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अच्छे दिनों के इंतजार में भारत

विजय कुमार मधु - 2014-06-21 10:59 UTC
जब भारत आजाद हुआ था तो ब्रिटिश हुकूमत ने सभी राजे-रजवाड़ों को स्वतन्त्र रहने के लिए छूट दे दी और भारत के विभाजन की लकीर खींच दी ताकि ये आपस लड़ मरे और फिर पुनः ये सब उनकी हुकूमत को तरसे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गुजरात प्रांत के नेता और लौहपुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल ने अपनी कुशाग्र बुद्धि से सभी को ना केवल एकत्रित किया बल्कि सभी राज्यों को भारतीय संविधान में अपने को नई सोच में ढालने की पेश की जिसमें वे अपने अधिकारों को सुरक्षित रख सकें और राजा-महाराजाओं के लिए वार्षिक तौर प्रिवीपर्स के धन-राशि भी तय कर दी लेकिन जब लौह-महिला इन्दिरा गांधी सत्ता में आई तो उन्होंने राजा-महाराजाओं के प्रिसीपर्स समाप्त कर दिए और वित्तीय संस्थाओं को भारतीय संविधान में ले लाई ताकि आम जनता तक उनकी सुविधाएं आसानी से पहुंच सकें।
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व्यापम घोटाले की आग आरएसएस के नेता तक

शर्मा की गिरफ्तारी के बाद चौहान के इस्तीफे की हो रही है मांग
एल एस हरदेनिया - 2014-06-21 09:19 UTC
भोपालः प्रसिद्ध गजल गायक स्वर्गीय जगजीत सिंह की एक पंक्ति है कि ’’ बात निकलेगी, तो बहुत दूर तलक जाएगी।’’ मध्यप्रदेश के व्यापम घोटाले पर जो लोग आज नजर लगाए हुए हैं, उनकी जुबान पर यह पंक्ति आज कल चढ़ी हुई है। लक्ष्मीकांत शर्मा की इस घोटाले में गिरफ्तारी के बाद अब और लोगों पर भी कहर टूटने की आशंका व्यक्त की जा रही है। गिरफ्तारी के पहले श्री शर्मा ने अपने विश्वस्त लोगों को कहा था कि यदि वे पकड़े गए, तो अन्य अनेक लोग भी पकड़े जाएंगे। अब वे वास्तव में पकड़ लिए गए हैं और जेल की हवा खा रहे हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि और किन किन पर शामत आने वाली है।
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अर्थव्यवस्था को ठीक करने के लिए कठोर कदम

क्या ऐसा कर पाएंगे प्रधानमंत्री मोदी
कल्याणी शंकर - 2014-06-20 11:56 UTC
गोवा में अपनी पार्टी के कार्यकत्र्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि देश की हालत को ठीक करने के लिए कुछ कठोर कदम उठाने पड़ सकते हैं और लोगों के बीच में उनकी जो अच्छी छवि बनी है, उसका थोड़ा नुकसान भी हो सकता है। उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में वहां उपस्थित लोगों से पूछा कि उन्हें क्या इस तरह के कदम उठाने चाहिए। इसका स्वाभाविक जवाब था हां उठाने चाहिए।
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खराब मानसून महंगाई बढ़ने का बहाना नहीं हो सकता

सरकार को किसानों की सहायता के लिए आगे आना होगा
अशोक बी शर्मा - 2014-06-19 10:56 UTC
भारत में मानसून प्रवेश कर चुका है। कुछ हिस्सों मंे वर्षा हो रही है और आने वाले कुछ दिनों में ही मानसून अपने आगोश में पूरे देश को ले लेगा। इस बीच मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि इस साल देश में औसत से कम वर्षा होगी। इसके कारण देश भर में हताशा फैल रही है। हताशा का कारण यह नहीं है कि देश में अनाज की कमी है। सच तो यह है कि देश में अनाज का पर्याप्त भंडार है। लेकिन लोग परेशान हैं, तो इसका कारण बढ़ती महंगाई है।
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कांग्रेस का सीखने से इनकार

हार के कारणों पर कोई विचार मंथन नहीं
अमूल्य गांगुली - 2014-06-18 12:46 UTC
कांग्रेस को न तो कुछ सीखने की परवाह है और न कुछ भूलने की। उसकी पिछले लोकसभा में शर्मनाक हार हुई, लेकिन वह शर्म करने को भी तैयार नहीं है। जब पिछले साल इसने 4 प्रदेशों की विधानसभाओं में हार का सामना किया था, तो इसने कहा था कि हार के कारणों पर गहरा आत्ममंथन होगा। लेकिन उसने वैसा कुछ भी नहीं किया। यही कारण है कि उसके कुछ महीने बाद हुए लोकसभा चुनाव में उसे उससे भी बड़ी हार का सामना करना पड़ा।
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मोदी की भूटान यात्रा: आपसी संबंध सुधारने में सहायक

