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सोनिया परिवार क्यों बोझ है कांग्रेस पर?

कांग्रेस को परिवार की छत्रछाया से बाहर आना ही होगा
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-06-21 09:55 UTC
कांग्रेस के लिए यह अच्छी खबर है कि राहुल गांधी अध्यक्ष पद पर नहीं बने रहना चाहते हैं। यह और भी अच्छी बात है कि वह यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके परिवार का कोई अन्य सदस्य भी इस पद पर नहीं बैठे। यह कांग्रेस के अंदर पनप रही चापलूसी संस्कृति के लिए बहुत बड़ा झटका है और चापलूसों और चमचांे को राहुल गांधी का यह फैसला निश्चय ही बहुत अखर रहा होगा। अब तो नये कांग्रेस अध्यक्ष के कुछ नाम भी सामने आने लगे हैं। कभी सुशील कुमार शिंदे का नाम आता है, तो कभी मनीष तिवारी का। एक बार तो खड़गे का नाम भी सामने आया। फिलहाल अशोक गहलौत के नाम को गंभीरता से लिया जा रहा है। पूर्व हाॅकी खिलाड़ी कांग्रेस के नेता असलम शेर खान ने खुद अपना नाम प्रस्तावित करते हुए दो साल के लिए अध्यक्ष पद संभालने की इच्छा संभाली।

कमलनाथ ने मंत्रिमंडल में सहयोगी दलों को शामिल करने की पहल की

भाजपा की चुनौती का सामना करने के लिए मुख्यमंत्री की योजना
एल एस हरदेनिया - 2019-06-20 11:25 UTC
भोपालः अपनी सरकार के छह महीने पूरे होने की पूर्व संध्या पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपनी सरकार को अस्थिर करने के भाजपा के मंसूबे को हराने के लिए एक अनूठा सूत्र सुझाया है। सोनिया गांधी को संबोधित एक पत्र में कमलनाथ ने उनसे अपने मंत्रिमंडल में छह रिक्तियों को संभव बनाने का अनुरोध किया है। ऐसा तब किया जा सकता है जब तीन गुट के नेता अपने दो प्रत्याशियों को स्वेच्छा से मंत्रालय छोड़ने के लिए कहें। तीन गुट के नेता खुद दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ हैं।

क्या 2022 तक हम न्यू इंडिया प्राप्त कर लेंगे?

लंबी लंबी बातों से सच्चाई छिप नहीं जाती
ज्ञान पाठक - 2019-06-19 17:52 UTC
मोदी ने भारत में ’अच्छे दिनों’ की शुरुआत के लिए 60 महीने का समय मांगा था। लोगों ने उन्हें 2014 में भारत का प्रधानमंत्री बनने के लिए वोट दिया। तीन साल बीत गए। अच्छे दिन नहीं आए। फिर वह 2022 तक पांच साल के भीतर एक न्यू इंडिया बनाने का विचार लेकर आए। 2017-22 की अवधि को बार-बार पंचवर्षीय योजना के रूप में उल्लेख किया गया था, और नई बनाई गई सरकारी थिंक टैंक, नीति आयोग को इस पर काम करने के लिए सक्रिय किया गया था। राजनीतिक रूप से इसने उनके लिए काम किया और उन्हें पांच साल के लिए और विस्तार मिला, हालांकि वादा किया गया ‘अच्छे दिन’ उनके शासन के 60 महीनों के अंत तक ‘बुरे दिन’ में बदल गए। 2019 के चुनाव अभियान के दौरान, उन्होंने भारत में 1942-47 के बीच की अवधि के साथ अगले पांच साल यानी 2019-24 की तुलना की।

गरमी के कहर को किसने बनाया जानलेवा?

हमारी सरकारों और हमारे सामाजिक तंत्र का निष्ठुर रवैया जिम्मेदार
अनिल जैन - 2019-06-18 13:44 UTC
देरी से ही सही मगर मॉनसून केरल के तट पर दस्तक देता हुआ इस वर्ष की अपनी भारत-यात्रा पर निकल पडा है। चूंकि इस बार केरल में ही मॉनसून के आने में पूरे एक सप्ताह की देरी हुई है तो जाहिर है कि देश के बाकी हिस्सों में भी उसकी आमद में देरी होगी ही। मॉनसून के इंतजार में व्याकुल हो रहे देश के विभिन्न हिस्सों को इस समय भीषण गरमी ने बुरी तरह झुलसा रखा है। वैसे तो हर साल मई के महीने में गरमी पूरे शबाब पर होती है और जून आते-आते जब धूल भरी आंधी चलने लगती है तो गरमी का असर कुछ कम होने लगता है। मगर इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। आधा जून बीतने को है लेकिन गरमी कम होने का नाम ही नहीं ले रही है।

