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मध्य प्रदेश में कोविड की स्थिति में सुधार से राहत

सार्वजनिक भागीदारी आधारित मॉडल की सफलता
एल एस हरदेनिया - 2021-05-21 11:51 UTC
भोपालः मध्य प्रदेश की दूसरी कोरोना लहर शुरू होने के बाद से भारी मुश्किलों का सामना करने के बाद पिछले दो-तीन दिनों से लोग कुछ राहत महसूस कर रहे हैं। समाचार पत्र नए मामलों की संख्या में गिरावट और मौतों की संख्या के बारे में रिपोर्ट दे रहे हैं।

दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित भारत क्यों?

सरकार की अविवेकपूर्ण नीतियां इसके लिए जिम्मेदार
डॉ अरुण मित्रा - 2021-05-20 13:15 UTC
कोविड मामलों की संख्या और इससे होने वाली मौतों की संख्या गंभीर चिंता का विषय है। वर्तमान में भारत संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद दुनिया में कोविड मामलों की कुल संख्या में दूसरे नंबर पर है। यह सच है कि हमारे पास एक बड़ी आबादी है और इसलिए संख्या अधिक है, लेकिन दक्षिण एशिया के अन्य देशों के साथ अनुपातिक संख्या की तुलना भी चिंताजनक है। हम एक ही जातीय पृष्ठभूमि से आते हैं, समान संस्कृति, भोजन की आदतें, पोषण की स्थिति है और आय में असमानताओं के साथ-साथ स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली तक पहुंच में असमानताएं समान हैं।

कोरोना ने कामकाजी महिलाओं को बना दिया है बेरोजगार

घरों में काम करने वाली महिलाओं की सरकार सहायता करे
एल. एस. हरदेनिया - 2021-05-19 09:53 UTC
लॉकडाउन के कारण वेतनभोगी लोगों को छोड़कर समाज का कोई वर्ग ऐसा नहीं है जिसकी आय लगभग शून्य न हो गई हो। इसी तरह के वर्ग में घरेलू कामकाज करने वाली महिलाएं (जिन्हें डोमेस्टिक वर्कर कहा जाता है) शामिल हैं।

कोविशील्ड पर असमंजस में लोग

सरकार की सफाई ने भ्रम और भी बढ़ाया है
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-05-18 09:57 UTC
मोदी सरकार कोरोना संकट शुरू होने के साथ ही बहुत ही गैरजिम्मेदारान तरीके से इसे हैंडल कर रही है। शुरू में ही लॉकडाउन का जिम्मा उसे राज्य सरकारों को देना चाहिए था और जहां जरूरत थी, वहीं लॉकडाउन लगाना चाहिए था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने एक साथ ही पूरे देश में लॉकडाउन घोषित कर दिया और उसके साथ जो समस्याएं आने वाली थी, उसके बारे में कुछ भी सोचना जरूरी नहीं समझा। केन्द्र सरकार ने गड़बड़ियों का एक लंबा सिलसिला शुरू किया, जो अभी भी जारी है। पांच राज्यों में चुनाव को लंबा खींचवाना और कुम्भ की इजाजत देना केन्द्र सरकार के ऐसे दो कदम हैं, जिनके कारण देश में कोरोना की दूसरी बहुत ही भयानक लहर उठी और उसमें करोड़ों परिवार तबाह हो गए। इसके लिए दुनिया भर में नरेन्द्र मोदी निंदा हो रही है। लापरवाही और गैरजिम्मेदारी यही तक सीमित नहीं है।

शर्म निरपेक्ष सत्ता की संवेदना के मरने का ऐलान करते बयान

भागवत अब मोदी के पिछलग्गू हो गए हैं
अनिल जैन - 2021-05-17 11:03 UTC
एक तरफ दुनिया के तमाम छोटे-बडे़ और अमीर-गरीब सभ्य देश हैं, जिन्होंने भारत में कोरोना महामारी के चलते अस्पतालों में मरीजों की भीड, ऑक्सीजन और जरूरी दवाओं के अभाव में असमय दम तोड रहे लोगों, श्मशान में अंतिम संस्कार के लिए लगी कतारों, जलती चिताओं से उठती लपटों, नदियों में तैर रही इंसानी लाशों पर मंडराते चील-कौवों की तस्वीरे देख कर सच्ची संवेदना दिखाई है और मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। तो दूसरी ओर भारत में केंद्र सरकार, सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ओर से लगातार मगरूरी भरे ऐसे बयान आ रहे हैं, जो लोगों के जले पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं।