बरुण दास गुप्ता - 2014-06-17 08:13 UTC
कोलकाताः भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भूटान यात्रा सफल रही है और वह एक राजनयिक के रूप में अपनी क्षमता दुनिया को दिखाने में सफल रहे हैं। भूटान को वह आश्वस्त करने में सफल रहे हैं कि भारत उसके हितों की रक्षा करने में ईमानदार हैं। उन्होंने कहा कि भूटान अपने राजनैतिक और आर्थिक हितों की रक्षा करने के लिए भारत पर विश्वास कर सकता है और वह चीन के दबंगई व्यवहार के कारण अपने आपको असुरक्षित नहीं समझे।
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नरेन्द्र मोदी श्रेष्ठतम प्रधानमंत्री वक्ता

पहले सत्र ने अच्छा प्रभाव छोड़ा
हरिहर स्वरूप - 2014-06-17 08:05 UTC
एक लंबे अरसे के बाद संसद के दोनों सदनों ने पहली बार किसी प्रधानमंत्री को अलिखित भाषण करते सुना। प्रधानमंत्री के पास कोई लिखित भाषण तो था ही नहीं, उन्होंने कोई नोट्स भी नहीं अपने पास बना रखे थे और न ही प्वाॅइंट्स नोट कर रखे थे। उन्होंने जो कुछ भी कहा संसद मंे भाषण करते समय ही तैयार किया हुआ था। वह एक बहुत ही शक्तिशाली भाषण था, जिसमें राष्ट्रपति के अभिभाषण में भाग लेने वाले विपक्षी सांसदों के सवालों के जवाब भी शामिल थे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सभी आलोचकों को जवाब दिया। लिख कर लाए बिना सबको जवाब दे देना और वह भी बहुत ही प्रभावशाली भाषा में प्रभावशाली तरीके से, एक बहुत बड़ी बात थी। सच कहा जाय, तो संसद में दिया गया नरेन्द्र मोदी का यह भाषण उनका अबतक का दिया गया सर्वश्रेष्ठ भाषण था।
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मध्यप्रदेश में घोटालों का अंत नहीं

अनेक ताकतवर मंत्री पर उठ रहे हैं सवाल
एल एस हरदेनिया - 2014-06-14 10:21 UTC
भोपालः मध्यप्रदेश में घोटालों का अंत नहीं दिखाई पड़ रहा है। हाल ही में एक बहुत बड़ा घोटाला सामने आया है। यह घोटाला प्रोफेसनल परीक्षा बोर्ड का है। बोर्ड अराजपत्रित कर्मचारियों की बहाली का काम करता है और मेडिकल, इंजीनियरिंग व अन्य प्रोफेसनल कोर्स में नामांकन के लिए प्रवेश परीक्षा का आयोजन भी करता है।
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एक समृद्ध आंध्र का निर्माण

चन्द्रबाबू नायडू के सामने एक बड़ी चुनौती
कल्याणी शंकर - 2014-06-14 05:25 UTC
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू एक मायने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रोटोटाइप हैं। जब वे आंध्र प्रदेश के पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, तो वे विकास, इन्फाॅर्मेशन टेक्नालाॅजी, ई-गवर्नेंस और विदेशी निवेश की बात करते थे और काॅर्पोरेट के सीईओ की शैली में अपनी सरकार चलाते थे। वे जब तक मुख्यमंत्री रहे, तबतक उसी शैली में काम करते रहे और आधुनिकीकरण के लिए लगातार प्रयत्नशील रहे। हैदराबाद को उन्होंने अपनी उपलब्धियों का ब्रांड नाम बना दिया। जिस तरह से उन्होंने पिछले सप्ताह रविवार को विजयवाड़ा में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, उससे साफ होता है कि एक शोमैन के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कम नहीं हैं। वे 2004 के विधानसभा चुनाव में इसलिए विफल हो गए थे, क्योंकि उन्होंने हैदराबाद से बाहर आंध्रप्रदेश की अच्छी सुध नहीं ली थी। खासकर गांवों और किसानों की उन्होंने उपेक्षा कर दी थी। यही कारण है कि इस बार उन्होंने शपथ ग्रहण करने के बाद पहला काम किसानों को फायदा पहुंचाने वाला किया। उन्होंने मुख्यमंत्री बनते के साथ ही किसानों के 56000 करोड़ रुपये के कर्ज को माफ कर दिया।
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फास्ट ट्रैक पर मोदी सरकार

सुशासन पर मुख्य जोर
जी श्रीनिवासन - 2014-06-12 15:13 UTC
नई दिल्लीः एक छोटे मंत्रिमडल के साथ मोदी सरकार ने सही दिशा में अपनी यात्रा शुरू कर दी है और छोटी छोटी चीजों में वह समय बर्बाद नहीं कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने उन आलोचको को गलत साबित कर दिया है, जो कह रहे थे कि उनकी सरकार बनने के बाद विदेशों से संबंध तनावपूर्ण हो जाएंगे। उन्होंने अपने शपथ ग्रहण समारोह में सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों और राज्याध्यक्षों को बुलाकर विदेशों खासकर अपने पड़ोसियों से बेहतर संबंध रखने में अपने विश्वास का इजहार कर दिया है। इससे आपसी विश्वास बढ़ेगा और भारत के पड़ोसी देश एक मित्रतापूर्ण माहौल को महसूस करेंगे।
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