अफरीदी के बयानों का अर्थ
भारतीय के नाते हमें पाकिस्तान के संदर्भ में गांधी की धारा को मजबूत करना चाहिए
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2011-04-11 08:13 UTC
कुछ लोगों की राय है कि पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान शाहिद अफरीदी ने भारत के बारे में जो नकारात्मक टिप्पणियां की उन्हें तरजीह नहीं देनी चाहिए। पहली नजर में यह सुझाव उचित भी लगता है, क्योंकि ऐसी बातों को तरजीह देने से अंततः हासिल कुछ नहीं होता। खासकर ऐसे समय में जब भारत की ओर से एक बार फिर पाकिस्तान के साथ बातचीत को पटरी पर लाकर शांति एवं स्थिरता कायम करने की पहल हो चुकी है, किसी नकारात्मक प्रतिक्रिया का संज्ञान लेना इसे धक्का पहुंचा सकता है। चूंकि अफरीदी ने अपना स्पष्टीकरण दे दिया है, इसलिए भी बात आगे बढ़ना युक्तिसंगत नहीं लगता। किंतु जिस क्रिकेट को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शांति एवं सद्भाव कायम करने का आधार बनाकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की अगवानी की, यदि उसके कप्तान की राय ही भारत के बारे में कभी अच्छी कभी बुरी आ रही है तो यह सामान्य बात नहीं है। इसलिए अफरीदी ने जो कुछ भी कहा उसका मर्म समझना आवश्यक है।