संकट में है भारत का संविधान
शिक्षा व्यवस्था भी बिखरती जा रही है
2022-01-22 10:42
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भारत इस सदी की आज तक की सबसे भयानक त्रासदी से गुजर रहा है। महामारी के भयानक साये में जहां लाखों जानें जा रही हैं, वहीं हमारा जनतांत्रिक समाज भी चुनौतियों से गुजर रहा है। हमारी डेमोक्रसी जिस नींव पर खड़ी है, वह है हमारा संविधान, जो आज सम्मान की जगह व्यंगों का शिकार है। इसकी प्रस्तावना, इसकी धाराएं आज उपहास के दर्द से गुजर रही है। व्यर्थता की कगार पर आज यह आ चुका है, जहां जनता की आवाज, उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी दॉंव पर लगी है। भूख की आह, जीविका की कमी, और अंत में जीवन सभी हाशिये पर हैं। लोगों की पहचान सिर्फ संप्रदाय, जाति और लिंग के आधार पर होती है इसमें प्रत्येक अपनी विभाजनकारी भूमिका में आज सक्रिय है। समाज टुकड़ों में है और हमारी बहुलता आज खतरे में है। सारे इलाके बंटे हुए हैं, रिहायशी क्षेत्र बंटे हुए हैं, हर घर एक गहरे दर्द से गुजर रहा है, क्योंकि लोग वहां इंसान की तरह नहीं, बल्कि महिला और पुरूष के रूप में रहते हैं, दोनों की जगह बंटी हुई है, आजादी की सीमा भी निश्चित कर दी गई है। इंसान में इंसानियत होना अब एक पुरानी धारणा है।