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गुजरात में उत्तर भारतीयों पर हमले

मोदी की सत्ता वापसी की राह में एक नई मुसीबत
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-10-08 13:12 UTC
आगामी 5 राज्यों में विधानसभा चुनावों की तारीखें घाषित हो चुकी हैं। इनमें से तीन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं और उन्हें बनाए रखने के लिए पार्टी के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हैं। राजस्थान का हाथ से निकलना तो तय है और यदि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का वर्तमान राजनैतिक माहोल बदलने में नरेन्द्र मोदी कामयाब नहीं हो पाए, तो इन दोनों राज्यों की सत्ता भी भाजपा के हाथों से फिसल जाएगी।

पुलिस की गोली से विवेक तिवारी की मौत

मीडिया ने एक बार फिर भंग की अपनी मर्यादा
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-10-06 10:51 UTC
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आधी रात को एक पुलिस जवान की गोली से निजी कंपनी के एक मैनेजर की मौत हो गई। एक ऐसे व्यक्ति की हत्या, जिसका कोई आपराधिक रिकाॅर्ड न हो और जो पुलिस के साथ मुठभेड़ भी नहीं कर रहा हो, निश्चय ही दुखदायी है। अपना ट्रिगर दबाते समय पुलिस के जवान या अधिकारी को निश्चय ही इसका ध्यान रखना चाहिए कि क्या उसका ट्रिगर दबाना वाकई आवश्यक है। लेकिन प्रशांत चैधरी नामक उस पुलिस जवान ने तैश में आकर गोली चला दी। गोली चलाना आवश्यक था या नहीं, इसका फैसला तो अब अदालत में ही होगा, लेकिन मीडिया जिस तरह से उस पुलिस जवान को अपराधी साबित करने में जुटी हुई है, वह निश्चय ही निंदनीय है।

नई पार्टियों और मोर्चे के कारण मध्यप्रदेश का चुनावी परिदृश्य बना जटिल

कहना कठिन है कि कौन किसका नुकसान करेगा
एल एस हरदेनिया - 2018-10-05 12:34 UTC
भोपालः विधानसभा चुनाव की तारीख करीब आ रही है, इसलिए चुनावी परिदृश्य और जटिल हो गया है। एक महीने पहले यह सोचा गया था कि चुनावी लड़ाई भाजपा व कांग्रेस, बीएसपी और एसपी के गठबंधन के बीच लड़ी जाएगी। इस तरह के एकजुट मोर्चे की उम्मीदों को बीएसपी नेता मायावती के छत्तीसगढ़ के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अजीत जोगी के साथ हाथ मिलाने के निर्णय ने धराशायी कर दिया। चूंकि जोगी ने कांग्रेस विरोधी मोर्चा बना रखा है, इसलिए मध्यप्रदेश में कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने की बसपा की संभावना गायब हो गई थी। ऐसा तो हो नहीं सकता कि छत्तीसगढ़ में बसपा कांग्रेस की आलोचना करते चुनाव लड़े और मध्यप्रदेश में उसकी प्रशंसा करे। गौरतलब हो कि दोनों राज्यों के चुनाव एक ही समय और एक ही साथ होने हैं।

क्या मायावती बिगाड़ेगी यूपी का खेल?

अखिलेश की राजनैतिक अपरिपक्वता भाजपा की सबसे बड़ी पूंजी
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-10-04 11:36 UTC
बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने यह घोषणा करके विपक्षी गठबंधन के पैरवीाकारों को एक बड़ा झटका दिया है कि वह कांग्रेस से कोई चुनावी समझौता नहीं करेगी। दरअसल मायावती तीन हिन्दी राज्यों में होने वाले आगामी चुनावों में कांग्रेस से गठबंधन करना चाहती थीं। लेकिन गठबंधन वह अपनी शर्तों पर करना चाहती थीं। इन राज्यों मे जितनी उनकी ताकत है, उससे ज्यादा सीटें वे गठबंधन के तहत पाना चाहती थीं। पर कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं थीं। अव्वल तो वह राजस्थान में किसी भी पार्टी से चुनावपूर्व गठबंधन चाहती ही नहीं थी, क्योंकि उसे पूरा भरोसा है कि बिना किसी गठबंधन के वह अपनी सरकार बना लेगी।

अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को सुषमा की खरी-खरी

पाकिस्तान को उसी की भाषा में सबक सिखाया जाए
योगेश कुमार गोयल - 2018-10-03 13:20 UTC
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने गत दिनों संयुक्त राष्ट्र महासभा के 73वें सत्र को सम्बोधित करते हुए अपने 22 मिनट के भाषण में पाक को जमकर लताड़ लगाते हुए जिस प्रकार बेहद तीखे तेवर दिखाए, वह प्रशंसनीय है, लेकिन अब धरातल पर भी पाकिस्तान के खिलाफ ऐसी ही तीखी कार्रवाई की सख्त जरूरत है। सुषमा स्वराज ने इस अंतर्राष्ट्रीय मंच के माध्यम से दुनिया के समक्ष एक बार फिर पाकिस्तान के झूठ का खुलासा करते हुए उसका कुत्सित चेहरा बेनकाब किया है और समूचे विश्व को अपने तीखे अंदाज में बताया कि हत्यारे आतंकियों के रक्तपात की प्रशंसा करने वाले पाकिस्तान के साथ वार्ताएं क्यों अटक जाती हैं।

