शर्म निरपेक्ष सत्ता की संवेदना के मरने का ऐलान करते बयान
भागवत अब मोदी के पिछलग्गू हो गए हैं
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2021-05-17 11:03 UTC
एक तरफ दुनिया के तमाम छोटे-बडे़ और अमीर-गरीब सभ्य देश हैं, जिन्होंने भारत में कोरोना महामारी के चलते अस्पतालों में मरीजों की भीड, ऑक्सीजन और जरूरी दवाओं के अभाव में असमय दम तोड रहे लोगों, श्मशान में अंतिम संस्कार के लिए लगी कतारों, जलती चिताओं से उठती लपटों, नदियों में तैर रही इंसानी लाशों पर मंडराते चील-कौवों की तस्वीरे देख कर सच्ची संवेदना दिखाई है और मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। तो दूसरी ओर भारत में केंद्र सरकार, सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ओर से लगातार मगरूरी भरे ऐसे बयान आ रहे हैं, जो लोगों के जले पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं।