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दिल्ली में सरकारी सेवाओं की होम डेलिवरी

भ्रष्टाचार पर अबतक का सबसे बड़ा हमला
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-09-01 10:06 UTC
दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए सरकारी सेवाओं की होम डेलिवरी करने का फैसला किया है। इसके तहत अब दिल्लीवासियों को सरकारी सेवा लेने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते रहना तो दूर, उन्हें वहां जाना भी जरूरी नहीं होगा। बस 1072 नंबर के फोन को डायल करना होगा और काॅल सेंटर में फोन उठाने वाले कर्मी को यह बताना होगा कि उसे कौन सी सरकारी सेवा चाहिए। उसे सिर्फ यह बताना होगा कि उसे राशन कार्ड बनवाना है या जाति प्रमाण पत्र या आय प्रमाण पत्र।

यूपी में बिखर गया मुलायम का परिवारवाद

लोहिया के समाजवाद को डूबोता परिवारवाद
प्रभुनाथ शुक्ल - 2018-08-31 10:47 UTC
लोहिया के समाजवाद को मुलायम सिंह यादव संजो नहीं पाए। दो साल पूर्व सत्ता को लेकर परिवारवाद की जंग की वजह से सुलगता बारुद आखिर फट पड़ा और समाजवादी पार्टी शिवपाल सिंह यादव के बगावती तेवर के बाद दो फाड़ हो गयी। हलांकि जिस तरह पार्टी पर अधिकारवाद को लेकर लड़ाई चल रही थी उससे यह तस्वीर साफ थी कि विभाजन तो तय हैं। मुलायम सिंह यादव ताल ठोंक कर खदु को लोहिया के समाजवाद का असली उत्तराधिकारी मानते थे, लेकिन परिवारवाद की जंग में वह इस तरह झुलसे की खुद के अस्तित्व को नहीं बचा पाए।

बाढ़, तबाही और सबक

मानसून की दगाबाजी या पर्यावरण असंतुलन का दुष्परिणाम?
योगेश कुमार गोयल - 2018-08-30 09:57 UTC
बीते 28 अगस्त की सुबह दिल्ली में हुई चंद घंटों की बारिश ने ही दिल्ली में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए। जगह-जगह सड़कें दरिया बन गई और घरों, दुकानों इत्यादि तक में इस कदर पानी भर गया कि हर तरफ बड़े-बड़े तालाबों जैसा नजारा दिखाई देने लगा। इन दृश्यों को देखकर हर किसी को यही डर सताने लगा कि अगर चंद घंटों की बारिश में ही दिल्ली का यह हाल हो सकता है तो अगर देश के कुछ अन्य राज्यों की भांति यहां भी तीन-चार दिन तक लगातार ऐसी ही बारिश हो जाए तो शायद दिल्ली भी बाढ़ की चपेट में आ जाए। भारी बारिश के कारण इस समय पहले से ही पहाड़ों से लेकर मैदानों तक केरल, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, तमिलनाडु, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, असम, नागालैंड, अरूणाचल प्रदेश इत्यादि देश के कई राज्य बाढ़ की भयानक विभीषिका से जूझ रहे हैं, जहां जान-माल की भारी क्षति के साथ-साथ जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

बेरोजगारी की ज्वलंत समस्या से जूझ रहा है उत्तराखंड

रोजगार पैदा करने की संभावनाओं का दोहन नहीं किया जा रहा है
डाॅ. भरत मिश्र प्राची - 2018-08-29 11:32 UTC
प्राकृृतिक अपार सम्पदा व सौंदर्य से अच्छादित देवों, ऋषियों, एव महर्षियों की तपोस्थली उत्तराखंड बेरोजगारी की ज्वलंत समस्या से आज जूझ रहा है। एक आकड़े के मुताबिक 9 लाख बेरोजगार रोजगार के लिये सड़क पर भटक रहे है। देहरादून रोजगार कार्यालय के आकड़े ये बता रहे है कि उत्तराखंड में बेरोजगारी के मामलें में महिलाओं की संख्या पुरूषों की संख्या से कहीं ज्यादा है। समय - समय पर उत्तराखंड में आई प्राकृृतिक आपदा ने बेरोजगारी को और ज्यादा बढ़ा दिया है जिससे यहां पलायन की स्थिति बनती जा रही है। समय - समय पर यहां की सरकारें भी बदलती रही पर आज तक इस दिशा में कोई ठोस उपाय नहीं हो पाये है।
बिहार राजनीति

कुशवाहा के पास भाजपा से बेहतर विकल्प नहीं

उपेन्द्र प्रसाद - 2018-08-28 11:40 UTC
बिहार में राजनैतिक गठजोड़ आने वाले दिनों मे कौन सा रूप लेगा, इसके बारे में तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। राजनैतिक पर्यवेक्षक राजनेतओं के बयाने मे उस गठजोड़ की झलक देखना चाहते हैं और अपने अपने तरीके से उनका विश्लेषण करते हैं। इस समय उपेन्द्र कुशवाहा की राजनीति को लेकर तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। वैसे बहुत पहले से यह चर्चा चल रही है कि वे भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़कर राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो सकते हैं। राजद भी यही चाहता है कि कुशवाहा उनके नेतृत्व वाले कथित महागठबंधन में शामिल हो जाए। वैसे वह तथाकथित महागठबंधन तीन पार्टियों का गठबंधन है, जिसमें राजद ही बड़े जनाधार वाला एक दल है। कांग्रेस के पास बिहार में अब अपना कोई जनाधार नहीं है। जीतन राम मांझी का कथित महादलित आधार पूरी आबादी का एक फीसदी भी नहीं होगा।

