अधिक जिला पंचायतों पर कब्जा करने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। भाजपा पहले ही 21 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर निर्विरोध जीत चुकी है, जबकि 3 जुलाई को 53 जिलों में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच सीधी लड़ाई होगी। चूंकि बसपा अध्यक्ष मायावती ने घोषणा की कि उनकी पार्टी जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव नहीं लड़ेगी, समाजवादी पार्टी, भाजपा और अन्य दल अपने उम्मीदवारों को जिताने में लगे हैं।

चिराग को तेजस्वी का ऑफर मंजूर नहीं

रामविलास के बेटे के लिए मोदी क्यों जरूरी हैं
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-06-30 09:49 UTC
राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव बहुत खुश हैं कि रामविलास पासवान द्वारा गठित लोकजनशक्ति पार्टी में फूट पड़ गई है और पांच सांसदों ने मिलकर रामविलास के बेटे चिराग पासवान को दरकिनार कर दिया है। वे बार बार अपील कर रहे हैं कि चिराग उनके साथ जुड़ जाएं। राजद के एक नेता ने तो चिराग को लालू के दल में शामिल होने की अपील भी कर डाली, लेकिन इन अपीलों का कोई प्रभाव चिराग पासवान पर नहीं पड़ रहा है। चिराग पासवान को अभी भी नरेन्द्र मोदी से ही उम्मीद है। वे भारतीय जनता पार्टी और मोदी को उलाहना तो दे सकते हैं कि वे उनकी रक्षा करने को नहीं आ रहे हैं, लेकिन उनकी आलोचना करने की हिम्मत वे नहीं जुटा रहे हैं।

आरएसएस और आपातकाल

तत्कालीन संघ प्रमुख देवरस ने इन्दिरा के समर्थन में पत्र लिखे थे
अनिल जैन - 2021-06-28 09:39 UTC
आपातकाल के 46 वीं बरसी के मौके पर कई लोगों ने मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए भारतीय लोकतंत्र के उस त्रासद और शर्मनाक कालखंड को अलग-अलग तरह से याद किया। याद करने वालों में ऐसे तो हैं ही जो आपातकाल के दौरान पूरे समय जेल में रहे थे या भूमिगत रहते हुए आपातकाल और तानाशाही के खिलाफ संघर्ष में जुटे हुए थे। मगर आपातकाल को उन लोगों ने भी बढ-चढकर याद किया, जो अपनी गिरफ्तारी के चंद दिनों बाद ही माफीनामा लिखकर जेल से बाहर आ गए थे, ठीक उसी तरह, जिस तरह विनायक दामोदर सावरकर अंग्रेजों से माफी मांग कर जेल से बाहर आए थे।