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कंकालदंड

योग में मेरुदण्ड को कंकालदंड कहा जाता है।

श्री समम्पुट तंत्र के अनुसार यही कंकालदंड गिरिराज सुमेरु है। उसके अनुसार इसी गिरिराज के कन्दर-कुहर में नैरात्य धातु जगत की उत्पत्ति होती है। इसी के कुहर में पद्म अवस्थित है। बोधिचित्त के पतित होने पर इसमें कालाग्नि का प्रवेश होता है तथा सिद्धि बाधित हो जाती है।

योगियों में मान्यता है कि बोधिचित्त, जिसे शुक्र या बिन्दु भी कहते हैं, अधोगामी होकर पतित होने पर और स्कन्धविधान के मूर्छित होने पर सिद्धि मिल ही नहीं सकती।

योग में इसी कारण शुक्र सिद्धि को अत्यन्त महत्वपूर्ण माना गया है।

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Page last modified on Monday June 26, 2023 08:33:28 GMT-0000