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बराक ओबामा की मध्यपूर्व नीति को झटका

पुतिन ने अमेरिका की धाक वहां समाप्त कर दी
अरुण श्रीवास्तव - 2015-11-05 10:26 UTC
सीरिया में अमेरिकी वर्चस्व को उस समय बहुत बड़ा झटका लगा, जब रूस ने वहां उग्रवादियों के खिलाफ जमकर बमबारी शुरू कर दी। उसके बाद ओबामा प्रशासन ने अपना चेहरा बचाने के लिए आईएसआईएस के खिलाफ अपने सैनिकों की तैनाती शुरू कर दी है।

मध्यपूर्व में एक बड़ा खिलाड़ी बन गया है रूस

ईरान, इराक और सीरिया के साथ उसकी दोस्ती अमेरिका को खटकी
अरुण श्रीवास्तव - 2015-10-28 11:52 UTC
अमेरिका की दादागीरी समाप्त हो गई है। किसी ने भी यह नहीं सोचा होगा कि विश्व पर अमेरिका का वर्चस्व इस तरह समाप्त हो जाएगा। रूस ने 30 सितंबर को सीरिया मे सशस्त्र हस्तक्षेप किया। वैसा वहां की सरकार के अनुरोध पर किया गया। उस हस्तक्षेप के साथ ही वहां अमेरिका की दादागीरी समाप्त हो गई।

सीरिया संकट को जटिल बना रही है अमेरिका की महत्वाकांक्षा

ग्रामीण ओबामा को पुतिन के साथ मिलकर इसे सुलझाना चाहिए
अरुण श्रीवास्तव - 2015-10-03 11:13 UTC
असद की सत्ता को समाप्त होने से बचाने के लिए रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने वहां सेना भेज दी है। इससे सीरिया के गृहयुद्ध का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। यदि रूस ने अपने इस कदम के बाद सही और सफल राजनय नहीं किया, तो उसकी हालत वही हो सकती है, जो एक बार सोवियत संघ की अफगानिस्तान में हो चुकी है। बराक ओबामा और पुतिन आपसी बातचीत के द्वारा और मिलजुलकर मामले को सुलझा सकते हैं, लेकिन दोनों मिलकर क्या करेंगे और सीरिया सत्ता प्रमुख बशर अल असद का क्या होगा, अभी यह साफ नहीं है।

शास्त्री की वाशिंगटन यात्रा को दो बार टाला गया

प्रदेश में भारत पाक संबंध द्विपक्षीय एजेंडे में सबसे ऊपर था
कल्याणी शंकर - 2015-09-04 11:04 UTC
ताशकंद समझौते के बाद तब के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की वाशिंगटन यात्रा तय की गई थी, पर यात्रा हो न सकी। सच कहा जाय तो उनके प्रधानमंत्रित्वकाल में वाशिंगटन की यात्रा दो बार हुई थी। पहली यात्रा जून 1965 के लिए तय की गई थी। पर उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति जाॅनसन ने उसे स्थगित कर दिया। वह शास्त्रीजी के लिए बहुत ही निराशाजनक था। दूसरी यात्रा 31 जनवरी, 1966 से 5 फरवरी, 1966 के लिए तय हुई थी। यदि शास्त्री जी जिंदा रहते, तो वे एक विजयी राजनेता के रूप में वाशिंगटन की यात्रा करते।

राजपक्षे की हार से दिल्ली को राहत

श्रीसेना के कार्यकाल में भारत-श्रीलंका संबंध सुधरेंगे
बरुण दास गुप्ता - 2015-08-24 11:57 UTC
श्रीलंका संसदीय चुनाव के नतीजे भारत के लिए राहत की सांस लेने का कारण बनकर आए हैं और दूसरी तरफ वे चीन के लिए दुहरा झटका हैं। इस चुनाव में महिंदा राजपक्षे की पार्टी की हार हुई। गौरतलब हो कि राजपक्षे राष्ट्रपति के रूप में श्रीलंका की सत्ता पर 9 सालों से काबिज थे। इसी साल जनवरी महीने में राष्ट्रपति के लिए हुए चुनाव में उनकी मैत्रीपाल सिरीसेना के हाथों हार हो गई थीं। उस हार के बाद महिंदा राजपक्षे प्रधानमंत्री के रूप में सत्ता में एक बार फिर आने के लिए संसदीय चुनाव में गंभीर प्रयास कर रहे थे।

