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आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था पूना पैक्ट का परिणाम

गांधी ने लगवाई थी आरक्षण पर राष्ट्रीय आंदोलन की मुहर
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-09-25 13:42 UTC
पिछले 24 सितंबर को पूना पैक्ट दिवस था। इसी तारीख को 1932 में मदन मोहन मालवीय और डाॅक्टर भीमराव आम्बेडकर के बीच एक समझौता हुआ था, जिसे भारतीय इतिहास में पूना पैक्ट भी कहा जाता है, क्योंकि यह पूना में हुआ था। उस समय महात्मा गांधी पूना के जेल में कैद थे और यह समझौता उन्होंने ही करवाया था। इस समझौते के कारण गोवर्नमेंट आॅफ इंडिया एक्ट में दलितों के लिए विधायिका में आरक्षण पर सहमति बनी थी।

पीएमओ सूचनाओं का जंगल है और वहां के नियम भी जंगली हैं

तेजी के चक्कर में काम की गुणवत्ता ही मारी जाती है
के रवीन्द्रन - 2018-09-24 11:36 UTC
भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने पीएमओ को एक रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें प्रमुख बैंकों के डिफॉल्टरों का विवरण दिया गया था, लेकिन लगता है कि इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। रिपोर्ट के संबंध में दो संभावित परिदृश्य हैं। रिपोर्ट के बारे में मोदी ने फैसला किया होगा कि सूची में ऐसे नाम शामिल हैं जो उन्हें बहुत शर्मिंदगी दे सकते हैं, तो उन्होंने उसे दबा दिया। दूसरा परिदृश्य यह हो सकता है कि रिपोर्ट उनकी मेज पर पहुंची ही नहीं।

क्यों चंद्रशेखर रावण से भयभीत हैं मायावती

उनकी शैली बीएसपी नेता से पूरी तरह अलग है
प्रदीप कपूर - 2018-09-22 11:06 UTC
लखनऊः बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती भीम आर्मी के चंद्रशेखर रावण से डरती क्यों हैं? रावण को हाल ही में योगी सरकार ने रिहा किया है।

लाभ से जुड़े सरकारी अध्यादेश

क्या बदल पायेंगे परिवेश?
डाॅ. भरत मिश्र प्राची - 2018-09-21 12:19 UTC
जैसे -जैसे देश में आम चुनाव का समय नजदीक आता जा रहा है, राजनीतिक सरगर्मिया तेज हो चली है। सत्ता पक्ष अपनी सत्ता को बरकरार रखने के लिये अपने तरीके से प्रयासरत है तो विपक्ष सत्ता तक पहुंचने की तैयारी में बेमेल संगम के बीच जनमानस को अपनी ओर आकर्षित करने में जी तोड़ प्रयास में सक्रिय नजर आ रहा है। इस समय राजनेताओं को देवी - देवताओं के दरवाजें भी नजर आने लगे है जहां वे माथा टेककर सत्ता तक पहुंचने का प्रयास कर रहे है। सत्ता तक पहुंचने के क्रम में आम जनमत को अपनी ओर आकर्षित करने की दिशा में नई - नई घोषणाओं के दौर के साथ अपने मतलब के लिये लाभ से जुड़े सरकारी अध्यादेश के बदलते तेवर भी देखे जा सकते है। इस दिशा में कहीं सुप्रीम कोर्ट की पहल सकरात्मक हो जाती है तो कहीे नकरात्मक नजर आने लगती है।

उत्तर प्रदेश की राजनैतिक हलचल

महागठबंधन की राह आसान नहीं
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-09-19 12:25 UTC
भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर करने के लिए जिस महागठबंधन पर भरोसा किया जा रहा है, उसका उत्तर प्रदेश में सफल होना बेहद जरूरी है। इसका कारण यह है कि उत्तर प्रदेश लोकसभा में 80 सांसद भेजता है और 2014 के चुनाव में इसने भाजपा के 71 और उसके सहयोगी अपना दल के 2 सांसदों को संसद में चुनकर भेजा था। उत्तर प्रदेश के इतिहास में भारतीय जनता पार्टी को उतनी बड़ी जीत पहले कभी मिली ही नहीं थी। जब वहां राम मंदिर आंदोलन के कारण सांप्रदायिक माहौल अत्यंत ही तनावपूर्ण था और प्रदेश की राजनीति पर कल्याण सिंह की तूती बोलती थी, तब भी संयुक्त उत्तर प्रदेश की 85 सीटों में से ज्यादा से ज्यादा 58 सीटों पर भी भाजपा की जीत हुई थी।

