संकेत जो नए राष्ट्रपति के भाषण से निकले
अपेक्षा पर खरे नहीं उतरे कोविंद
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2017-07-27 11:03 UTC
भारत के चैदहवें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण करने के बाद रामनाथ कोविंद ने अपने लिखित भाषण के जरिये देश और दुनिया के बारे में अपनी समझ स्पष्ट करने की कोशिश की, जो कि राष्ट्रपति के तौर उनसे अपेक्षित थीं। लेकिन ऐसा करते हुए वे अपनी राजनीतिक और वैचारिक प्रतिबद्धता से ऊपर उठने की उदारता नहीं दिखा पाए जिसकी कि अपेक्षा राष्ट्रपति पद संभालने वाले किसी भी व्यक्ति से की जाती है। राष्ट्रपति पद के चुनाव में कोविंद बेशक भारतीय जनता पार्टी और उसके गठबंधन के उम्मीदवार थे। इससे पहले भाजपा की सरकार ने ही उन्हें राज्यपाल भी बनाया था और उससे भी पहले वे लंबे समय तक भाजपा के माध्यम से राजनीति में सक्रिय थे। लेकिन उनके राष्ट्रपति चुने जाने के बाद उनसे अपेक्षा थी कि वे अपने दलीय और वैचारिक लगाव से ऊपर उठकर देश से संवाद करेंगे, लेकिन अफसोस कि वे ऐसा नहीं कर सके।