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किसानों की नाराजगी ने नीतीश की हालत खराब कर दी

एमएसपी के कार्यान्वयन के लिए एक बाजार नियामक को स्थापित करने की आवश्यकता है
अशोक बी शर्मा - 2020-11-09 11:15 UTC
हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव में किसानों का मुद्दा सामने आया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2006 में राज्य कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) अधिनियम को वापस ले लिया था। राज्य के किसानों को इस कदम से कोई लाभ नहीं हुआ, बल्कि वे असहाय अवस्था में हैं और अपनी उपज को न्यूनतम रूप से बेचने में असमर्थ हैं। नीतीश ने एपीएमसी अधिनियम को निरस्त करते हुए, उस रणनीति की योजना बनाई होगी जिसके द्वारा किसान अपनी उपज बेंचमार्क कीमतों से नीचे बेच सकते हैं जो इस मामले में एमएसपी हैं। कुछ राज्यों ने अपने कानून में पर्याप्त प्रावधान किए बिना अपने एपीएमसी अधिनियमों के दायरे से फलों और सब्जियों को हटा दिया है, जिससे किसानों को बिक्री पर पर्याप्त लाभ मिल सकता है।

बिहार विधानसभा चुनाव: नीतीश रहेंगे या जाएंगे?

उपेन्द्र प्रसाद - 2020-11-07 10:26 UTC
बिहार विधानसभा चुनावों के लिए मतदान संपन्न हो गए और अगले 10 नवंबर को परिणाम भी सामने आ जाएंगे। चुनाव प्रचार के दौरान सभाओं में उमड़ी भीड़ को देखकर कोई भी कह सकता है कि तेजस्वी के नेतृत्व वाले कथित महागठबंधन की जीत होगी, लेकिन बिहार में ऐसे उदाहरण भी हैं कि सबसे ज्यादा भीड़ जुटाने वाली पार्टी हार भी गई थी। 2015 का विधानसभा चुनाव ही इसका सबसे ताजा उदाहरण है। उस साल हुए चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभा में सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती थी। लालू यादव और नीतीश की सभा में कम लोग आते थे और सभाएं छोटी छोटी ही हुआ करती थी। हिलसा विधानसभा क्षेत्र में तो लालू की सभा में अपने तय समय पर 100 भी लोग एक बार नहीं जुटे थे और लालू राजद प्रत्याशी को लताड़कर बिना भाषण दिए वहां से चले गए थे, लेकिन वहां भी जीत राजद की ही हुई थी। उस चुनाव में मोदी की सभा में भारी भीड़ जुटाने वाली भाजपा की करारी हार हुई थी।

मध्य प्रदेश के उपचुनाव नतीजों का देश की भावी राजनीति पर असर

‘ऑपरेशन कमल’ का भविष्य होगा तय
अनिल जैन - 2020-11-06 16:03 UTC
आमतौर पर किसी राज्य में विधानसभा सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव के नतीजे उसी राज्य की राजनीति के लिए ही महत्व रखते हैं, मगर मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों के लिए एक साथ हुए उपचुनाव के नतीजे इसका अपवाद होंगे। ये नतीजे चाहे जैसे भी रहे, देश की राजनीति में ऐतिहासिक और दूरगामी महत्व वाले होंगे। यह सही है कि इन उपचुनावों के नतीजों से राज्य की आठ महीने पुरानी भाजपा सरकार को बहुमत हासिल करना है, जिसमें उसे कोई मुश्किल नहीं आने वाली है। क्योंकि 230 सदस्यीय राज्य विधानसभा में उसे अपना अकेले का बहुमत कायम करने के लिए महज नौ सीटें जीतना है। हालांकि बहुजन समाज पार्टी के दो, समाजवादी पार्टी के एक और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी उसे पहले से ही हासिल है, इसलिए अगर वह नौ सीटों के बजाय दो-तीन सीटें भी जीत लेती है तो उसकी सरकार बची रहेगी।

भाजपा की उम्मीदों का ‘चिराग’ बुझा सकता है नीतीश का आरक्षण राग

भाजपा की मंशा समझ चुके हैं नीतीश
अनिल जैन - 2020-11-05 09:30 UTC
बिहार में पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचार अभियान चरम पर था। पहले दौर का मतदान होने तक आरक्षण मुद्दा कहीं भी चर्चा में नहीं था। लेकिन अचानक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन राव भागवत का बयान आया कि देश में मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की जरुरत है। वह चुनाव लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार की पार्टियां मिलकर लड़ रही थीं और कांग्रेस भी उनके साथ थी। तीनों पार्टियों का महागठबंधन भाजपा पर भारी पडता दिख रहा था। ऐसे में भागवत का बयान लालू और नीतीश के लिए मनचाही मुराद साबित हुआ। उन्होंने भागवत के बयान को लपकने में जरा भी देरी नहीं की और उसे इतना बड़ा मुद्दा बना दिया कि पूरे चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी हर सभा में सफाई देनी पड़ी कि उनकी सरकार ऐसा कुछ नहीं करेगी जिससे कि आरक्षण पर जरा भी आंच आए।

