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कोविड-19 और हमलोग

कोरोनावायरस एक चुनौती है और संदेश भी
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-10-14 10:17 UTC
पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत भी कोरोनावायरस की चपेट में है। भारत इससे शेष दुनिया की अपेक्षा कुछ ज्यादा ही पीड़ित है। सबसे ज्यादा संक्रमित संख्या वाला देश बनने की ओर यह अग्रसर है और वायरस के संक्रमण से ज्यादा खतरनाक इसे अपनी अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर हो रहा है। चारों ओर तबाही ही तबाही है। सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों से समस्या सुलझने के बदले और भी विकराल होती जा रही है। इस आपदा को अनेक निहित स्वार्थ अवसर में तब्दील करने पर लगे हुए हैं, जिससे जनत्रासदी और भी बढ़ रही है। दुर्भाग्य है कि उन स्वाथी तत्वों में हमारी सरकार भी शामिल हो गई है, जो इस आपदा के समय में आर्थिक नीतिगत मोर्चे पर ऐसे ऐसे बदलाव कर रही है, जिससे लोगों का शोषण और उत्पीड़न आने वाले समय में और बढ़ेगा। श्रम कानूनों को श्रमिकों के खिलाफ किया जा रहा है। अन्य कानूनों का भी यही हाल है।

भारतीय अर्थव्यस्था अब पटरी पर आती दिख रही है

सरकार को कोविड काल में इसे नई गति देने के लिए तैयार रहना चाहिए
नंतू बनर्जी - 2020-10-13 10:10 UTC
यह अच्छा है कि देश का जीएसटी संग्रह मार्च के बाद पहली बार विकास की पटरी पर लौटा है। आर्थिक गतिविधियों का क्रमिक सामान्यीकरण और लॉकडाउन प्रतिबंधों से बाहर निकलना और एक पूरे इलाके या एक विशेष घर के लिए आवास परिसर पर प्रतिबंध क्षेत्रों की परिभाषा को बदलना मुख्य रूप से देश की आर्थिक स्थिति में थोड़ी सुधार के लिए जिम्मेदार हैं। इससे सरकार के उपभोक्ता कर संग्रह को बेहतर बनाने में मदद मिली है।

सिर्फ विज्ञापन चोरी का मामला नहीं है टीआरपी घोटाला

यह देश और समाज को मानसिक रूप से बीमार करने का मामला भी है
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-10-12 10:16 UTC
टीवी चैनलों के टीआरपी घोटाले की चर्चा भले आज बहुत तेज हो गई हो, लेकिन यह कोई नया घोटाला नहीं है। 2000 ईस्वी से टीआरपी की सिस्टम अस्तित्व में आई थी। तब कोई टैम नाम का संगठन इसे संचालित करता था। उसने देश के मात्र 2000 घरों में अपनी मशीन लगा रखी थी और मात्र 2000 घरों में देखे जा रहे प्रोग्राम्स या न्यूज के आधार पर वह तय कर देता था कि देश के करोड़ों लोगों में सबसे कितने करोड़ ने किस चैलन को देखे।

बज चुका है मध्यप्रदेश में उपचुनाव का बिगुल

कमलनाथ और सिंधिया की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है
एल एस हरदेनिया - 2020-10-10 10:03 UTC
भोपालः कांग्रेस और भाजपा दोनों द्वारा उम्मीदवारों की सूचियों की घोषणा के साथ, 28 विधानसभा क्षेत्रों में युद्ध की रेखाएँ खींच दी गई हैं। 3 नवंबर, 2020 को जनता मतदान करने वाली हैं।

रामविलास पासवान का निधन और बिहार चुनाव

करवट ले सकती है बिहार की राजनीति
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-10-09 08:35 UTC
बिहार विधानसभा चुनाव के बीच रामविलास पासवान का निधन एक बड़ी घटना है, जिसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है। वैसे उनकी मौत कोई अकाल मौत नहीं है, जिसके कारण एक सहानुभूति लहर दौड़ जाती है। वे बहुत दिनों से बीमार थे और एक महीने से भी ज्यादा समय से अस्पताल में गंभीर हालत में भर्त्ती थे। दस साल से भी पहले उन्हें एक बार हार्ट अटैक आया था और उसके बाद से ही वे लगातार इलाज में चल रहे थे। इस बार उनकी तबियत कुछ ज्यादा ही खराब थी। हृदय रोग के साथ साथ उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी और अन्य महत्वपूर्ण अंग भी सही तरीके से काम नहीं कर रहे थे। लिहाजा, उनकी यह मौत आकस्मिक नहीं है। उनके समर्थकों को भी लग रहा था कि कुछ अप्रिय हो सकता है।

