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कोरोना की ‘नई लहर’

कितनी हकीकत, कितना अफसाना?
अनिल जैन - 2021-03-05 11:02 UTC
भारत में एक बार फिर कोरोना ने मीडिया की सुर्खियां बटोरनी शुरू कर दी है। अखबारों के पहले पन्नों पर हेडलाइन बन रही है। खबरों के नाम पर सरकारी प्रोपेगेंडा फैलाने वाले टेलीविजन चौनलों पर ब्रेकिंग न्यूज दिखाई जा रही है। बताया जा रहा है कि भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है। कोई इसे कोरोना की दूसरी लहर बता रहा है तो कोई तीसरी लहर। पहली लहर कब खत्म हुई, यह किसी को नहीं मालूम- न तो सरकार को और न मीडिया को। इसीलिए कोई नहीं बता रहा है कि पहली लहर कब थमी थी या खत्म हुई थी।

मध्यप्रदेश के बजट में किसानों को राहत नहीं

सरकार भारी वित्तीय संकट की चपेट में
एल एस हरदेनिया - 2021-03-04 09:46 UTC
भोपालः ‘कोई नया कर नहीं, कोई राहत नहीं’, इस शीर्षक के साथ अधिकांश अखबारों ने मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवडा द्वारा पेश किए गए बजट की खबरें प्रकाशित कीं। पेट्रोल और डीजल पर वैट में राहत को लेकर जनता की उम्मीदों के विपरीत, उन्होंने 2,41,375 करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जिसमें बजट घाटा 52,266 करोड़ रु है।

बीपीएफ एनडीए छोड़ महागठबंधन में शामिल

असम में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ीं
सागरनील सिन्हा - 2021-03-03 10:30 UTC
बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को छोड़ दिया है। उसने स्पष्ट रूप से कहा है कि उसने बीजेपी के साथ अपने गठबंधन को नवीनीकृत नहीं किया। वैसे बीजेपी ने भी उसके साथ मिलकर चुनाव लड़ना बंद कर दिया था। पिछले काउंसित चुनावों में बीजेपी ने यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) के साथ गठबंधन किया था। उसके कारण बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद में बीपीएफ की हार हो गई थी। ऐसा पिछले 15 सालों में पहली बार हुआ। वैसे बीपीएफ 40 सीटों वाली परिषद में 17 सीटें पाकर नंबर वन पार्टी बनी रही, पर उसने सत्ता खो दी, क्योंकि यूपीपीएल- बीजेपी गठबंधन को 21 सीटें हासिल हो गई थीं।

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव

देश के राजनैतिक भविष्य के लिए ये निर्णायक होंगे
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-03-02 09:47 UTC
पांच राज्यों में हो रहे चुनाव न केवल उन राज्यों की सरकारों का गठन करेंगे, बल्कि वह देश के राजनैतिक भविष्य के भी नियंता होंगे। इसका कारण यह है कि वे चुनाव इतिहास के एक बहुत ही महत्वपूर्ण मोड़ पर हो रहे हैं। केन्द्र की सरकार अंधाधुध सार्वजनिक संपत्तियों को ही नहीं बेच रही है, बल्कि उसने ऐसी नीतियां अपनानी शुरू की हैं, जिनसे निजी संपत्तियों का केन्द्रीकरण भी कुछ निजी हाथों में ही होता चला जाएगा और देश में भयंकर आर्थिक विषमता का राज हो जाएगा। इस तरह का राज लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक होगा। इसके कारण देश के लोकतंत्र के समाप्त हो जाने या सिर्फ नाममात्र के रह जाने का खतरा है।

पांच राज्यों के चुनाव कार्यक्रम

यह चुनाव आयोग है या सरकार का रसोईघर?
अनिल जैन - 2021-03-01 09:37 UTC
चुनाव आयोग ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनाव का जो कार्यक्रम घोषित किया है, उससे एक बार फिर जाहिर हुआ है कि केंद्र सरकार ने अन्य संवैधानिक संस्थाओं की तरह चुनाव आयोग की स्वायत्तता का भी अपहरण कर लिया है। चुनाव आयोग पिछले लंबे समय से सरकार का रसोईघर बना हुआ है और उसमें मुख्य चुनाव आयुक्त रसोइए की भूमिका निभाते हुए वही पकाते हैं जो केंद्र सरकार और सत्ताधारी पार्टी चाहती है। इसलिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तथा अन्य विपक्षी नेताओं का घोषित हुए चुनाव कार्यक्रम पर बिफरना चुनाव आयोग की नीयत पर सवाल उठाना स्वाभाविक ही हैं।