केवल 36 देशों में ही वैवाहिक बलात्कार अपराध नहीं

भारत को इस दिशा में कदम उठाने चाहिए
अनुषा अग्रवाल - 2020-11-04 11:02 UTC
पिछले कुछ वर्षों में बदलते समाज के कारण भारतीय समाज में उदारता और खुली मानसिकता देखी जा सकती है। यह उदारता न्यायिक निर्णयों में भी परिलक्षित हो रही है। इस तरह के निर्णय बताते हैं कि कैसे देश एक मध्यकालीन भारत के बंधनों से दूर एक ऐसे समाज में प्रवेश कर रहा है जहाँ सभी के अधिकारों की रक्षा की जाती है।

चुनाव अभियान के दौरान मध्यप्रदेश में इस बार बहुत कुछ हुआ पहली बार

दोनों मुख्य पक्षों ने भाषा की मर्यादा तोड़ी
एल एस हरदेनिया - 2020-11-03 09:47 UTC
भोपालः सबसे बदबूदार, बदसूरत और व्यस्त चुनाव प्रचार के बाद मध्य प्रदेश के 28 विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं ने 3 नवंबर को अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

बिहार की लड़ाई जटिल से जटिलतर बनती जा रही है

चुनाव प्रचार के केन्द्र में खुद नीतीश कुमार आ गए हैं
हरिहर स्वरूप - 2020-11-02 09:56 UTC
बिहार में 2020 के विधानसभा चुनाव ने दिलचस्प मोड़ ले लिया है। शीर्ष राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के बीच प्रतिस्पर्धा, मौजूदा गठबंधनों के बीच दरार, नौकरियों के आस-पास का प्रवचन, और सबसे महत्वपूर्ण बात, नीतीश कुमार के रिकॉर्ड पर फोकस ने चुनावों को जटिल बना दिया है। वास्तव में, यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि मतदाताओं को कौन सा प्रमुख चुनावी मुद्दा प्रभावित कर रहा है।

भारतीय जनता पार्टी के साथ मायावती की नजदीकी का पर्दाफाश

2022 के आम चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी फिर साथ आ सकते हैं
प्रदीप कपूर - 2020-10-31 10:00 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश की 10 सीटों के लिए हुए राज्यसभा के चुनावों में बसपा और बीजेपी के बीच समझदारी बढ़ गई है। लंबे समय से बसपा नेता मायावती के भाजपा के साथ संबंध के बारे में अफवाहें थीं, लेकिन चुनावों के करीब आने से दोनों के बीच में बनी समझ का पर्दाफाश हो गया है। समाजवादी पार्टी द्वारा उसके उम्मीदवार को हराने के लिए उनकी पार्टी में बगावत के कदम से हैरान, बसपा सुप्रीमो ने घोषणा की कि उनकी पार्टी भविष्य में एमएलसी चुनावों में भाजपा का समर्थन करेगी।

त्रिपुरा और मिजोरम के बीच सीमा विवाद का स्थाई हल हो

हल के लिए केन्द्र सरकार को प्रभावी हस्तक्षेप करना चाहिए
सागरनील सिन्हा - 2020-10-29 10:18 UTC
त्रिपुरा और मिजोरम के बीच सीमा विवाद समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है। इस साल की शुरुआत में केंद्र ने त्रिपुरा में 34,000 ब्रू शरणार्थियों को स्थायी रूप से बसाने के लिए, दो राज्य सरकारों को शामिल करने वाले हितधारकों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। त्रिपुरा में रींगस के नाम से जाना जाने वाला ब्रू त्रिपुरी समुदाय के बाद राज्य का दूसरा सबसे बड़ा जनजातीय समुदाय है। इस समझौते का कई लोगों ने विरोध किया था - क्योंकि इसे 23 साल पुराने मुद्दे के अंत के रूप में देखा गया था, जो त्रिपुरा और मिजोरम के बीच प्रमुख विवाद का कारण रहा है।

मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों के लिए ऐतिहासिक उपचुनाव

ज्योतिरादित्य सिंधिया के राजनीतिक प्रभाव की भी परीक्षा
अनिल जैन - 2020-10-28 10:18 UTC
आगामी नवंबर की 3 और 7 नवंबर को 11 राज्यों की जिन 56 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव होने जा रहे हैं, उनमें मध्य प्रदेश विधानसभा की 28 सीटें भी शामिल हैं। वैसे तो संसद या विधानमंडल के किसी भी सदन की किसी भी खाली सीट के उपचुनाव होना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन मध्य प्रदेश की 28 सीटों के लिए होने जा रहे उपचुनाव देश के संसदीय लोकतंत्र की एक अभूतपूर्व घटना है।