Skip to main content

View Articles

2026 कम तेल कीमतों और कच्चे तेल की अतिरिक्त आपूर्ति का साल होगा

तेल राजस्व के नुकसान से निपटने के लिए नयी रणनीति बना रहे हैं उत्पादक
के रवींद्रन - 2025-12-30 11:23 UTC
जैसे-जैसे 2026 करीब आ रहा है, वैश्विक तेल बाजार एक ऐसे साल की ओर बढ़ रहा है जो कीमतों की गतिशीलता, उत्पादक देशों में वित्तीय योजना और आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं के लिए ऊर्जा सुरक्षा की गणना को निर्णायक रूप से नया आकार दे सकता है। आने वाले साल की मुख्य विशेषता मांग में कमी या भू-राजनीतिक झटका नहीं है, बल्कि अतिरिक्त आपूर्ति का बढ़ता दबाव है। बाजार के अनुमान बताते हैं कि अगर ओपेक प्लस अपने स्वैच्छिक उत्पादन कटौती को खत्म करने का फैसला करता है तो तेल को वर्षों में सबसे बड़ी अतिरिक्त आपूर्ति का सामना करना पड़ सकता है, जो संभावित रूप से प्रति दिन 32 लाख बैरल की आपूर्ति के साथ पुराने बाजार स्तर को वापस ला सकते हैं। यह आसन्न अतिरिक्त आपूर्ति मुश्किल फैसलों, रणनीतिक पुनर्गठन और उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच बदलते प्रभाव के एक साल के लिए मंच तैयार करती है।

भारतीय कामगारों ने 2025 में मुश्किल से हासिल किए गए अपने अनेक अधिकार खोए

2026 हमारे नाराज़ कार्यबल के लिए एक उथल-पुथल भरा साल होगा
डॉ. ज्ञान पाठक - 2025-12-29 11:24 UTC
अगस्त 2019 में जब से भारत की संसद में वेतन संहिता पारित हुई, उसके बाद तीन और संहिताएं - औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020, और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें संहिता 2020, एक साल बाद सितंबर 2020 में आयीं - देश के कामगारों को अपने अधिकारों पर तलवार लटकने का डर सताता रहा है। पिछले 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को मिलाकर उन चार श्रम संहिताओं को बनाया गया था। मज़दूरों ने पिछले पांच सालों से इन संहिताओं का विरोध किया, और अनेक विरोध प्रदर्शन किए जिसमें कई अखिल भारतीय हड़तालें शामिल थीं। पिछली अखिल भारतीय हड़ताल 9 जुलाई 2025 को हुई थी। लेकिन अंततः 21 नवंबर, 2025 को इन संहिताओं को अधिसूचित कर दिया गया, जिससे भारतीय कामगारों ने अपने कई अधिकार और सुरक्षा खो दी। ग्रामीण मज़दूरों ने भी, मनरेगा 2005 को 21 दिसंबर 2025 को अधिसूचित वीबी – जी राम जी अधिनियम द्वारा निरस्त किए जाने के बाद अपनी मांग पर रोज़गार हासिल करने के अपने अधिकार खो दिए हैं।

भारत के राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध है नया परमाणु अधिनियम

कमजोर किये गये हैं नागरिक और पर्यावरणीय सुरक्षा तथा जवाबदेही
डॉ. अरुण मित्रा - 2025-12-27 11:10 UTC
संसद द्वारा पारित नए परमाणु विधेयक, जिसका शीर्षक 'भारत को बदलने के लिए परमाणु ऊर्जा का सतत उपयोग और उन्नति (शांति)' है, को 20 दिसम्बर 2025 को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति मिल गई है। इसके साथ ही, यह देश में परमाणु ऊर्जा के विभिन्न पहलुओं को नियंत्रित करने वाला एक अधिनियम बन गया है।

2026 में और अधिक वैश्विक उथल-पुथल और ट्रंप का दबदबा संभव

सुरक्षा के लिहाज़ से भारत के लिए विदेश नीति की बेहतर रणनीति बहुत ज़रूरी होगी
कल्याणी शंकर - 2025-12-26 11:41 UTC
जैसे ही साल 2025 खत्म हो रहा है, हम 2026 की दहलीज पर खड़े हैं, और यह सोच रहे हैं कि आगे क्या होगा। भविष्य की गेंद क्या कहती है? गेंद 2026 में होने वाली संभावित घटनाओं और राजनीतिक बदलावों की ओर इशारा करती है जो हमारी दुनिया को आकार दे सकते हैं। मशहूर फ्रांसीसी भविष्यवक्ता नोस्त्रादेमस सहित कई लोगों ने कई बातों की भविष्यवाणी की है।

पूर्वोत्तर भारत पर बांग्लादेश की धमकी: खोखली धमकियां, या कुछ और?

