Loading...
 
Skip to main content

View Articles

मध्यप्रदेश का किसान आंदोलन

सरकार ने आग में घी का काम किया
एल एस हरदेनिया - 2017-06-10 16:14 UTC
भोपालः 1956 में अपने निर्माण के बाद मध्यप्रदेश ने उतनी हिंसा कभी नहीं देखी, जितना वह आज देख रहा है। पिछले एक सप्ताह से मध्य प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा जल रहा है। दर्जनों बसों और ट्रकों को आंदोलनकारियों ने फूंक डाला। कारों और पेट्रोल पंपों में भी आग लगाई गई। इसके कारण हजारों करोड़ रुपयों की संपत्ति का नुकसान हो चुका है।

अपने आदेशों पर अमल नहीं करवा पा रहे हैं योगी

अनुभव की कमी और बाहरी हस्तक्षेप से समस्या हो रही है जटिल
प्रदीप कपूर - 2017-06-09 12:12 UTC
लखनऊः योगी सरकार के 100 दिन पूरे होने वाले हैं, लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री प्रशासन पर अपनी पकड़ पाने में नाकाम रहे हैं। 100 दिन की उपलब्धियों की सूची तैयार करने को नौकरशाही को कहा गया है, लेकिन सरकार की क्या उपलब्धियां रहीं, यह ढूृढ़े नहीं मिल पा रही है।

मंदसौर में किसानों पर गोली

बारुद के ढेर पर बैठी है मोदी सरकार?
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-06-09 12:07 UTC
मध्यप्रदेश में किसानों पर चली पुलिस की गोलियां कहीं इस बात के संकेत नहीं कि मोदी सरकार बारुद के ढेर पर बैठी है? यह संदेह इसलिए पैदा होता है कि सिर्फ मध्यप्रदेश में ही नहीं, बल्कि देश भर के किसानों में भारी आक्रोश है। खेती का उत्पादन अच्छा है, लेकिन अच्छा उत्पादन कृषि उत्पादकों के लिए ही विनाश का पैगाम लेकर आता है और उसके उत्पाद उन्हें अच्छी कीमत नहीं दे पाते। अच्छी कीमत तो दूर अनेक बार तो खेती के लिए लगाई गई पूंजी के बराबर आय भी किसान अपने उत्पादों ने नहीं कर पाता। और यदि किसानों ने वह पूंजी कर्ज लेकर जुटाई हो, तो फिर वे कर्ज की वापसी में विफल होने लगते हैं और उनकी यह विफलता उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर कर देती है।

मोदी और भाजपा को हराना आसान नहीं होगा

2019 में विपक्ष की एकता जरूरी है
कल्याणी शंकर - 2017-06-07 12:54 UTC
2004 के लोकसभा चुनाव के ठीक पहले मैंने डीएमके नेता करुणानिधि का इंटरव्यू लिया और उनसे पूछा कि वे यूपीए का हिस्सा क्यों बन रहे हैं। एक मिनट के लिए वे ठहरे और फिर कहा कि उनकी नजर में सोनिया के नेतृत्व वाले यूपीए के लिए सत्तारूढ़ एनडीए का विकल्प बनने के लिए जगह है। वे उस समय की राजनैतिक स्थिति को समझने में सफल रहे थे। 2004 के चुनाव में यूपीए सत्ता में आ गई। क्या विपक्षी एकता एक बार फिर जरूरी हो गई है?

भाजपा के 'मिशन केरल' को झटका

अमित शाह ने महसूस किया कि केरल गुजरात नहीं है
पी श्रीकुमारन - 2017-06-06 11:18 UTC
तिरुअनंतपुरमः वे आए। उन्होंने देखा। पर जीतने में वे विफल रहे। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के तीन दिवसीय केरल दौरे का सार यही है।

2019 के चुनाव तक मंदिर मसले को गर्म रखेंगे योगी

मुख्यमंत्री की अयोध्या यात्रा का समय महत्वपूर्ण
प्रदीप कपूर - 2017-06-05 11:04 UTC
लखनऊः मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की पिछली अयोध्या यात्रा इस मायने में महत्वपूर्ण है कि यह उस समय हुई, जब भाजपा के बड़े नेताओं पर मुकदमे का ट्रायल शुरू हो रहा था और वे नेता अदालत में अपनी हाजिरी दे रहे थे।

बिहार का बढ़ता राजनैतिक अनिश्चय

नीतीश कुमार के सामने नई चुनौती
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-06-03 09:45 UTC
बिहार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है और नीतीश कुमार आज एक ऐसे दोराहे पर खड़े हैं, जिसकी दोनों राहें अनिश्चितता से भरी है। मंडल राजनीति से निकले सभी राजनेतओ मे नीतीश कुमार निश्चय ही सबसे ज्यादा राजनैतिक कुशलता रखने वाले नेता रहे हैं, जो जनाधारहीन होने के बावजूद न केवल लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री बने रहे हैं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी अपनी छाप छोड़ते रहे हैं। उनमें ऐसी कुशलता है कि भारतीय जनता पार्टी से दोस्ती करने, उसका समर्थन लेने और उसको समर्थन देने के बावजूद वे अपनी सेक्युलर छवि बनाने में सफल रहे हैं। बिहार में वे खुद अपने बूते मुख्यमंत्री नहीं बन सकते, बावजूद इसके वे प्रधानमंत्री के दावेदार बन जाते हैं।

मोदी की छाया में भारत के तीन साल

आर्थिक विषमता और बेरोजगारी बढ़ी
अनिल सिन्हा - 2017-06-02 12:54 UTC
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने तीन साल गुजार दिए हैं। यह समय इतना तेजी से बीता कि पता ही न चला। एक तेज गति से चलती फिल्म के नायक की तरह मोदी ने देश को चलाया है। हालांकि गहराई से देखने पर लगता है कि जिस गंभीरता की उम्मीद उनसे लोगों ने की थी, वह उसके पास तक भी न पंहुच पाए। ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारा था और लोगों ने तेज विकास के लिए उन्हें चुना था। जाहिर है उनके कार्यकाल का आधा से अधिक समय पूरा हो जाने के बाद लोग जानना चाहेगें कि उनके शासन की दिशा क्या रही और नतीजे में देश के हाथ क्या आया। सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम पाते हैं कि मोदी ने इन तीन सालों में ंविपक्ष को दबाए रखने में पूरी सफलता प्राप्त की है और 2019 के चुनावों में उन्हें चुनौती देने वाली कोई बड़ी ताकत सामने नहीं है।

मायावती लड़ रही हैं अब अस्तित्व की लड़ाई

भीम सेना के कारण भी नींद हराम
प्रदीप कपूर - 2017-06-01 11:32 UTC
लखनऊः पिछले विधानसभा चुनाव में हुई दुर्गति के बाद बसपा सुप्रीमो अस्तित्व संकट की लड़ाई लड़ रही है। इसके बाद अ बवह अपनी राजनीति को बदलने के लिए भी तैयार दिख रही हैं।

कश्मीर समस्या का राजनैतिक समाधान ढूंढ़ना चाहिए

हिंसक समाधान खोजने से स्थानीय लोग आतंकवादियों के खेमे में जा सकते हैं
कल्याणी शंकर - 2017-05-31 11:29 UTC
कश्मीर की समस्या दिनोंदिन बदतर होती जा रही है। हताश और गुमराह युवा सड़कों पर उतरकर सुरक्षा बलों पर पथराव कर रहे हैं। सुरक्षा बल भी उनके खिलाफ ताकत का इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आज हालत वहां 1990 से भी खराब है, जब वहां उग्रवाद अपने चरम पर था।