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लोकपाल बिल के लिए संयुक्त पैनल: एक नई परंपरा की शुरुआत

कल्याणी शंकर - 2011-04-15 09:42 UTC
अन्ना हजारे की भूख हड़ताल ने वह कर दिखाया, जो पहले कभी नहीं हुआ था। पहली बार किसी बिल को बनाने के लिए केन्द्र सरकार ने मंत्रियों के साथ नागरिक समाज के 5 सदस्यों को भी पैनल में शामिल किया है। ऐसा इसलिए हो सका कि केन्द्र सरकार अन्ना हजारे की भूख हड़ताल से डर गई थी। उन्होंने यह भूख हड़ताल वैसे समय में की, जब पूरा देश भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलित है।

अन्ना हजारे की सफलता से राजनेता बेचैन

क्या वे प्रभावी लोकपाल कानून बनने देंगे?
उपेन्द्र प्रसाद - 2011-04-13 10:15 UTC
अन्ना हजारे के आमरण अनशन पर बैठने का फैसला रंग लाया और केन्द्र सरकार को उनकी शुरुआती मांगों के सामने झुकना पड़ा। जब वे अनशन पर थे, तो पूरे देश मंे तूफान मचा हुआ था। खुद अन्ना को उम्मीद नहीं थी कि उनके अनशन से पूरा देश उस तरह आंदोलित हो जाएगा और 4 दिनों के अंदर ही केन्द्र का सत्ता प्रतिष्ठान हिल जाएगा। पर उनकी इस शुरुआती सफलता से राजनैतिक दलों के नेताओं में बेचैनी भी छा गई है। उस बेचैनी का ही नतीजा है कि लोकपाल विधेयक तैयार करने के लिए बने पैनल के एक सदस्य कपिल सिबल बेसिर पैर की बातें कर रहे हैं कि लोकपाल कानून से गरीब बच्चों को शिक्षा नहीं मिल जाएगी और गरीब मरीजों का अस्पतालों में मुफ्त इलाज नहीं हो जाएगी।
भारत

केरल विधानसभा चुनाव में कांटे की टक्कर

पी श्रीकुमारन - 2011-04-12 10:17 UTC
तिरुअनंतपुरमः 13 अप्रैल को हो रहे मतदान में दक्षिण भारत के इस राज्य में कांटे की टक्कर हो रही है और यह कहना मुश्किल है कि जीत किस मोर्चे की होगी। पिछले अनेक चुनावों में टक्कर सीपीएम के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मार्चे के बीच होती रही है। बारी बारी से दोनों जीतते रहे हैं। इस परंपरा के लिहाज से इस बार जीत कांग्रेस के नेतृत्व वाले मोर्चे की होनी चाहिए। 2009 में हुए लोकसभा चुनाव और 2010 में हुए स्थानीय निकायों के चुनाव में भी जीत कांग्रेसी मोर्चे की ही हुई थी। इसके कारण भी कांग्रेस के नेतृत्व वाले मोर्चे की जीत पक्की मानी जा रही थी।

सपा नेता अखिलेश यादव की हजारे से अपील

वे करें माया सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व
प्रदीप कपूर - 2011-04-12 10:12 UTC
लखनऊः समाजवादी पार्टी चाहती है कि उत्तर प्रदेश में मायावती सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व अन्ना हजारे करें।


भारत

जनसँख्या वृद्धि की समस्या और जनसँख्या वृद्धि दर पर लगाम में असफलता

डा. अतुल कुमार - 2011-04-11 19:07 UTC
राजनेता केवल गद्दीनशीं होने के लिए जानना चाहते हैं कहाँ कितनी संख्या में कौन से लोग रहते हैं और किस भाषण या झूठे वादे से उनसे वोट खीचें जा सकते हैं। वहीं सौकड़ों शोधकत्र्ताओं और दार्शनिको ने जनसँख्या वृद्धि के कारणों के बारे में अपने दृष्टिकोण दिये हैं जैसे कि निरक्षरता, मनोरंज़न के साधनों का अभाव, दृढ इच्छा-शक्ति का न होना, परिवार-नियोज़न के साधनों के बारे में चेतना का अभाव प्रमुख कारण है। समाज को इसके नियंत्रण पर जागरूक होना होगा। अब हर देशवासी को अपनी जिम्मेदारी को समझना होगा और जनसंख्या नियंत्रण में सहयोग देना होगा।