माताओं और नवजातों की जिंदगी पर 24 देश करेंगे मंथन

एस एन वर्मा - 2015-08-20 14:01 UTC
नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय 27 अगस्त से नई दिल्ली में दो दिवसीय काॅल टू एक्शन समिट 2015 का आयोजन करने जा रहा है।
भारत

पाकिस्तान के साथ बातचीत रोकने का कोई मतलब नहीं

गुरदासपुर हमले के बाद हमारा संकल्प और मजबूत होना चाहिए
कल्याणी शंकर - 2015-07-31 16:55 UTC
पिछले सोमवार को गुरदासपुर में हुए आतंकी हमले के बाद हमारी आंतरिक सुरक्षा और बाहरी खतरे से संबंधित चिंताएं और गहरी हो गई हैं। दिन के उजाले में आतंकवादी सीमा पार से हमारे देश में आ धमके और हमारो नागरिकों और पुलिस को मार गिराया। यह हमारे लिए खतरे की घंटी है और इसके बाद हमें अपने खुफिया और सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की चुनौती पेश करता है।

म्यान्मार में भारत की कार्रवाई पर पाक प्रतिक्रिया बेमतलब

भारत अपनी शर्तों पर लड़ रहा है आतंक से लड़ाई
नन्तू बनर्जी - 2015-06-13 16:28 UTC
म्यान्मार में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई पर पाकिस्तान हाय तोबा क्यों मचा रहा है? पाकिस्तान को तो इस बात से खुश होना चाहिए कि भारत अब भारतीय उपमहाद्वीप से आतंकवाद का सफाया करना चाहता है। इससे पाकिस्तान को इसलिए खुश होना चाहिए क्योंकि वह खुद भी आतंकवाद का शिकार है और वहां हो रही आतंकी कार्रवाइयों में सबसे ज्यादा लोग मारे जा रहे हैं। ईरान और अफगानिस्तान से सटे इलाके में ही आतंकी लोगों को नहीं मार रहे हैं, बल्कि पाकिस्तान के बड़े महानगरों को भी उन्होंने निशाना बना रखा है। वे कराची और लाहौर तक को नहीं छोड़ रहे हैं। यदि पाकिस्तान अपने क्षेत्र से आतंकवाद का सफाया करना चाहती है, तो उसे भारत के साथ आतंक के खिलाफ लड़ाई में भागीदारी करनी चाहिए।
भारत

क्या मोदी भारत-बांग्ला संबंध को बेहतर बना सकते हैं?

प्रधानमंत्री की ढाका यात्रा पर टिकी सबकी नजर
कल्याणी शंकर - 2015-06-05 16:23 UTC
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहली बांग्लादेश यात्रा बहुत महत्वपूर्ण साबित होने जा रही है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद पहली ऐसी विदेशी सरकार प्रमुख थी, जिन्होंने अपने देश की यात्रा पर नरेन्द्र मोदी की आमंत्रित किया था। उनके साथ नरेन्द्र मोदी की मुलाकात सरकार के एक साल पूरा होने के बाद होगी। बांग्लादेंश भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसकी सहायता से भारत अपने पूर्वोत्तर राज्यों के साथ परिवहन ज्यादा सुविधा के साथ कर सकता है। इन क्षेत्रो में सुरक्षा बहाल करने के लिए भी बांग्लादेश के साथ भारत के अच्छे संबंध जरूरी हैं।

भारत बांग्लादेश के संबंध बेहतर मोड़ पर

सीमा विवाद पर का हल जरूरी था
कल्याणी शंकर - 2015-05-08 14:51 UTC
संसद के चालू सत्र में भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से लंबित पड़ी भूमि सीमा सहमति को अनुमोदन प्राप्त हो रहा है। यह एक ऐसा मसला है जो दोनो देशों के संबंधों के लिए कांटा बना हुआ था। जब से बांग्लादेश का गठन हुआ है, तभी से ही यह मसला अपनी जगह पर कायम है। विलंब का एक बड़ा कारण यह था कि भारत की विदेश नीति यहां की घरेलू नीति की गुलाम बनी हुई थी।