यूनुस की तीखी बातों को गंभीर नीति विश्लेषकों में से कुछ ही लोग मानते हैं
आशीष विश्वास - 2025-12-24 15:27 UTC
बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा भारत के पूर्वोत्तर इलाके के सात बहनी राज्यों को छीनने का नारा नई दिल्ली के लिए कितना गंभीर है? भारत के लिए इससे जो राजनीतिक चुनौती खड़ी होती है, उसका सही अंदाज़ा लगाने के लिए, इसकी पृष्ठभूमि की जानकारी का थोड़ा अध्ययन आवश्यक है।

मुक्त व्यापार के लिए खतरा बन गए हैं ट्रम्प

अमेरिका अन्य देशों को मजबूर कर रहा है अपनी बात मनवाने के लिए
नन्तू बनर्जी - 2025-12-23 11:23 UTC
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को रूस, वेनेजुएला और कई अन्य देशों से समस्याएं हो सकती हैं और उन देशों से निपटने के लिए अमेरिकी व्यापार और राजनयिक नीतियों पर फैसला करने का उन्हें पूरा अधिकार है। लेकिन उन्हें अन्य स्वतंत्र देशों पर अपनी पसंद, नापसंद और पूर्वाग्रह थोपने का कोई अधिकार नहीं है। दुर्भाग्य से, वह ठीक वैसा ही कर रहे हैं।

राष्ट्रपति की जी राम जी विधेयक को स्वीकृति के बाद ग्रामीण रोजगार गारंटी खत्म

आधी रात को पारित किया गया था विधेयक, इंडिया ब्लॉक विरोध प्रदर्शन जारी रखेगा
डॉ. ज्ञान पाठक - 2025-12-22 11:25 UTC
दो दशक पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) 2005 की जगह आखिरकार 19 दिसंबर को संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन विकसित भारत – रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी – जी राम जी) विधेयक 2025 ने ले ली थी, जिसे रविवार 21 दिसम्बर को राष्ट्रपति की स्वीकृति भी मिल गयी है, और इसके साथ ही ग्रामीण भारत की एक मात्र रोजगार गारंटी योजना खत्म हो गयी है। लोकसभा ने 18 दिसंबर को दिन में बिल पास किया, और उसी दिन इसे राज्यसभा में पेश किया गया, जिसने शाम 6.40 बजे के बाद इस पर बहस शुरू की और विपक्ष की गैरमौजूदगी में आधी रात के ठीक बाद 12.32 बजे इसे पास कर दिया। यह विधेयक 16 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया गया था। यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि इसे जल्दबाजी में पास किया गया।

तेल आपूर्ति के गणित को बदल रही है भूराजनीति, ऊर्जा बाजार में नया तालमेल

यूक्रेन युद्ध के खत्म होने की संभावना से कच्चा तेल $60 प्रति बैरल पर आ गया
के रवींद्रन - 2025-12-20 11:53 UTC
फरवरी 2021 के बाद पहली बार तेल की कीमतें $60 प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं और यूरोपियन गैस की कीमतों में भारी गिरावट अन्य वस्तुओं में चक्रीय गिरावट से कहीं ज़्यादा है। ये ऐसे समय में भूराजनीतिक जोखिम की तेज़ी से पुनर्मूल्य निर्धारण का संकेत देते हैं जब कूटनीति, ऊर्ध्वगामी होने के बजाय, बाजार की मानसिकता पर हावी होने लगी है। नवंबर के बीच से यूरोपियन गैस की कीमतों में लगभग 16 प्रति शत की गिरावट और कच्चे तेल में नई कमजोरी के बाद ऐसे संकेत मिले हैं कि अगर यूक्रेन विवाद खत्म करने के लिए बातचीत आगे बढ़ती है तो रूसी तेल कंपनियों पर लगे प्रतिबंध में ढील दी जा सकती है। यह संभावना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे से और मज़बूत हुई है कि युद्ध के किसी भी पहले के चरण की तुलना में समझौता ज़्यादा करीब हो सकता है।

पश्चिमी देशों की कड़ी जांच का सामना कर रहे हैं बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख डॉ. यूनुस

12 फरवरी के चुनावों की व्यवस्था को लेकर उनके कामकाज पर दुनिया की पैनी नज़र
आशीष विश्वास - 2025-12-19 12:28 UTC
बांग्लादेश में मुख्य सलाहकार डॉ. एम. यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार अभी तक चुनाव से पहले की स्थिति पर ज़रूरी प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित करने में सफल नहीं हुई है। 12 फरवरी 2026 को मतदान की तारीख है। उम्मीद के मुताबिक पुरानी और नई पार्टियां ज़ोरदार प्रचार कर रही हैं। हालांकि, इन चुनावों की एक नई बात यह है कि चुनाव मैदान में उतरी पार्टियों के बीच असामान्य रूप से ज़्यादा ज़हर घोला जा रहा है। अवामी लीग (एएल) पर चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है - यह एक और बड़ा कारण है।

मध्यप्रदेश विधान सभा का एक-दिवसीय विशेष सत्र विकास को समर्पित

प्रदेश के विकास का पथ सबके विचारों से निर्धारित करने का आश्वासन
एल.एस. हरदेनिया - 2025-12-18 12:28 UTC
मध्यप्रदेश विधानसभा का एक-दिवसीय विशेष सत्र 17 दिसंबर को आयोजित किया गया। यह सत्र दो उद्देश्यों से बुलाया गया था। पहला था मध्यप्रदेश विधानसभा का 70 वर्ष पूर्ण होना और दूसरा 2047 तक मध्यप्रदेश के विकास पर एक विजन डाक्यूमेंट पर चर्चा करना। विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विजन डाक्यूमेंट सत्ताधारी विधायकों विचारों पर आधारित तो होगा ही परंतु प्रतिपक्ष के विचारों को भी महत्व दिया जाएगा। मध्यप्रदेश के विकास का पथ सबके विचारों से निर्धारित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने भी इसी तरह की इच्छा प्रकट की और मध्यप्रदेश के विकास से संबंधित कुछ मुद्दे रखे।
Collapse/expand modules below