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क्या वाकई भूतिया है राजस्थान विधानसभा

राजस्थान विधानसभा का भूतिया कनैक्शन
योगेश कुमार गोयल - 2019-03-11 10:19 UTC
जिस राजस्थान विधानसभा के भीतर निर्वाचित जनप्रतिनिधि अर्थात् विधायक के रूप में प्रवेश करने के लिए हर पांच साल बाद प्रत्याशियों के बीच जोर आजमाइश होती है, आपको जानकर हैरानी होगी कि उसी विधानसभा को पिछले कई वर्षों से भूतिया माना जाता रहा है। गत वर्ष दिसम्बर माह में नई विधानसभा के गठन के बाद से विधानसभा को अपशकुनी मानने वाले विधायकों को फिर से विधानसभा भवन में भूत का भय सताने लगा है। पिछले साल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले विधानसभा को भूतिया मानने वाले कुछ विधायकों ने तो इस बात पर खासा जोर भी दिया था कि 15वीं विधानसभा के गठन से पहले ही यज्ञ-हवन इत्यादि के जरिये विधानसभा भवन की शुद्धि की जानी चाहिए ताकि सभी 200 विधायक विधानसभा की कार्यवाही में सम्मिलित हो सकें।

आतंक की ‘जमात’ पर सरकारी ताला

अनुचित है इस कदम का विरोध
योगेश कुमार गोयल - 2019-03-08 08:59 UTC
केन्द्र सरकार द्वारा पुलवामा हमले के बाद से ही आतंकवाद पर नकेल कसने के लिए लगातार कड़े कदम उठाए जा रहे है। इसी कड़ी में पहले घाटी में अलगाववादी नेताओं से उनकी सुरक्षा छीनने के बाद अब अलगाववादी संगठन जमात-ए-इस्लामी पर आतंकवाद निरोधक कानून के तहत 5 साल के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। इससे पहले भी दशकों पहले दो बार इस संगठन को प्रतिबंधित किया गया था। पहली बार 1975 में जम्मू कश्मीर सरकार द्वारा इस पर दो साल का प्रतिबंध लगाया गया था और दूसरी बार केन्द्र सरकार द्वारा 1990 में इसे प्रतिबंधित किया गया था, जो दिसम्बर 1993 तक जारी रहा। यह ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ की तरह का ऐसा संगठन है, जिसका प्रमुख उद्देश्य राजनीति में भागीदारी करते हुए राज्य में इस्लामी शासन की स्थापना करना माना जाता है।

मुस्लिम राष्ट्रों की महफिल में खुली भारत के ढोल की पोल

विशेष अतिथि बनाकर भी भारत का किया अपमान
अनिल जैन - 2019-03-07 10:22 UTC
पुलवामा में जैश-ए-मुहम्मद के दहला देने वाले फिदायीन हमले के बाद उम्मीद की जा रही थी कि पाकिस्तान की सरजमीं से संचालित हो रहे आतंकवाद के खिलाफ विश्वव्यापी तीखी प्रतिक्रिया होगी। यह सही है कि अमेरिका और रूस सहित दुनिया के तमाम देशों ने पुलवामा हमले की निंदा की है, लेकिन इसके लिए पाकिस्तान को सीधे तौर पर किसी ने जिम्मेदार नहीं ठहराया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी एक सप्ताह की ऊहापोह के बाद जो निंदा प्रस्ताव पारित किया, उसमें पाकिस्तान का कहीं उल्लेख नहीं हुआ। ज्यादातर मुस्लिम राष्ट्र ही नहीं, बल्कि चीन भी पूरी तरह इस समय पाकिस्तान के साथ हैं।

दिग्विजय सिंह के बयानों से भाजपा को फायदा

मध्यप्रदेश के मंत्रियों के गैरजिम्मेदाराना बयानबाजी भी जारी
एल. एस. हरदेनिया - 2019-03-06 16:18 UTC
भोपालः पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और राज्य के दो कैबिनेट मंत्रियों के विवादास्पद बयान ने भाजपा को कांग्रेस पर एक हमला करने का मौका दिया है।

विश्वविद्यालयों में तेरह प्वाइंट रोस्टर विवाद

हल नियुक्तियों को विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर करना है
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-03-05 10:23 UTC
विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्तियों को लेकर चल रहा विवाद एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है। यदि इस मुद्दे को केन्द्र सरकार ने जल्द हल नहीं किया, तो चुनाव में उसको काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि यह आरक्षण से जुड़ा मसला है और सुप्रीम कोर्ट ने विषयवार आरक्षण के पक्ष में जो फैसला किया है, उससे आरक्षित वर्गो के अभ्यर्थियों को नुकसान हो रहा है। वे सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ बहुत दिनों से आंदोलन कर रहे हैं।