सुमित्रा महाजन का आरक्षण ज्ञान

उन्हें नहीं पता कि सरकारी सेवाओं में आरक्षण की कोई समय सीमा नहीं?
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-10-01 10:56 UTC
लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने अपने आरक्षण ज्ञान का एक बार फिर रांची की एक बैठक में परिचय दिया है। उस बैठक में सरकारी सेवाओं और शैक्षिक संस्थाओं मे मिल रहे आरक्षण की चर्चा कर रही थीं और कहा कि बाबा साहेब भीमराव आम्बेडकर चाहते थे कि आरक्षण 10 साल के लिए ही हों, लेकिन 10 साल समाप्त होने के पहले उसे 10 साल और बढ़ा दिया जाता है और यह सिलसिला पिछले कई दशकों से चलता आ रहा है। इसके कारण आरक्षण समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी निराश किया

दागी जन प्रतिनिधियों से लोकतंत्र को अब कौन बचाये ?
डाॅ. भरत मिश्र प्राची - 2018-09-29 10:27 UTC
देश की वर्षो गुलामी से मिली आजादी के बाद स्थापित लोकतंत्र में धीरे - धीरे बाहुबलियों, माफियाओं एवं अपराधिक प्रवृृŸिा से जुड़ें लोगों का वर्चस्व बढ़ता गया जिसके कारण आज लोकतंत्र के मजबूत स्तंम्भ सर्वोच्य न्यायपालिका सुप्रीम कोर्ट भी इस बात को मानने लगा है कि आपाराधिक पृृष्ठिभूमि वालें लोगों के जनप्रतिनिधि बनने से लोकतंत्र की जड़ें कमजोर हुई है, जिसे रोकने के लिये संसद में कानून बनना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के इस कथ्य एवं सोच में सच्चाई तो है पर संसद में इस विषय पर कानून कैसे बन पायेगा, जब संसद में कानून बनाने वाले एवं पारित करने वालों में आज के समय में सर्वाधिक संख्या आपराधिक मामलें से जुड़े जनप्रतिधियों की विराजमान है। आ बैल मुझे मार ! जब संसद में ऐसे जनप्रतिधियों की भरमार हो जिन्हें राजनीति में आने से रोकने के लिये कानून बनाने की बात की जा रही हो। कैसे संभव हो सकेगा ? विचारणीय पहलू है। कोई अपने आप पैर में कैसे कुल्हाड़ी चला पायेगा ?

200 वनडे में कप्तानी करने वाले पहले भारतीय बने धोनी

रिकाॅर्डों के बेताज बादशाह महेन्द्र सिंह धोनी
योगेश कुमार गोयल - 2018-09-28 12:32 UTC
भारतीय क्रिकेट जगत में एक नाम ऐसा है, जो किसी न किसी वजह से सदैव सुर्खियों में रहता है और वह नाम है महेन्द्र सिंह धोनी उर्फ माही, जिनके बारे में प्रायः कहा जाता है कि जब वो मैदान पर होते हैं तो रिकाॅर्ड बरसते हैं बल्कि बहुत से खेल प्रेमी तो यह भी मानते हैं कि अब तो धोनी का मैदान पर उतरना ही एक रिकाॅर्ड बन जाता है। गत दिनों एशिया कप के दौरान ऐसा ही एक और रिकाॅर्ड धोनी ने अपने नाम किया है। वह अब 200 वनडे मैचों में कप्तानी करने वाले पहले भारतीय कप्तान बन गए हैं और सबसे अहम बात यह है कि धोनी की अगुवाई में खेले गए इन 200 वनडे मैचों में से भारत ने 110 में जीत हासिल की।

आधार पर सुप्रीम फैसला और उसके बाद

क्या बेनामी संपत्ति पर सर्जिकल स्ट्राइक कर पाएंगे नरेन्द्र मोदी
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-09-27 12:28 UTC
सुप्रीम कोर्ट ने आधार की संवैधानिकता पर अपना फैसला दे दिया है। न केवल इसने आधार को संवैधानिक माना है, बल्कि इस पर बने एक कानून की वैधता की भी पुष्टि कर दी है। उस कानून की वैधता की पुष्टि करते हुए उसने उस अनुच्छेद को हटा दिया है, जिसके तहत निजी कंपनियों को भी आधार डेटा उपलब्ध कराने का प्रावधान था। निजी कंपनियां किसी व्यक्ति को अपना आधार नंबर देने को बाध्य नहीं कर सकती, लेकिन सरकारी सेवाओं और कार्यक्रमों से आधार लिंकिंग पर कोई रोक नहीं लगी है।

मानसूनी बारिश का कहर

हर साल क्यों पैदा होते हैं बाढ़ जैसे हालात?
योगेश कुमार गोयल - 2018-09-26 12:34 UTC
मानसून ने जाते-जाते हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखण्ड इत्यादि उत्तर भारत के कुछ राज्यों में जो कहर बरपाया है, वह बेहद अप्रत्याशित था लेकिन इस भीषण त्रासदी के बाद एक बार फिर वही सवाल खड़ा हो गया है कि पिछले कुछ समय से प्रकृति बार-बार किसी न किसी रूप में अपना रौद्र रूप दिखा रही है लेकिन बार-बार प्रकृति का खौफनाक रूप देखने के बावजूद हम सुधरना क्यों नहीं चाहते? क्यों हम प्रकृति को सहेजने के कोई सार्थक प्रयास नहीं करना चाहते? एक ओर जहां उत्तर भारत में लोग पूरे सितम्बर माह में बारिश के लिए तरसते रहे, वहीं सितम्बर माह के आखिरी कुछ दिनों में प्रकृति ने ऐसी बारिश की कि चहुं ओर आफत टूट पड़ी। हिमाचल में जहां तेज वर्षा, बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं के चलते 300 से भी ज्यादा स्थानों पर सड़कें बह गई, वहीं पंजाब, हरियाणा, उत्तराखण्ड में भी अनेक जगहों पर तबाही का भयानक मंजर देखने को मिला।