सवालों के घेरे में आधार

जानकारियां सुरक्षित होने के दावे कितने खरे?
योगेश कुमार गोयल - 2018-09-18 12:37 UTC
आधार कार्ड के डाटाबेस की सुरक्षा में सेंध को लेकर आए दिन नए-नए दावे सामने आ रहे हैं और विड़म्बना यह है कि आधार प्राधिकरण इस तरह के दावों को खारिज करने से ज्यादा कुछ नहीं कर पा रहा है। अब हाफिंगटन पोस्ट की तीन माह की पड़ताल के बाद एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आधार का साॅफ्टवेयर हैक किया जा चुका है तथा भारत के लगभग एक अरब लोगों की निजी जानकारियां दांव पर हैं।

मध्यप्रदेश में राहुल प्रभाव

बदलाव के लिए मध्यप्रदेश कांग्रेस सड़क पर
राजु कुमार - 2018-09-18 12:33 UTC
मध्यप्रदेश में पिछले 15 साल से सत्ता से बाहर कांग्रेस ने इस बार "करो या मरो" की रणनीति पर अमल करना शुरू कर दिया। लगातार सुस्त रहने वाली कांग्रेस पार्टी पिछले कुछ महीने से चुस्ती दिखा रही है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने भोपाल में एक मेगा शो का आयोजन किया। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भोपाल में कांग्रेस संकल्प यात्रा और कार्यकर्ता संवाद में शामिल होकर औपचारिक चुनावी बिगुल फूंक दिया। हर बैनर पोस्टर पर ‘वक्त है बदलाव का’ स्लोगन के साथ कांग्रेस की यह कोशिश रही है कि लगातार गुटबाजी में उलझी पार्टी इससे उबर कर प्रदेश की सत्ता का परिवर्तन कर दे।

लोकसभा अध्यक्ष के अटपटे बोल

अहंकार सातवें आसमान पर
अनिल जैन - 2018-09-17 12:52 UTC
पिछले लंबे समय से सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ताओं की ओर से ही नहीं बल्कि केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों की ओर से भी उटपंटाग बयानबाजी करने का बेलगाम सिलसिला बना हुआ है। सत्ता के मद में चूर होकर दिए जा रहे इस तरह के बयान न सिर्फ अनैतिक है बल्कि संवैधानिक मर्यादा का भी उल्लंघन करते हैं। इस तरह की बयानबाजी के सिलसिले में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन भी अपवाद नहीं हैं। उनके बयानों से कई बार तो ऐसा लगता है मानो वे खुद ही अपने को पार्टी का आम कार्यकर्ता दिखाने के लिए प्रयासपूर्वक ऐसे बयान देती हैं, जिनकी राजनीतिक परिपक्वता से अस्पृश्यता बनी रहे।

माल्या को देश से किसने भगाया?

सेंट्रल हाॅल की सीसीटीवी फुटेज में इसका सबूत हो सकता है?
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-09-15 11:41 UTC
बैंकों के 9 हजार करोड़ रुपये लेकर विदेश भागने वाले विजय माल्या पर चर्चा जोरो पर है। ताजा चर्चा का कारण इंग्लैंड की एक अदालत में चला वह मुकदमा है, जिसे यह फैसला करना है कि माल्या को भारत वापस भेजा जाय या नहीं। उस अदालत में अपने बचाव में माल्या ने हर संभव प्रयास किया। अदालत से बाहर भी वह अपना बचाव करता रहा और कहा कि वह बैंकों का सारा रुपया वापस करने के लिए तैयार था और इसके लिए उसने एक प्रस्ताव भी तैयार किया था। उस प्रस्ताव को लेकर वह वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिला भी था, लेकिन जेटली ने उसके प्रस्ताव पर विचार नहीं किया और फिर उसने उसी समय उन्हें कह दिया कि वे अब भारत छोड़कर इंग्लैंड जा रहे हैं।

कानूनी उत्पीड़न के विरोध में सवर्ण समुदाय

महंगी पड़ेगी मोदी सरकार को सवर्णों की नाराजगी
योगेश कुमार गोयल - 2018-09-14 13:08 UTC
केन्द्र सरकार द्वारा पिछले दिनों मानसून सत्र के दौरान एससी/एसटी एक्ट को लेकर मार्च माह के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) संशोधन विधेयक 2018 संसद में पारित करा दिया गया था, जिसे लेकर गुस्से का इजहार करने के लिए सवर्ण वर्ग द्वारा गत दिनों भारत बंद का आयोजन किया गया, जिसका देश के कई राज्यों में व्यापक असर भी देखा गया।