ओआईसी सम्मेलन में भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत

इस्लामी देशों में भारत की बढ़ रही है स्वीकार्यता
योगेश कुमार गोयल - 2019-03-04 08:49 UTC
संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में 1-2 मार्च को इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन ‘आॅर्गनाइजेशन आॅफ इस्लामिक को-आॅपरेशन’ (ओआईसी) को सम्बोधित करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आतंकवाद के मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाते हुए इस्लामिक देशों के इस बड़े मंच के जरिये भी पाकिस्तान का नाम लिए बगैर उसे खूब खरी-खोटी सुनाई, जिससे पाकिस्तान इस्लामिक देशों के संगठन में अलग-थलग पड़ रहा है। ओआईसी 57 देशों का प्रभावशाली समूह है, जो मुख्यतः इस्लाम को मानने वाले देशों को मिलाकर ही बना है और संगठन के 50 वर्षों के इतिहास में यह पहली बार हुआ, जिसके सम्मेलन में भारत पहली बार शामिल हुआ और गेस्ट आॅफ आॅनर के तौर पर सम्बोधित करने के लिए भारतीय विदेश मंत्री को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। सम्मेलन के 50 वर्षों के इतिहास में यह भी पहली बार हुआ, जब भारत की मौजूदगी से बौखलाये पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने इसमें हिस्सा नहीं लिया।

सरकार पोषित संघ के संगठनों का भविष्य नहीं

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिए स्पष्ट संदेश
एल एस हरदेनिया - 2019-03-02 11:34 UTC
भोपालः मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसी सभी संस्थाओं को ध्वस्त करने के लिए दृढ- संकल्प़ हैं, जिन्हें पिछली भाजपा सरकार ने अपने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए स्थापित किया था। उन्होंने प्रमंडलों और जिलों के प्रशासनिक प्रमुखों को अपना रवैया बदलने और राज्य में 15 साल के भाजपा शासन के दौरान काम करने के तरीके को छोड़ने का एक स्पष्ट संदेश दिया।

हर मोर्चे पर हो पाकिस्तान का बहिष्कार

विश्व कप में पाकिस्तान के साथ क्यों खेले भारत?
योगेश कुमार गोयल - 2019-03-01 11:23 UTC
पाकिस्तान द्वारा पुलवामा में दहशत का खूनी खेल खेलने के बाद से ही समूचे भारत में उसके साथ हर मोर्चे पर संबंध तोड़ लिए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। फिर वो संबंध राजनयिक हों या आर्थिक अथवा खेल संबंधी। बालाकोट में भारत द्वारा की गई एयर स्ट्राइक और उसके बाद पाकिस्तान के दस एफ-16 विमानों द्वारा भारतीय सीमा में भारत में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की असफल कोशिश के बाद इस प्रकार की मांग और भी तेज हो गई है। हालांकि यह पूरी तरह स्पष्ट है कि पाकिस्तान इस वक्त जो भी हरकतें कर रहा है, वह भारत द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक और पूरी दुनिया में राजनयिक स्तर पर अलग-थलग पड़ जाने की उसकी खीझ ही है और ऐसे में सीमा पर बड़े स्तर पर सीजफायर के उल्लंघन सहित पाकिस्तान की बढ़ रही नापाक हरकतों के चलते 16 जून को मैनचेस्टर में विश्व कप में भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले मैच का बाॅयकाट करने की मांग और तेज हो गई है।

किसी खास विचारधारा के लिए नहीं होता इतिहास

इतिहास में तथ्य, साक्ष्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण महत्वपूर्ण
राजु कुमार - 2019-03-01 11:19 UTC
इतिहास एवं इतिहासकारों के लिए प्रतिष्ठित भारतीय इतिहास कांग्रेस का आयोजन लंबे अरसे के बाद भोपाल में किया गया। तीन दिन तक चले 79वें भारतीय इतिहास कांग्रेस में देश के प्रतिष्ठित इतिहासकारों सहित लगभग एक हजार लोगों ने हिस्सा लिया। यह आयोजन कई मायने में महत्वपूर्ण रहा। पिछले साल 28 से 30 दिसंबर को सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले 79वें भारतीय इतिहास कांग्रेस को पुणे विश्वविद्यालय ने अंतिम समय में मेजबानी करने से इनकार कर दिया था। पुणे विश्वविद्यालय के इनकार के बाद बरकतउल्ला विश्वविद्यालय ने इसकी मेजबानी स्वीकारी थी। पुणे विश्वविद्यालय ने यह कहते हुए इनकार किया था कि उसके पास फंड की कमी है और इतने प्रतिभागियों को ठहराने का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। अंतिम समय पर इस तरह के इनकार को इतिहासकारों ने राजनीतिक दबाव में लिया गया निर्णय बताया था। वरिष्ठ इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने कहा था कि इस आयोजन से इनकार के पीछे मेजबानों ने कानून-व्यवस्था को एक बड़ा कारण बताया था। पुणे के इनकार के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने इस आयोजन के लिए सहमति दी और भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय ने मेजबानी स्वीकार की।

उत्तर प्रदेश में माया की जिद से भाजपा को फायदा

अखिलेश यादव को हो सकता है भारी नुकसान
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-03-01 11:15 UTC
आगामी लोकसभा चुनाव के बाद दिल्ली का ताज किसे मिलेगा, इसका फैसला मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे तय करेंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी को संसद के नीचले सदन में स्पष्ट बहुमत इसीलिए मिल पाया था, क्योंकि उत्तर प्रदेश की 80 में से 71 सीटों पर मोदी की पार्टी ने जीत हासिल कर ली थी। अगले चुनाव के बाद मोदी की सरकार बनेगी या नहीं, इसका फैसला एक बार फिर उत्तर प्रदेश ही करेगा।