केजरीवाल का बिखरता कुनबा

संकटों के भंवर में ‘आप’
योगेश कुमार गोयल - 2018-08-27 09:27 UTC
भाजपा विरोधी गठबंधन में घुसपैठ के लिए प्रयासरत दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अब खुलकर कांग्रेस की मुखालाफत में उतर आए हैं और स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी भाजपा विरोधी इस महागठबंधन का हिस्सा नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मात्र 9 प्रतिशत वोट मिलेंगे और असली मुकाबला भाजपा तथा ‘आप’ के बीच ही होगा। भले ही मुख्यमंत्री इस प्रकार के बयान देकर अपने समर्थकों को यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी पार्टी कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने नहीं जा रही है क्योंकि कांग्रेस के साथ दिखने का माहौल ‘आप’ की सेहत पर भारी पड़ रहा है।

अखिलेश यादव का सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड

क्या समाजवादी पार्टी अपने इरादे में सफल हो पाएगी?
प्रदीप कपूर - 2018-08-25 11:19 UTC
लखनऊः ऐसे समय में जब लोकसभा चुनाव बहुत दूर नहीं हैं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने नरम-हिंदुत्व आंदोलन के साथ अपने विरोधियों को आश्चर्यचकित कर दिया।

रक्षाबंधन महज कलाई पर एक धागा बांधने की रस्म नहीं

स्नेह की डोर में बंधा प्यारा रिश्ता
योगेश कुमार गोयल - 2018-08-24 11:44 UTC
श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले रक्षाबंधन पर्व की भारतीय समाज और संस्कृति में कितनी महत्ता है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि बहनों के हाथ अपने भाईयों की कलाईयों पर राखियां बांधने के लिए मचल उठते हैं और कलाई पर बांधे जाने वाले मामूली से दिखने पड़ने वाले इन्हीं कच्चे धागों से पक्के रिश्ते बनते हैं। पवित्रता तथा स्नेह का सूचक यह पर्व भाई-बहन को पवित्र स्नेह के बंधन में बांधने का पवित्र एवं यादगार दिवस है। इस पर्व को भारत के कई हिस्सों में श्रावणी के नाम से जाना जाता है। पश्चिम बंगाल में ‘गुरू महापूर्णिमा’, दक्षिण भारत में ‘नारियल पूर्णिमा’ तथा नेपाल में इसे ‘जनेऊ पूर्णिमा’ के नाम से जाना जाता है।

लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव की प्रासंगिकता

इसका कोई औचित्य नहीं
डाॅ. भरत मिश्र प्राची - 2018-08-23 11:24 UTC
देश के बदलते राजनीतिक हालात में जहां देशभर में राजनीतिक छोटे दलों की बहुतायत है, जहां आज भी आया राम गया राम की राजनीतिक प्रक्रिया हावी है, जिससे राजनीतिक अस्थिरता बने रहने की संभावनाएं सदैव बनी रहती है, लोकसभा के साथ विधान सभा के चुनाव कराने का कोई औचित्य ही नहीं बनता। इस तथ्य को प्रायः सभी जानते है। देश में आज आम चुनाव कराना कितना कठिन हो गया जहां विधानसभा के चुनावों में प्रशासनिक व्यवस्था के चलते पूरे माह का समय लग जाता है। इस तरह के हालात भी देशभर में लोकसभा एवं विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने के सकरात्मक परिवेश नहीं उभार सकते फिर सत्ता पक्ष की ओर से एक देश एक चुनाव के तहत लोकसभा के साथ विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने की प्रांसगिकता बनाने के प्रयास बार - बार किये जा रहे है। जहां सत्ता पक्ष के प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा के राष्टीªय अध्यक्ष अमीत शाह ने विधि आयोग को चुनाव खर्च कम करने के हवाला देते हुए लोकसभा के साथ 14 राज्यों के विधानसभा चुनाव करने हेतु पत्र लिखा है ।

अटल की मौत और उसके बाद

किसी की कथित महानता को समाज पर थोपा नहीं जा सकता
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-08-21 12:12 UTC
अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद उनकी महानता केे चर्चे स्वाभाविक हैं। राजनीतिज्ञों की छवि आमतौर पर खराब होती है, लेकिन अटलजी इसके अपवाद थे। उनकी छवि एक अच्छे राजनीतिज्ञ की थी और उनके विरोधी भी उनपर निजी हमला करने से बचा करते थे, हालांकि बलराज मधोक और सुब्रह्मण्यन स्वामी जैसे अपवाद भी थे, जो उनके बारे में खराब राय रखते थे और सार्वजनिक रूप से उसका उल्लेख भी किया करते थे। लेकिन कुछ अपवादों को छोड़ दें, तो अटल बिहारी वाजपेयी शायद ऐसे नेता थे, जिन्हें अपने विरोधियों के बीच भी सम्मान मिलता था और वे एक ऐसे नेता रहे हैं, जिनकी सबसे कम आलोचना राजनेता वर्ग में हुई है।