विपक्ष में अपनी उपेक्षा से नाराज हैं नीतीश कुमार
राष्ट्रपति चुनाव तो बहाना है
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2017-07-04 12:40 UTC
नीतीश कुमार अपनी उस आक्रामक मुद्रा में एक बार फिर वापस आ गए हैं, जिस मुद्रा के साथ वह भारतीय जनता पार्टी के अंदर नरेन्द्र मोदी के उभार का विरोध किया करते थे। नरेन्द्र मोदी सामाजिक रूप से एक पिछड़े वर्ग से आते हैं। इस बात को नीतीश कुमार गोधरा बाद हुए दंगे के बाद से ही जानते थे। इसलिए उन्हें यह भी पता था कि यदि नरेन्द्र मोदी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर पहुंचे तो भाजपा के लिए उनकी (नीतीश की) उपयोगिता समाप्त हो जाएगी। भाजपा के अंदर ओबीसी नेतृत्व के अभाव का फायदा उठाकर ही नीतीश छोटे जनाधार के बावजूद बिहार में बड़े जनाधार वाली भाजपा पर हावी रहा करते थे। उन्हें मालूम था कि यदि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व किसी ओबीसी के हाथ में चला जाएगा तो फिर राजग में उनकी उपयोगिता कम हो जाएगी और उसके साथ उनका दबदबा समाप्त हो जाएगा।