भारत के चौबोलों के पास सबकुछ है

प्रभावी ट्रस्ट वॉचडॉग की आवश्यकता है
के रवीन्द्रन - 2020-10-08 09:54 UTC
राहुल गांधी के लिए मोदी को कोसना एक पसंदीदा शगल है। वह नीरस लगने की बात की हद तक दैनिक दिनचर्या के रूप में ऐसा कर रहे हैं। लेकिन उन्होंने मोदी सरकार के बारे में कुछ जमीनी सच्चाइयाँ कही हैं, जो दुर्भाग्यवश इस पर लोगां का ध्यान नहीं गया है। इसका कारण यह है कि राहुल गांधी में एक ही बात को दुहराते रहने की आदत है।

बिहार चुनाव में हो रही है दिलचस्प बातें

चिराग का निशाना नीतीश, तो तेजस्वी कन्हैया को लेकर अभी भी सशंकित
अरुण श्रीवास्तव - 2020-10-07 10:39 UTC
जाहिर तौर पर एनडीए और ग्रैंड अलायंस, दोनों गठबंधनों के नेताओं ने एक प्रभावी सीट साझा करने के फॉर्मूले को सफल बनाने में कामयाबी हासिल की है, लेकिन बंद कमरे की चर्चाओं से निकलने वाले असंतोष के स्वर प्रमुख विस्फोटकों की ओर इशारा करते हैं।

भाजपा की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं चिराग

अतिशय विश्वास नीतीश को पड़ सकता है भारी
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-10-05 11:00 UTC
बिहार में इतिहास दुहराया जा रहा है। 2005 में केन्द्र में यूपीए की सरकार थी। उसमें रामविलास पासवान और लालू यादव मंत्री थे। उसी साल बिहार में विधानसभा के चुनाव हुए। तब चुनाव में लालू यादव का राजद और यूपीए का नेतृत्व कर रही कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़े, लेकिन केन्द्र में यूपीए सरकार का हिस्सा होने के बावजूद रामविलास पासवान अलग होकर लड़े। अब 2020 में केन्द्र में नीतीश कुमार और रामविलास पासवान एनडीए का हिस्सा हैं। बिहार में विधानसभा का चुनाव हो रहे हैं। एनडीए का नेतृत्व करने वाली भारतीय जनता पार्टी और नीतीश का जदयू मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं और रामविलास पासवान की पार्टी अलग से चुनाव लड़ रही है। उस समय चुनाव प्रचार के दौरान और उसके पहले से ही रामविलास पासवान बिहार को जंगल राज कहते थे और लालू यादव की आलोचना में कोई कसर नहीं छोड़ते थे। आज उनका बेटा चिराग पासवान भी नीतीश कुमार की आलोचना में किसी प्रकार की कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

संधवाद पर हो रहा है कुठाराघात

मौजूदा सरकार देश को एकात्मक राज्य की ओर ले जा रही है
प्रभात पटनायक - 2020-10-03 10:06 UTC
संघवाद भारतीय संविधान की मूल विशेषताओं में से एक है। संविधानसभा में प्रोफेसर केटी शाह ‘फेडरल’ शब्द को ‘सेक्युलर’ शब्द के साथ ही प्रस्तावना में शामिल करना चाहते थे, लेकिन डॉ अंबेडकर ने इसे इस आधार पर खारिज कर दिया कि गणतंत्र के संघीय और धर्मनिरपेक्ष चरित्र तो संविधान में अंतर्निहित था। सातवीं अनुसूची में संविधान ने केंद्र और राज्यों के अधिकार क्षेत्र को दो सूचियों में और सामान्य क्षेत्राधिकार के क्षेत्रों को एक तीसरी सूची में शामिल किया। तब से केंद्र ने हमेशा राज्यों के डोमेन का अतिक्रमण करने की कोशिश की है, लेकिन इस प्रवृत्ति ने अब एक ताकत हासिल कर ली है, जहां दावा किया जा सकता है कि देश को एकात्मक राज्य की ओर धकेला जा रहा है और यह कोई अतिशयोक्ति नहीं है।

गांधीजी के कुछ विचार जो आज भी प्रासंगिक हैं

‘क्लब’ कांग्रेस को उन्होंने एक ताकतवर संगठन बना दिया था
एल एस हरदेनिया - 2020-10-01 16:28 UTC
वर्ष 2019, 2 अक्टूबर से वर्ष 2020, 2 अक्टूबर तक सारे देश क्या, सारी दुनिया को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनानी थी। जयंती मनाने के लिए जबरदस्त तैयारियां हो चुकी थीं। परंतु कोरोना के हमले के कारण ये सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं। यदि सब कुछ सामान्य रहा होता तो 2 अक्टूबर को सारे देश में जयंती के आयोजनो का समापन अनेक कार्यक्रमों से होता।