फिर देश भर में उसे दुहराने का पागलपन क्यों?
उपेन्द्र प्रसाद
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2019-12-20 13:33 UTC
राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर यानी एनआरसी को तैयार कर घुसपैटियों की पहचान करने की कोशिश असम में हो चुकी है। जो लोग उस कोशिश के प्रति बहुत आशावान थे, वे आज निराश हैं और उसे एक विफल प्रयास मान रहे हैं। उन्हें उम्मीद थी कि कम से कम एक करोड़ लोग घुसपैठिये के रूप में सामने आएंगे और कुछ अपवादों को छोड़कर वे सारे के सारे बांग्लादेशी मुसलमान होंगे। लेकिन जब यह कसरत समाप्त हुई, तो पता चला कि मात्र 19 लाख लोग ही ऐसे पाए गए हैं, जिनकी भारतीय नागरिकता संदिग्ध है और उनमें से 70 फीसदी तो हिन्दू ही ही हैं। और जो घुसपैठियों के रूप में पहचान लिए गए हैं, उन्हें भारत से निकाला ही नहीं जा सकता। उन्हें भारत में ही रखना होगा, भले उनके लिए अलग से डिटेंशन कैंप बनाकर उन्हें उनमें रखा जाय, लेकिन इस समाधान के भयानक खतरे हैं।