सरकार के आर्थिक दर्शन में ही छिपा है महंगे डीजल-पेट्रोल का राज

कोविड काल में जो मालामाल हो रहे हैं, उनपर टैक्स बढ़ाना बेहतर विकल्प था
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-02-27 10:23 UTC
पेट्रोल और डीजल लगातार महंगे होते जा रहे हैं। आने वाले समय में इसे और बढ़ने की संभावना है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल और भी महंगा हो सकता है। कोविड के कारण कच्चे तेल की बढ़ रही कीमतें थम गई थीं। थम क्या गई थीं, उनमें और गिरावट आ गई थी, लेकिन विश्वव्यवापी टीकाकरण के कारण कोरोना का विश्वव्यापी प्रकोप कम होगा और आर्थिक गतिविधियां फिर से रफ्तार पकड़ेंगी। आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार पेट्रोल, डीजल व अन्य प्रकार के इंधन ही देते हैं। जाहिर है, विश्व बाजार में डीजल व पेट्रोल की मांग बढ़ेगी और उसके साथ कच्चे तेल की कीमतें भी।

मोदी सरकार का निजीकरण अभियान सार्वजनिक संपत्तियों की लूट है

आत्मनिर्भरता के नाम पर देश को बेचा जा रहा है
प्रकाश कारत - 2021-02-26 12:01 UTC
केंद्रीय बजट में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के निजीकरण नीति की घोषणा को कॉर्पोरेट मीडिया और अर्थशास्त्रियों द्वारा सही बताया गया है। ‘मोदी बदल गए हैं’, ‘असाधारण रूप से बोल्ड’ और ‘अंतिम रूप से वास्तविक सुधार’, इन मंडलियों की कुछ टिप्पणियां थीं।

निषाद समुदाय को जीतने की प्रियंका की कोशिश

अन्य पार्टियां भी उन्हें लुभाने में लगीं
प्रदीप कपूर - 2021-02-25 09:54 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए पिछड़ी जाति निषाद समुदाय पर जीत हासिल करने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी की महासचिव प्रियंका गांधी गंभीर प्रयास कर रही हैं।

श्री लंका के राष्ट्रपति गोतबाया स्वतंत्र नीति पर चलने की कोशिश कर रहे हैं

भारत को चीन से संबंधित उनके कदमों पर ध्यान रखना होगा
बरुण दास गुप्ता - 2021-02-24 09:50 UTC
गोतबाया राजपक्षे के कार्यकाल में भारत- श्रीलंका संबंधों का की निगेहवानी दिलचस्प होगी। यह याद किया जा सकता है कि जब नवंबर 2019 में गोतबाया श्रीलंका के राष्ट्रपति बने थे, तब साउथ ब्लॉक में बेचैनी थी। वे और उनके भाई महिंद्रा (पूर्व राष्ट्रपति और वर्तमान प्रधान मंत्री) दोनों ही चीन समर्थक झुकाव के लिए जाने जाते हैं। गोताबया ने पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना द्वारा किए गए लोकतंत्र समर्थक सुधारों को पूर्ववत करने और सरकार के राष्ट्रपति के रूप को पेश करने के अपने इरादे की घोषणा की थी । सिरीसेना श्रीलंका के संविधान में राष्ट्रपति को दी गई व्यापक शक्तियों को रोकना चाहते थे और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को प्रतिबंधित कर दिया था।

हिमालय में अनेक पनबिजली परियोजनाओं पर भूस्खलन के खतरे

भारत की पनबिजली क्षमता लगातार बढ़ रही है
नंतू बनर्जी - 2021-02-23 11:05 UTC
उत्तराखंड के जोशीमठ में हाल ही में हुए विनाशकारी ग्लेशियर के प्रकोप ने इस क्षेत्र की कम से कम चार पनबिजली परियोजनाओं सहित जीवन और संपत्ति को बड़ा नुकसान पहुंचाया है, लेकिन इससे देश की भारी क्षमता का दोहन करने के लिए सरकार और उद्योग की बोली धीमा होने की संभावना नहीं है। भारत 2022-23 के अंत तक 225 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। पनबिजली विद्युत परियोजनाओं से इस क्षमता में काफी योगदान होने की उम्मीद है। हालांकि, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) अधिक सतर्क होगा और नई बिजली परियोजनाओं को सख्ती से दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए कि हिमनद झील के प्रकोप के कारण होने वाली आपदाओं से कैसे निपटें।