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सुशांत राजपूत की मौत

क्या प्रतिभाओं की कब्रगाह बनी हुई है बॉलीवुड?
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-06-16 09:40 UTC
अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या से देश उद्वेलित है। 34 वर्ष के सुशांत को एक सफल कलाकार माना जा रहा है, जिन्होंने 10 साल के संघर्ष से अपना मुकाम हासिल कर लिया था। धोनी की भूमिका करके उन्होंने बहुत सराहना पाई थी और छिछोरे फिल्म में भी अपने अभिनय की धाक जमाई थी। उनके पास पैसा था, शोहरत थी और भी बहुत चीजें थीं, जो एक सफल व्यक्ति के पास होता है। इन सबके बावजूद उन्होंने आत्महत्या कर ली। यह आत्महत्या भी उन्हांने एकाएक आवेश में आकर नहीं की, बल्कि 6 महीने के मानसिक अवसाद के बाद यह किया।

मोदी को निर्णय लेने में सावधानी बरतनी चाहिए

कोविड संक्रमण पर सफलता की शुरुआती उत्तेजना गलत साबित हुई
के रवीन्द्रन - 2020-06-15 12:19 UTC
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र की नियति को प्रभावित करने वाले फैसले लेने में अपना मनमानापन दिखाया। यह सच है कि उन्होंने इस तरह की विचारहीन कार्रवाई से अपने प्रधानमंत्रित्व को दांव पर लगा दिया है, लेकिन यह उस कीमत की तुलना में नगण्य है जो देश को भुगतना पड़ रहा है।

चौहान के ऑडियो क्लिप ने कांग्रेस को एक बड़ा हथियार दिया

इसका इस्तेमाल विधानसभा के उपचुनावों में खूब होगा
एल एस हरदेनिया - 2020-06-13 10:18 UTC
भोपालः सीएम शिवराज सिंह चौहान की एक कथित ऑडियो क्लिप वायरल होने के एक दिन बाद, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा कि ‘‘भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने फैसला किया था कि राज्य में कांग्रेस की सरकार गिरनी ही चाहिए’’ मुख्यमंत्री ने गुरुवार को ट्वीट किया कि यह एक महान काम है। पापियों को नष्ट करने का कार्य। मध्य प्रदेश में चौहान ने कांग्रेस को बहुत ही संवेदनशील प्रचार हथियार मुहैया कराया है। विधानसभा के 24 उपचुनावों में कांग्रेस प्रभावी रूप से इसका इस्तेमाल करेगी।

प्रवासी मजदूरों की दुर्गती की याद देश में लंबे समय तक बनी रहेगी

केन्द्र द्वारा उनके बारे में सोचे बिना लाॅकडाउन करना उनकी दुर्दशा का सबब बना
अंजन रॉय - 2020-06-12 08:46 UTC
जब तक वायरस के प्रसार से लड़ने के लिए राष्ट्रव्यापी तालाबंदी नहीं की गई, तब तक भारत ने प्रवासी श्रमिकों और अर्थव्यवस्था के इंजन को चलाने में उनकी भूमिका पर कोई ध्यान नहीं दिया। इन असहाय लोगों का संकट अर्थव्यवस्था के कामकाज में गहरी अंतर्दृष्टि देता है।

मंदिर खोले जाने पर विवाद

सबरीमाला जैसी गलती सरकार नहीं दुहराए
पी श्रीकुमारन - 2020-06-11 09:49 UTC
तिरुअनंतपुरमः केरल सरकार द्वारा राज्य में मंदिरों को खोलने के निर्णय ने एक विवाद को जन्म दिया है। वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार का कदम केंद्र के निर्देश के मद्देनजर आया है कि पूजा स्थल 8 जून से खोले जा सकते हैं।

शिवराज सिंह चौहान के चौंकाने वाले फैसले

राज्य सभा चुनाव का मामला अदालत में जाएगा
एल एस हरदेनिया - 2020-06-09 10:19 UTC
भोपालः शिवराज सिंह चौहान सरकार के दो फैसले चौंकाने वाले हैं। एक निर्णय उस समय के आईएएस अधिकारियों के स्थानान्तरण से संबंधित है जब राज्य को कोरोना संकट का सामना करना पड़ रहा है। जिन आईएएस अधिकारियों का तबादला किया गया है, उनमें कमिश्नर, इंदौर संभाग और भोपाल नगर निगम के आयुक्त भी शामिल हैं। इनमें कुछ जिलों के कलेक्टर भी शामिल हैं।