यूपी पंचायत चुनाव के नतीजों के संदेश

अगले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को हराया जा सकता है
प्रदीप कपूर - 2021-05-15 10:14 UTC
लखनऊः पंचायत के नतीजों के बाद भाजपा की प्रमुख जिलों में अपमानजनक हार का सामना करने के बाद विपक्ष उत्साहित है।

एक ठोस डेटा संरक्षण प्रणाली की आवश्यकता है

भारत सही राह पर है, लेकिन धीमी गति से आगे बढ़ रहा है
आशीत कुमार श्रीवास्तव - 2021-05-13 09:50 UTC
यह 2017 था, जब सुप्रीम कोर्ट ने के.एस. पुट्टस्वामी केस में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकारों के एक भाग के रूप में मान्यता दी। इसके अलावा, यह भी महसूस किया कि डिजिटल गोपनीयता स्थानिक गोपनीयता जितना ही हत्वपूर्ण है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और संजय किशन कौल सम्मानजनक उल्लेख के पीठ ने यह फैसला सुनाया था।

कोविड-19 की दूसरी लहर रोजगार समाप्त कर रही है

आर्थिक सुधार तबाह हो गया है और जीडीपी सिकुड़ रहा है
ज्ञान पाठक - 2021-05-11 11:26 UTC
फरवरी 2021 से शुरू हुई कोविड 19 की दूसरी लहर न केवल भारत में आर्थिक सुधार को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है, बल्कि इससे जीडीपी में संकुचन का भी खतरा है और इसके परिणामस्वरूप बेरोजगारी में तेज उछाल आया है। एसएंडपी के मध्यम और गंभीर नकारात्मक परिदृश्य ने भारत के विकास के लिए 1.2 - 2.8 प्रतिशत अंक का अनुमान लगाया है, और नवीनतम सीएमआईई की 30-दिवसीय चलती औसत बेरोजगारी की दर 9 मई 2021 को 8.2 प्रतिशत है, जो 2.5 प्रतिशत की वृद्धि है पिछले महीने की तुलना में।

बाजार और कालाबाजार

क्या यही भारत की नियति है?
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-05-10 12:24 UTC
भारत में हम दो बड़ी घटनाओं के प्रत्यक्षदर्शी हैं। एक घटना तो कोरोना संकट है, जिसका सामना करने में सरकार न केवल विफल रही है, बल्कि इस संकट का समाधान करने की जगह उसने इस आपदा को अवसर के रूप में इस्तेमाल करने की नीति बनाई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसे कई बार कह भी चुके हैं कि यह अपदा उनके लिए अवसर है। वे शब्दों का जाल फेंकते हुए वे कहते हैं कि इस आपदा का इस्तेमाल वे भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कर रहे हैं, लेकिन आत्मनिर्भर से उनका मतलब क्या है, इसे वे कभी भी स्पष्ट नहीं करते। वैसे एक आम समझ वाली व्यक्ति देश की आत्मनिर्भरता से यही अर्थ लगाता है कि हमारा देश अब विदेशों पर निर्भर नहीं रहेगा।

अगर विश्वसनीय विकल्प हो तो भाजपा को हराया जा सकता है

केरल ने भारी बहुमत से जीत दर्ज कर रास्ता दिखाया है
बिनॉय विश्वम - 2021-05-08 09:35 UTC
जब संघ परिवार के प्रचार तंत्र कोविड संकट के दौरान मोदी का महिमागान कर रहे थे, पांच भारतीय राज्यों के लोगों ने तब एक अलग कहानी लिखी। वे अपना फैसला लेकर आए। ये राज्य देश के दक्षिण, पूर्व और पूर्वोत्तर क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी प्रतिक्रिया भारत के समकालीन इतिहास पर समग्र रूप से निर्विवाद प्रभाव छोड़ती है। बेशक, चुनावी नतीजों की प्रकृति सभी पांच राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में समान नहीं थी। लेकिन लोगों के फैसले का निष्कर्ष काफी हद तक भाजपा के लालची खेल योजना के लिए एक गंभीर झटका था। भाजपा को केरल, तमिलनाडु और बंगाल में एक स्पष्ट निहितार्थ का सामना करना पड़ा और उस आघात की भरपाई असम और पांडिचेरी में छोटी जीत से नहीं की जा सकती है। लोगों द्वारा भाजपा से जुड़े अजेयता टैग को फाड़ दिया गया।