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आदर्शीकरण

आदर्शीकरण एक प्रक्रिया है जिसके तहत मनुष्य स्वयं को मूल्यहीन जीवन से आदर्श जीवन की ओर पवृत्त करता है, तथा अन्य को भी प्रवृत्त करता है। ऐसा वह इसलिए करता है क्योंकि वर्तमान जीवन दशा से वह संतुष्ट नहीं रहता।

ऐसा मानसिक स्तर पर भी हो सकता है और तब व्यक्ति अपने परिकल्पित आदर्शों में रुचि लेने लगता है। कला और साहित्य के क्षेत्र में इसका प्रकटीकरण प्रमुखता से हुआ है तथा रचनाकार सर्जन का सहारा लेता है तथा वास्तविक दुखदायी जगत से ऊपर उठकर आदर्श जगत् का सृजन कर उसमें आनन्द विभोर हो जाता है।

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आदर्शोन्मुख यथार्थवाद, आदिकाल, आद्यतत्व, आद्याशक्ति, आधिकारिक वस्तु, आधुनिक काल

Page last modified on Monday June 26, 2023 06:47:16 GMT-0000