समाजवादी पार्टी ने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की

बसपा और भाजपा इस मामले में पिछड़ गई
प्रदीप कपूर - 2011-04-11 19:01 UTC
लखनऊः विधानसभा आमचुनाव अभी दूर है, पर समाजवादी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। उसकी पहली सूची में 165 उम्मीदवार हैं। इस तरह से समाजवादी पार्टी और उसके प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्य में अपनी प्रतिद्वंद्वी बसपा, भाजपा, कांग्रेस और रालोद पर इस मायने में अपनी बढ़त हासिल कर ली है।
भारत

अन्ना की भूख हड़ताल के सबक

भ्रष्टाचार को हल्के ढग से न ले सरकार
उपेन्द्र प्रसाद - 2011-04-10 18:18 UTC
अन्ना हजारे के आमरण अनशन के दौरान देश भर में भ्रष्टाचार के खिलाफ जिस तरह से तेज आंदोलन हुए, उसे देखकर कम से कम अब तो केन्द्र सरकार और खासकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की नींद टूट जानी चाहिए। केन्द्र सरकार ने अन्ना की शुरुआती मांगों को स्वीकार कर लिया है, लेकिन मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है।
भारत

पुदुचेरी में कांग्रेस- डीएमके गठबंधन को बढ़त हासिल

अन्ना डीएमके का अभियान तेज होना अभी भी बाकी
कल्याणी शंकर - 2011-04-08 12:09 UTC
तमिलनाडु के पास स्थित पुदुचेरी में हो रहे विधानसभा चुनाव को राष्ट्रीय मीडिया में बहुत कम जगह मिल रही है। देश के 4 राज्यों की विधानसभाओं के साथ इस केन्द्र शासित प्रदेश में भी विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं। यहां की राजनीति तमिलनाडु की राजनीति से मिलती जुलती है। पास साल पहले हुआ विधानसभा के चुनाव के बाद कांग्रेस की सरकार बनी थी।
भारत

अन्ना का आमरण अनशन कांग्रेस के लिए बना टेंशन

13 मई तक समिति का गठन, विधेयक मेश होगा मानसून सत्र में
एस एन वर्मा - 2011-04-08 11:54 UTC
नई दिल्ली। लोकपाल बिल के मसौदा को तैयार करने के लिए बनाई जाने वाली संयुक्त समिति कि गठन को लेकर सरकार और अन्ना हजारे के रुख से जनता सांसत में है। अन्ना भूख हड़ताल पर हैं और राजनीतिक दल विधानसभा चुनाव प्रचार पर।भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता जागने लगी है।
भारत

अन्ना हजारे का आंदोलन

मनमोहन सिंह को साहस दिखाना चाहिए
उपेन्द्र प्रसाद - 2011-04-07 20:21 UTC
भ्रष्ट नहीं होना एक बात है और भ्रष्टाचार का विरोधी होना दूसरी बात है। भ्रष्टाचार के मसले पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जो रवैया अपना रखा है उससे यही लगता है कि खुद भ्रष्ट नहीं होते हुए भी वे भ्रष्टाचार के विरोधी नहीं हैं। अन्यथा क्या कारण है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कानून बनाने के अन्ना हजारे के प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख नहीं दिखा रहे हैं? पिछले 5 अप्रैल को आमरण अनशन पर श्री हजारे एकाएक दिल्ली आकर बैठ नहीं गए, बल्कि उन्होंने उसके पहले प्रधानमंत्री को सार्थक लोकपाल विधेयक तैयार करने की कई बार अपील की, पर हमेशा उन्होंने अन्ना को निराश किया। अंत में अन्ना को अनशन का गांधीवादी रास्ता अख्तियार करना पड़ा।