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कैल्शियम

कैल्शियम एक रासायनिक तत्व है। स्वास्थ्य के लिए यह अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

अगर स्वस्थ हड्डियों के मालिक बनना चाहते हैं तो याद रखें इसके लिए जरूरी है कि आपके शरीर में पर्याप्त कैल्शियम हो क्योंकि जब शरीर में पर्याप्त कैल्शियम होती है तो वह आपके चेहरे पर झलकती है अंदरूनी मजबूती के तौर पर। शरीर में लगातार पर्याप्त कैल्शियम का बना रहना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि आपका शरीर रोज ही कैल्शियम गँवाता है-त्वचा, नाखूनों, बालों और मल के जरिए। इस खोए हुए कैल्शियम की रोज ही पूर्ति कर ली जाए तो अच्छा रहता है, लेकिन यह भी याद रखें कि यह आपूर्ति कृत्रिम तरीके से नहीं होनी चाहिए बल्कि इसकी आपूर्ति हमेशा आहार के जरिए ही होनी चाहिए।

अगर ऐसा नहीं होगा तो आपका शरीर आपकी हड्डियों से कैल्शियम लेने लगेगा। नतीजा यह निकलेगा कि आप बाहर से भले कमजोर न दिखें लेकिन अंदर ही अंदर आपकी हड्डियाँ खोखली हो जाएँगी और शरीर कमजोर। कमजोर हड्डियाँ कई तरह की शारीरिक परेशानियों का घर हैं। अगर हड्डियाँ कमजोर हो जाएँगी तो जरा-सी चोट लगने पर आपको फ्रेक्चर भी हो सकता है। दिक्कत यह है कि जानें कैसे कि शरीर में कैल्शियम की कमी है और इसे पूरा किया जाना चाहिए। मुश्किल नहीं है, अगर शरीर में इस तरह के लक्षण दिखें:-

हड्डियों में दर्द हो रहा हो: नाखून कमजोर हों, जरा-सी चोट पर फट जाते हों, भूरे और रुखे हों, बहुत धीमी रफ्तार से बढ़ते हों और टूटकर उल्टी दिशा में मुड़ जाते हों तो समझना चाहिए कि शरीर में कैल्शियम की कमी है।

दिनभर आप थकान महसूस करते हों। तो समझ लेना चाहिए कि शरीर में कैल्शियम की कमी है। लेकिन यह फैसला खुद ही न कर लें। डॉक्टर की भी जरूरत बनी रहने दें और तुरंत मेडिकल चेकअप के लिए जाएँ।

ध्यान रहे, अगर कैल्शियम की कमी है तोः- बच्चों में रिकिट्स हो सकता है यानी हड्डी मुड़ जाएगी, जोड़ असामान्य हो जाएँगे और आसानी से फ्रेक्चर भी हो सकता है। अधेड़ उम्र के लोगों में ऑस्टियोमेलेसिया हो सकता है यानी स्ट्रेस, फ्रेक्चर और हड्डियों में दर्द।

वरिष्ठ नागरिकों में ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है यानी हड्डियों की आम कमजोरी के अलावा रीढ़ की हड्डी, कलाई या कूल्हों में फ्रेक्चर हो सकता है।

महिलाओं के लिए तो और भी दिक्कतें होती हैं। चाहे मासिक चक्र हो, प्रेग्नेंसी हो या रजोनिवृत्ति सभी में अतिरिक्त कैल्शियम की जरूरत होती है। रजोनिवृत्ति के बाद तो हड्डियाँ तेजी से कमजोर होने लगती हैं, क्योंकि हड्डी की सेहत के लिए जिम्मेदार हार्मोन-एस्ट्रोजिन व प्रोजेस्ट्रोन का उत्पादन बंद हो जाता है।

बहरहाल, जीवनभर आपकी हड्डियों की सेहत कैसी रहेगी यह इस बात पर निर्भर करता है कि किशोरावस्था में इस संदर्भ में क्या ख्याल रखा गया था। विकास के उस चरण में शरीर को पर्याप्त कैल्शियम मिलना चाहिए। शरीर कैल्शियम को सही हजम कर सके, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी भी मिलना चाहिए, जो कि सूरज से हासिल होता है। लेकिन तीव्र धूप से बचें। विशेषज्ञों का कहना है कि आहार में कैल्शियम सप्लीमेंट शामिल करने से पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य ले लें।

अस्वस्थ हड्डियों के कुछ और भी कारण हो सकते हैं - खराब जीवनशैली यानी जिसमें कोई व्यायाम ही न हो। अगर आप आरामतलब या आलसभरी जीवनशैली के शिकार हैं। खाने की अस्वस्थ आदतें। अधिक सॉफ्ट ड्रिंक का प्रयोग करना।

क्या करें-अगर आपका दिनभर बैठने का काम है तो सुबह या शाम अपने पास के पार्क में घूमने के लिए जाएँ। किसी जिस्मानी गतिविधि में शामिल हों जैसे जॉगिंग, स्वीमिंग, योग, बैडमिंटन।

खाने की खराब आदतों को छोड़ें। सोडा की जगह दूध पिएँ। स्वस्थ व संतुलित आहार लें जिसमें विटामिन डी भी हो ताकि कैल्शियम हजम करने में मदद मिल सके। अगर पथरी होने की आनुवांशिक शिकायत है तो यह सुनिश्चित कर लें कि आप खूब पानी पिएँ। अगर आप अधिक कैल्शियम लेते हैं और पर्याप्त पानी नहीं पीते तो पेशाब में कैल्शियम जमा हो जाता है और पथरी बनने लगती है।

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Page last modified on Monday June 26, 2023 14:54:57 GMT-0000