अच्छे दिनों के इंतजार में भारत
- 2014-06-21 10:59 UTCजब भारत आजाद हुआ था तो ब्रिटिश हुकूमत ने सभी राजे-रजवाड़ों को स्वतन्त्र रहने के लिए छूट दे दी और भारत के विभाजन की लकीर खींच दी ताकि ये आपस लड़ मरे और फिर पुनः ये सब उनकी हुकूमत को तरसे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गुजरात प्रांत के नेता और लौहपुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल ने अपनी कुशाग्र बुद्धि से सभी को ना केवल एकत्रित किया बल्कि सभी राज्यों को भारतीय संविधान में अपने को नई सोच में ढालने की पेश की जिसमें वे अपने अधिकारों को सुरक्षित रख सकें और राजा-महाराजाओं के लिए वार्षिक तौर प्रिवीपर्स के धन-राशि भी तय कर दी लेकिन जब लौह-महिला इन्दिरा गांधी सत्ता में आई तो उन्होंने राजा-महाराजाओं के प्रिसीपर्स समाप्त कर दिए और वित्तीय संस्थाओं को भारतीय संविधान में ले लाई ताकि आम जनता तक उनकी सुविधाएं आसानी से पहुंच सकें।