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भ्रष्टाचार के खिलाफ राष्ट्रीय आंदोलन

केन्द्र सरकार के पास बचा है एक ही रास्ता
उपेन्द्र प्रसाद - 2011-08-20 08:46 UTC
अन्ना के नेतृत्व में चल रहा भ्रष्टाचार के खिलाफ यह राष्ट्रीय आंदेालन आजाद भारत का सबसे बड़ा आंदोलन है। केन्द्र सरकार को इस बात को लेकर खुश होना चाहिए कि यह एक अहिंसक और गांधीवादी आंदोलन है, क्योंकि भ्रष्टाचार के खिलाफ हुए ट्यूनिशिया तथा कुछ अन्य देशों के आंदोलन बहुत हिंसक हो गए थे। लीबिया में तो गृहयुद्ध चल रहा है। सीरिया में भी स्थिति लगभग उतनी ही विस्फोटक है। मिश्र में तो तख्तापलट ही हो चुका है। ट्यूनिशिया में भी सरकार का पतन हो गया है। उन देशों में भी सत्ता बदलने वाले वे आंदोलन मूल रूप से भ्रष्टाचार के ही खिलाफ हुए थे। अभी भी अरब के कुछ अन्य देशों में भी इस तरह के आंदोलन चल रहे हैं और उन देश की सत्ता के सामने अस्तित्व का खतरा पैदा हो गया है।

अन्ना के आंदोलन की आंधी

केन्द्र सरकार अपने ही जाल में फंस गई है
कल्याणी शंकर - 2011-08-19 11:30 UTC
अन्ना हजारे के सामने आज यदि केन्द्र सरकार अपने आपको लाचार पा रही है, तो उसके लिए वह खुद जिम्मेदार है। उसके कारण ही आज अन्ना को वह राष्ट्रीय रुतबा मिला है, जिसके कारण उनकी तुलना महात्मा गांधी और जयप्रकाश नारायण से की जा रही है। अप्रैल महीने में जब उन्होंने जंतर मंतर पर अपना आमरण शुरू किया था, तो उस समय महाराष्ट्र से बाहर देश में बिरले लोग ही जानते थे, पर उस अनशन के दौरान केन्द्र सरकार ने उन्हें जो महत्व दिया, उससे अन्ना एक राष्ट्रीय कद वाले नेता बन गए।

राजनीतिक सुझबूझ के अभाव में भद्द पिटी सरकार की

एस एन वर्मा - 2011-08-18 15:21 UTC
नई दिल्ली: सरकार तथा कांग्रेस पार्टी की ओर से टीम अन्ना के खिलाफ मोर्चा संभाल रहे सांसदों व केंद्रीय मंत्रियों की राजनीतिज्ञ अपरिपक्वता के कारण अन्ना को इतनी देर से अनशन की इजाजत अपने शर्तों पर मिली। सरकार तथा पार्टी की किरीकिरी करा चुकने के बाद सांसद मणीष तिवारी,केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आगे कर दियां । प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह का संसद में दिया गया बयान भी असरकारक नहीं रहा जिस कारण पूरा विपक्ष सरकार के खिलाफ एक जुट हो कर उस पर हल्ला बोल दिया।

अकाली दल नए सहयोगी की खोज में

भाजपा शहरी मतदाताओं का समर्थन खो रही है
बी के चम - 2011-08-18 12:57 UTC
चंडीगढ़ः पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। अकाली दल और कांग्रेस के बीच शह और मात का खेल शुरू हो गया है और इसके लिए गोटियां सेट की जा रही हैं। सत्तारूढ़ अकाली दल के साथ भाजपा का साथ बना हुआ है। वह अगले चुनाव में भी अकाली दल की सहयोगी रहेगी, लेकिल दल को लग रहा है कि भाजपा का साथ उसे फिर से चुनाव मे जीत दिलाने में समर्थ नहीं है। इसलिए दल उसे साथ रखते हुए नए साथी की खोज में लगा हुआ है।

यह तो भ्रष्टाचार के खिलाफ एक राष्ट्रीय आंदोलन है

संसद की आड़ लेकर इसे कुचला नहीं जा सकता
उपेन्द्र प्रसाद - 2011-08-17 12:17 UTC
भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे राष्ट्रव्यापी आंदोलन पर केन्द्र सरकार ने जा रवैया अपना रखा है, वह निंदनीय ही नहीं, गैरजिम्मेदाराना और खुद सरकार के लिए आत्मघाती भी है। सरकार इस आंदोलन को अन्ना का आंदेालन समझती है, जबकि यह अन्ना का आंदोलन नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का आंदोलन है। इसे हम भ्रष्टाचार के खिलाफ एक राष्ट्रीय आंदोलन कह सकते हैं। अन्ना हजारे इस राष्ट्रीय आंदोलन का वैयक्तिक प्रतीक बन गए हैं।