दक्षिणपंथ का उदय और वामपंथ का पतन

क्या कम्युनिस्ट 21वीं सदी के लिए अनफिट हैं?
अमूल्य गांगुली - 2019-06-17 12:53 UTC
यह एक संयोग नहीं हो सकता है कि दक्षिणपंथी भाजपा का उत्थान और केंद्रीय-वाम और वाम दलों का पतन साथ साथ रहा है।

मोदी के दूसरे कार्यकाल में मजदूर संगठनों के कठिन समय

मजदूरों के मसलों को मिलनी चाहिए उच्च प्राथमिकता
सुकुमार दामले - 2019-06-16 09:52 UTC
संयुक्त ट्रेड यूनियन मूवमेंट (बीएमएस को छोड़कर) ने मुख्य रूप से मोदी सरकार हटाने की मांग उनकी मजदूर विरोधी नीतियों के कारण किया था। उनकी वह वह हड़ताल अखिल भारतीय थी। 8 जनवरी को शुरू हुई थी और 9 जनवरी को दूसरे दिन भी जारी रही। उस हड़ताल को भारी सफलता मिली थी।

‘इन्दिरा और राजीव शहीद नहीं हैं’

आरएसएस का मुखपत्र ‘ऑर्गेनाइजर’ का यही मानना है
एल. एस. हरदेनिया - 2019-06-16 09:48 UTC
भोपालः रााष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नजर में इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को शहीद नहीं कहा जा सकता। उनकी हत्याएं सामान्य हत्याओं के अलावा और कुछ नहीं थीं। यह राय ‘ऑर्गेनाइजर’ में प्रकाशित एक लेख की है। यह एक पत्रिका है, जो आरएसएस के विचारों का प्रचार करती है। यह लेख पत्रिका के 2 जून के अंक में प्रकाशित हुआ है।

आंध्र में पांच उप मुख्यमंत्री, एक फूहड नजीर

अनिल जैन - 2019-06-13 10:37 UTC
किसी भी राज्य की सरकार में उप मुख्यमंत्री बनाया जाना कोई नई बात नहीं है। विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल में अपने सूबे की राजनीतिक और सामाजिक समीकरण साधने या प्रशासनिक तकाजे के तहत अपने किसी वरिष्ठ मंत्री को उप मुख्यमंत्री मनोनीत करते रहे हैं। किसी-किसी प्रदेश में गुटीय या सामाजिक संतुलन साधने के मकसद से दो उप मुख्यमंत्री बनाए जाने के भी कई उदाहरण हैं। लेकिन आंध्र प्रदेश में नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने अपने मंत्रिमंडल के भीतर ही एक उप मुख्यमंत्री मंडल भी बना डाला है। अपनी 25 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में उन्होंने पांच उप मुख्यमंत्री बनाए हैं। ये पांच उप मुख्यमंत्री पांच अलग-अलग वर्गों- अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछडा वर्ग, अल्पसंख्यक और कापू (किसान) समुदाय से बनाए गए हैं। आजाद भारत के राजनीतिक इतिहास में इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ।

मुस्लिम हितैषी की छवि बनाना चाहते हैं मोदी

भाजपा अब मुस्लिम समर्थन पाने की कोशिश करेगी
अरुण श्रीवास्तव - 2019-06-12 10:12 UTC
हालांकि नरेंद्र मोदी को अभी भी आरोपों से मुक्त होना और देश के दबे-कुचले लोगों से क्लीन चिट मिलना बाकी है, लेकिन उनके समर्थकों और सलाहकारों ने इमेज मेकओवर और रिलेशन बिल्डिंग की कवायद शुरू की है। यह कठिन अभ्यास कुछ टीवी चैनलों द्वारा किया गया है। वे मोदी और मुसलमानों के बीच पुल की भूमिका निभा रहे हैं। मोदी को मुस्लिम समुदाय में ले जाने की प्रक्रिया वास्तव में मोदी द्वारा 2019 के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद तेज हुई है।

कांग्रेस का नेतृत्व संकट

आखिर राहुल गांधी चाहते क्या हैं?
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-06-11 12:08 UTC
राहुल गांधी द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की मंशा जाहिर करने के दो सप्ताह होने को हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने न तो अपना इस्तीफा औपचारिक रूप से दिया है और न ही वे अध्यक्ष पद के अपने दायित्व का निर्वाह कर रहे हैं। इस बीच कांग्रेस में जहां तहां आपसी विवाद बढ़ रहे हैं और उन विवादों को शांत करने वाला कोई नहीं है। राहुल गांधी ने कांग्रेस के नेताओं से मिलना भी लगभग बंद ही कर दिया है। यानी कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में अपनी भूमिका का पूरी तरह से त्याग कर रखा है।