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एम जे अकबर का विलंबित इस्तीफा

क्या मध्यप्रदेश की राजनैतिक विवशता ने रंग दिखाया?
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-10-18 11:06 UTC
आखिरकार एमजे अकबर ने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे ही दिया। उस इस्तीफे के बाद भारत का सभ्य समाज राहत की सांस ले रहा है। हो रहे विलंब के बाद यह लगने लगा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अकबर को निकालने के लिए पड़ रहा जन दबाव काम नहीं कर रहा है और उन्हें सरकार से बाहर का रास्ता दिखाने में मोदी की कोई दिलचस्पी नहीं है। ऐसा लगना स्वाभाविक था क्योंकि मोदी की सरकार से अब तक किसी को भी मंत्रिमंडल से विपक्ष की मांग पर बाहर नहीं किया गया था।
दास्तान- ए- अकबर

आखिर मोदी अकबर को अपनी मंत्रिपरिषद से क्यों नहीं हटा रहे हैं?

उपेन्द्र प्रसाद - 2018-10-17 10:07 UTC
एम जे अकबर के खिलाफ यौन हिंसा का आरोप अब तक एक दर्जन से ज्यादा महिला पत्रकार लगा चुकी हैं। उनमें से एक तो विदेशी भी हैं। आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार अलग अलग काल खंड में अकबर के साथ जुड़ी थीं। उनमें से कुछ 1980, तो कुछ 1990 के दशक में उनसे संपर्क में आई थीं, तो कुछ 21वीं सदी के पहले और दूसरे दशक में। यानी करीब 30 वर्षों के काल खंड की अलग अलग घटनाएं हैं। कुछ समय के अंतराल में ही इतनी सारी महिलाओं ने उन पर यौन हिंसा का आरोप लगाया। दुनिया में शायद ही ऐसा कोई पत्रकार या संपादक होगा, जिनके खिलाफ इतनी सारी महिलाओं ने लगभग एक किस्म के आरोप लगाए।

उत्तराखंड में विकास की संभावनाएं

जरूरत है उनके दोहन की
डाॅ. भरत मिश्र प्राची - 2018-10-17 05:45 UTC
देश के पहाड़ी एवं घने जंगलों से आच्छादित राज्य उत्तराखंड में विकास की बहुत बड़ी संभावनाएं है। यह प्रदेश प्राकृृतिक रूप से हर तरह से सम्पन्न है जहां के पहाडों की तलहटी एवं घने जंगलों में तरह - तरह की जड़ी - बुटियां विद्यमान है, जिनसे दवाई की आयुर्वेदिक कम्पनियां स्थापित की जा सकती है। जिसकी आज जरूरत पूरे देश को है। इस दिशा में इस प्रदेश में तेजी से कार्य कर बेरोजगार युवकों को पलायन से रोका जा सकता है। आज जब अंग्रेजी दवाई के कुप्रभाव से देश के सर्वाधिक लोग परेशान है, ऐसे हालत में उŸाराखंड प्रदेश में विकसित की गई आयर्वेदिक दवाई की कंपनियां ज्यादा कारगा साबित हो सकती है। प्रदेश की सरकार एवं वहां के सामाजिक, राजनीतिक स्तर पर कार्यरत लोगों को इस दिशा में सकरात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

गंगा की खातिर एक जान और कुरबान

अनशनरत गुरूदास अग्रवाल उर्फ स्वामी सानंद ने दे दी अपनी जान
अनिल जैन - 2018-10-15 13:33 UTC
गंगा की सफाई को लेकर केंद्र सरकार की वादाखिलाफी, अकर्मण्यता और जुमलेबाजी ने एक और पर्यावरणविद संत की बलि ले ली। नगाधिराज हिमालय की बेटी मानी जाने वाली, देश के करोडों करोड लोगों की आस्था की प्रतीक और दुनियाभर के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने वाली गंगा की अविरलता बहाल कराने को अपने जीवन का मिशन बना लेने वाले जाने-माने पर्यावरणविद और वैज्ञानिक प्रो. गुरूदास (जीडी) अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ने अनशनरत रहते हुए अपनी जान दे दी। मंगलवार को हालत बिगडने पर उन्हें ऋषिकेश के एम्स ले जाया गया था और बुधवार को वहां दिल्ली लाते वक्त बीच रास्ते में ही उनके जीवन का अंत हो गया। गंगा को अविरल बहता देखने का उनका सपना पूरा नहीं हो सका लेकिन गंगा की सफाई के नाम पर भ्रष्टाचार की गंगा अविरल बह रही है। वह कब तक बहती रहती रहेगी, कोई नहीं बता सकता।

क्रिकेट की दुनिया में नया इतिहास बनाएगा पृथ्वी

मिल गया एक नया सचिन
योगेश कुमार गोयल - 2018-10-13 12:54 UTC
4 अक्तूबर को वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने पहले ही टेस्ट मैच में शतक बनाकर पृथ्वी शाॅ ने जो इतिहास रचा, उसके बाद उन्हें ‘पृथ्वी मिसाइल’ कहा जाने लगा है और उनकी तुलना क्रिकेट के भगवान माने जाने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर से भी की जाने लगी है। दरअसल 19 वर्ष से भी कम आयु के किसी खिलाड़ी के लिए अपने टेस्ट की शुरूआत किसी भी मैदान पर किसी विदेशी टीम के साथ करना और उसमें बेमिसाल शतकीय पारी खेलना आसान नहीं होता जबकि पृथ्वी ने 134 रनों की अपनी धुआंधार पारी से वेस्टइंडीज के छक्के छुड़ाकर साबित कर दिखाया कि उन्हें पिछले साल से ही ‘भविष्य का सचिन’ क्यों कहा जा रहा है।