बिहार की दिलचस्प होती राजनीति

भाजपा नीतीश का साथ छोड़ने की हिम्मत नहीं जुटा सकती
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-06-08 10:23 UTC
बिहार विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ रहा है और आगामी नवंबर में नई विधानसभा के चुनाव होने की संभावना है। हम इसे संभावना इसलिए कह रहे हैं कि उस चुनाव पर मौजूदा कोरोना संकट ने सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। कोरोना संकट बद से बदतर होता जा रहा है और कुछ कहा नहीं जा सकता कि अगले दो से तीन महीने में इसकी क्या स्थिति होगी। केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों के पास इस संकट से जूझने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, इसलिए उन्होंने लंबे समय तक देश को लाॅकडाउन की स्थिति में रखा, हालांकि उसके कारण लाखों करोड़ रूपये की आर्थिक क्षति हुई। क्षति के बावजूद कोरोना का चेन तोड़ने में हम सफल नहीं हो पाए हैं। अब लाॅकडाउन में भी बहुत ढील दी जा चुकी है, जिसके कारण कोरोना के मरीजों की संख्या और भी तेजी से बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

पश्चिमी देशों में नवउदारवाद के खिलाफ आवाज उठ रही है

पर मोदी सरकार बदलने के मूड में नहीं दिख रही
प्रभात पटनायक - 2020-06-02 09:35 UTC
लंदन का फाइनेंशियल टाइम्स दुनिया के सबसे ‘सम्मानजनक’ बुर्जुआ समाचार पत्रों में से एक है। यह अखबार अब कुछ ऐसा कहने लगा है जिसे वामपंथी काफी समय से कहते आ रहे हैं। 3 अप्रैल, 2020 को एक संपादकीय में, इसने लिखा, “पिछले चार दशकों की प्रचलित नीति दिशा को अब उलटना होगा। सरकारों को अर्थव्यवस्था में अधिक सक्रिय भूमिका स्वीकार करनी होगी। उन्हें सार्वजनिक सेवाओं को देयताओं के बजाय निवेश के रूप में देखना चाहिए और श्रम बाजार को कम असुरक्षित बनाने के तरीकों की तलाश करनी चाहिए।’’

सरकारी उपेक्षा से हुई मौतों के विरोध में पूरे देश में आज मनाया राष्ट्रीय शोक दिवस

लॉकडाउन से प्रभावित लोगों के मसले पर सरकार की जवाबदेही की मांग
राजु कुमार - 2020-06-01 13:53 UTC
कोविड 19 के कारण प्रभावित करोड़ों मजदूरों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के जीवन और आजीविका पर संकट गहरा गया है। लॉकडाउन से प्रभावित ऐसे लोगों के जीवन एवं आजीविका के प्रति सरकारें पूरी तरह अपनी जवाबदेही लेने को तैयार नहीं है। लोग रोजी-रोटी के अभाव में गरिमापूर्ण जीवन से वंचित होते जा रहे हैं। करोड़ों लोगों के जीवन व आजीविका पर संकट और सरकारी उपेक्षा से सैकड़ों लोगों की असमय मौत दुखदायी है।

दुनिया भर की संसद मुखर हैं, भारत की संसद मौन क्यों

अनिल जैन - 2020-06-01 10:00 UTC
इंटरनेशनल पार्लियामेंट्री यूनियन (आईपीयू) एक ऐसी वैश्विक संस्था है जो दुनिया भर के देशों की संसदों के बीच संवाद और समन्वय का एक मंच है। कोरोना महामारी के इस वैश्विक संकटकाल में दुनिया के तमाम छोटे-बडे देशों की संसदीय गतिविधियों का ब्योरा इस संस्था की वेबसाइट पर उपलब्ध है। मगर दुनिया के सबसे बडे़ लोकतंत्र यानी भारत की संसदीय गतिविधि का कोई ब्योरा वहां नहीं है। जाहिर है कि इस कोरोना काल में भारत की संसद बिल्कुल निष्क्रिय रही है और अभी भी उसके सक्रिय होने के कोई आसार नहीं हैं।