यूडीएफ सरकार पर खतरा बढ़ा

ओमन चांडी पर पामोलिन घोटाले का साया
पी श्रीकुमारन - 2011-08-16 17:23 UTC
तिरुअनंतपुरमः निगरानी अदालत द्वारा पामोलिन घोटाले में मुख्यमंत्री ओमन चांडी की भूमिका की जांच के आदेश दिए जाने के बाद यूडीएफ सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गौरतलब है कि इस घोटाले के कारण ही सीवीसी थामस को अपना पद छोड़ना पड़ा था और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उनकी नियुक्ति के लिए भारी फजीहत का सामना करना पड़ा था।

अन्ना प्रकरण: सोनिया के न होने से देर से हुआ अहम फैसला

एस एन वर्मा - 2011-08-16 14:06 UTC
नई दिल्ली। सोनिया की अनुपस्थिति के कारण कांग्रेस पार्टी और सरकार काफी फजीहत के बाद अन्ना प्रकरण पर बमुश्किल फैसला ले सकी, जो निर्विवाद भी नहीं रहा। दिनभर बैठकों और बयानों का दौर चलता रहा। जिसमे काफी समय नष्ट हो गया। विपक्ष ने सरकार को संसद में कटघरे में खड़ा कर उस पर आरोपों की झड़ी लगा दी। संसद के दोनों सदनों में विपक्षी दलों ने इसी मुद्दे पर कार्यवाही नहीं चलने दी। इन दलों ने हज़ारे की गिरफ्तारी को ‘लोकतंत्र की हत्या‘ करार दिया और कहा कि यह आपातकाल के दिनों की वापसी है। इंडिया अगेंस्ट करप्शन के कार्यकर्ता पूरे जोर-शोर के साथ अपनी मांगों को लेकर आम जनता को उद्वेलित करने में सफल रहे।

भ्रष्टाचार के मसले पर कांग्रेस गहरे संकट में

शीला दीक्षित के मामले मे दोहरा मानदंड क्यों?
कल्याणी शंकर - 2011-08-12 13:20 UTC
कांग्रेस अब केन्द्र में ही नहीं, बल्कि कुछ राज्यो में भ्रष्टाचार के मसले पर अपने आपको फंसा हुआ पा रही है। उसकी दिल्ली और केरल की सरकारें भ्रष्टाचार के मसले पर सीधें विपक्ष के निशाने पर आ गई हैं। वह दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार और केरल की ओमान चांडी की सरकार को बचाने के लिए काफी पसीने बहा रही है, लेकिन विपक्ष उन दोनों राज्यों में उसे पानी पीने तक की मोहलत नहीं दे रहा है।

ममता ने अनेक आयोग और समितियों का गठन किया

काम तो शायद ही किसी ने शुरू किया है
आशीष बिश्वास - 2011-08-11 13:00 UTC
कोलकाताः क्या ममता बनर्जी अपने सलाहकारों की सुनती भी है? सच तो यह है कि उनके अधिकांश सलाहकारों का काम ममता की बातो को सुनने का काम करते हैं। मुख्यमंत्री से नजदीकी बनाने के लिए वे उनकी हां में हां मिलते हैं और अपनी तरफ से किसी प्रकार की सलाह देने में भय खाते हैं।

राहुल गांधी अब एक बड़ी भूमिका में

उनकी विचाराधारा को लेकर अभी भी है भ्रम
अमूल्य गांगुली - 2011-08-10 12:21 UTC
राष्ट्रीय सलाहकार समिति का संविधान में कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद आज इसका अस्तित्व है और सोनिया गांधी इस समिति की अध्यक्ष हैं। इसी तर्ज पर सुश्री गांधी ने कांग्रेस के अंदर एक 4 सदस्यों का पैनल बना दिया हे, जिसका कांग्रेस के संविधान में कोई उल्लेख नहीं है। इस पैनल में उनके पुत्र राहुल गांधी के अतिरिक्त ए के एंटोनी, अहमद पटेल और जनार्दन द्विवेदी शामिल हैं।
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