लालू के बेटों में घमसान

क्या बेटी मीसा भारती भी हाथ आजमाएंगी?
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-10-12 11:47 UTC
जब मीसा भारती ने एक सभा को संबोधित करते हुए यह कहा था कि लड़ाई तो उनके परिवार में भी भाइयों के बीच है और राष्ट्रीय जनता दल का परिवार तो बहुत बड़ा है और उसमे भी आंतरिक लड़ाई स्वाभाविक है, तब यह स्पष्ट हो गया था कि लालू यादव के दोनों बेटों- तेज प्रताप और तेजस्वी- के बीच का संतुलन बिगड़ गया है और परिवार के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। उसके पहले भी तेज प्रताप समय समय पर अपना असंतोष जताते रहते थे। कभी वे पार्टी के नेतृत्व पर हमला करते थे, तो कभी राजनीति छोड़ने की बात करते थे। कभी वे दोनों भाइयों के बीच निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा मतभेद पैदा करने की बात करते थे। हालांकि जब दोनों भाइयों के बीच तकरार की खबर आती थी तो फिर उस पर सफाई भी दी जाती थी और कहा जाता था कि सबकुछ ठीक ठाक है और विरोधी तकरार की गलत खबरें उड़ा रहे हैं।

पांच राज्यों के चुनाव घोषणा के साथ राजनीतिक सरगर्मियां तेज

भाजपा के सामने कठिन चुनौतियां
डाॅ. भरत मिश्र प्राची - 2018-10-11 12:15 UTC
चुनाव आयोग द्वारा राजस्थान, मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़, मिजोरम एवं तेलंगाना पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों की सरगर्मियां तेज हो गई । इन पांच राज्यों में तीन राज्य राजस्थान, मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़, में भाजपा शासित सरकार है, जिसकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। मिजोरम में कांग्रेस की सरकार है तो तेलंगाना में क्षेत्रीय दल टी आर एस की सरकार रही है। वहां केन्द्र की भाजपा सरकार से अलग होते ही तेलंगाना में विधानसभा समय से पूर्व ही भंग हो गई जहां चुनाव होने जा रहे है।

क्या जल, जंगल, जमीन के मुद्दे पर पड़ेंगे वोट

चुनावी राज्यों में किसानों व आदिवासियों की लामबंदी
राजु कुमार - 2018-10-11 12:09 UTC
चुनावी समर में विकास की बात करते-करते अक्सर मतदान नजदीक आते ही बेवजह के मुद्दे चुनाव पर हावी हो जाते हैं। जातिवाद, क्षेत्रवाद, धर्म, व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ अब एक-दूसरे को नीचा दिखाने के प्रयास भी ज्यादा होने लगे हैं। ऐसे में लगातार परेशानियों का सामना कर रही जनता की आवाज चुनावी समर में दबने लगती है।

देश के मौजूदा हालात

जेपी-लोहिया की याद
अनिल जैन - 2018-10-10 12:02 UTC
जयप्रकाश नारायण (जेपी) और डॉ. राममनोहर लोहिया। 1942 के भारत छोडो आंदोलन के दो अप्रतिम नायक और आजादी के बाद भारतीय समाजवादी आंदोलन के महानायक। लोहिया ने अपने विशिष्ट चिंतन से समाजवादी आंदोलन के भारतीय स्वरूप को गढा और हर किस्म के सामाजिक-राजनीतिक अन्याय के खिलाफ अलख जगाया, तो राजनीति से मोहभंग के शिकार होकर सर्वोदयी हो चुके जेपी ने वक्त की पुकार सुनकर राजनीति में वापसी करते हुए भ्रष्टाचार और तानाशाही के खिलाफ देशव्यापी संघर्ष को नेतृत्व प्रदान कर लोकतंत्र को बहाल कराया। आज देश के हालात जेपी और लोहिया के समय से भी ज्यादा विकट और चुनौतीपूर्ण हैं लेकिन हमारे बीच न तो जेपी और लोहिया हैं और न ही उनके जैसा कोई प्रेरक व्यक्तित्व।

रक्षा क्षेत्र में भारत-रूस की बढ़ती साझेदारी

वायुसेना को बेमिसाल ताकत प्रदान करेगी एस-400
योगेश कुमार गोयल - 2018-10-09 12:32 UTC
रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जाएगी। दरअसल यह यात्रा ऐसे वक्त पर हुई, जब भारत-रूस की दशकों पुरानी मित्रता पर चुनौतियों के बादल मंडरा रहे थे। भारत-रूस की इस शिखर बैठक के दौरान जहां करीब 5 अरब डाॅलर का एस-400 एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल रक्षा प्रणाली का सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण करार हुआ, वहीं अमेरिका की प्रतिबंधों की धमकियों को दरकिनार कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका को भी सख्त संदेश दे दिया कि भारत अपनी सामरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए ऐसी धमकियों की परवाह नहीं करेगा। निश्चित रूप से प्रधानमंत्री के इस रूख से अमेरिका की दादागिरी को झटका लगा है और आने वाले समय में विश्व पटल पर भारत की दमदार छवि उभरकर सामने आएगी।