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व्‍यावसायिक सुरक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और कार्य शर्त संहिता, 2020 को वापस लेना होगा

फैक्टरी के माहौल में श्रमिकों के लिए साफ-सुथरी व्यवस्था और सुरक्षा की जरुरत
डॉ. अरुण मित्रा - 2025-12-06 10:46 UTC
पेशाजन्य स्वास्थ्य और सुरक्षा लंबे समय से स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ-साथ श्रम संगठनों के लिए भी गंभीर चिंता का विषय रहा है। इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति के दौरान, बच्चों से भी चिमनियां साफ करवाई जाती थीं और खतरनाक उद्योगों में काम करवाया जाता था। इस वजह से कई बच्चों को गंभीर बीमारियां हो जाती थीं और आखिर में उनकी जल्दी मौत हो जाती थी। लेकिन तब से इंग्लैंड बहुत आगे निकल गया है। सभी बच्चे स्कूल जाते हैं, उन्हें सही पोषण और उनकी ज़रूरी स्वास्थ्य देखभाल होती है। हम अपने देश भारत में अभी भी इसे हासिल करने से बहुत दूर हैं।

रुपये की भारी गिरावट के जोखिमों को नजरअंदाज कर रहे मुख्य आर्थिक सलाहकार

समस्या को गंभीरता से लें अन्यथा भारतीय अर्थव्यवस्था को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी
डॉ. ज्ञान पाठक - 2025-12-05 10:34 UTC
बुधवार, 3 दिसंबर, 2025 को जब भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मुंबई बाजार में गिर रहा था, जो सुबह के कारोबार में 89.96 रुपये पर खुलने के बाद गिरते हुए 90 रुपये प्रति डॉलर के निशान को पार करते हुए 90.29 के नए निचले स्तर पर पहुंच गया, विश्लेषक संकटग्रस्त रुपये के लिए अगले स्तर 92-93 रुपये प्रति डालर का अनुमान लगा रहे थे। उसी समय भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन उसी शहर में एक उद्योग कार्यक्रम में साहसपूर्वक कह रहे थे, "यह अगले साल वापस आएगा। अभी, यह हमारे निर्यात या मुद्रास्फीति को नुकसान नहीं पहुंचा रहा है। मैं इसे लेकर अपनी नींद नहीं खो रहा हूं। अगर इसका मूल्यह्रास अभी करना है तो शायद यह सही समय है।"

फिर करवट ले रहा है रूस-भारत मैत्री का लंबा इतिहास

बदल गया है पूर्व के विरोधी आरएसएस खेमा का रूख
एल.एस. हरदेनिया - 2025-12-04 11:11 UTC
द्वितीय विश्वयुद्ध में अपने देश को महान सफलता दिलवाने और युद्ध की समाप्ति के बाद सोवियत संघ के सर्वमान्य नेता मार्शल स्टालिन की मृत्यु हुई थी। भारतीय लोकसभा में उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि मार्शल स्टालिन एक ऐसे नेता थे जो शांति में भी बड़े नेता थे और युद्ध में भी।

भारत में दवा की कीमतों में धोखाधड़ी, बड़ी कंपनियों के मुनाफ़े के लिए बनाया गया बाजार

संसदीय समिति ने इस धोखे का किया पर्दाफ़ाश, केंद्र को अब कार्रवाई करनी होगी
आर. सूर्यमूर्ति - 2025-12-04 10:54 UTC
किसी भी मायने में, भारत बीमार लोगों के लिए दुनिया की सबसे सस्ती जगह होनी चाहिए। यह जेनेरिक दवाओं का दुनिया का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है, वैश्विक फार्मा के लिए फैक्टरी फ्लोर है, जिसे तथाकथित “ग्लोबल साउथ की फार्मेसी” कहा जाता है। फिर भी आम भारतीयों के लिए, असल अनुभव इसके उलट है: एक हेल्थकेयर सिस्टम जहां एक साधारण बुखार की दवा की कीमत उसकी आपूर्ति की कीमत से छह गुना, गैस्ट्रिक की गोली की कीमत दस गुना, और एक जान बचाने वाली कैंसर की दवा की कीमत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उसकी छपी हुई “अधिकतम खुदरा कीमत” से लगभग 80 प्रतिशत कम हो सकती है। यह क्या है, इसे समझने के लिए किसी को लोक नीति में डॉक्टरेट की ज़रूरत नहीं है। यह साफ है कि इस बाजार को इलाज तक जनता की पहुंच और उनकी खर्च वहन करने की क्षमता के अनुरुप नहीं, बल्कि उनका दोहन कर भारी लाभ अर्जित करने के अनुरूप बनाया गया है।

अगले दौर के चुनाव बस पांच महीने दूर हैं – कहां है इंडिया ब्लॉक?

असम विधान सभा और मुंबई नगर निगम के चुनाव तात्कालिक प्राथमिकता होनी चाहिए
नित्य चक्रवर्ती - 2025-12-03 11:05 UTC
इंडिया ब्लॉक का क्या हो रहा है जिसने 2024 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके एनडीए को बड़ा झटका दिया था? नरेंद्र मोदी के प्रधान मंत्री बनने के बाद पहली बार भाजपा को बहुमत नहीं मिला और उसे एनडीए के दूसरे सहयोगी, खासकर जद(यू) और तेलुगु देशम पार्टी के समर्थन से अल्पमत सरकार बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। लोकसभा चुनावों के बाद के समय में इंडिया ब्लॉक का जोश बहुत ज़्यादा था और यह धारणा बनी थी कि मोदी राज में भाजपा का पतन शुरू हो गया है, परन्तु जून 2024 में लोकसभा के नतीजे आने के डेढ़ साल बाद, देश का पॉलिटिकल माहौल अब पूरी तरह से अलग है।

कर्नाटक में उत्तराधिकार को लेकर समझौते के बावजूद बनी हुई है कांग्रेस की दुविधा

डी.के. शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी में होते जा रहे हैं मज़बूत
कल्याणी शंकर - 2025-12-02 10:33 UTC
बिहार में हाल ही में लगे झटके के बाद, कांग्रेस पार्टी अब कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके उपमुख्यमंत्री डी.के. शिव कुमार के बीच सत्ता की लड़ाई से जूझ रही है। राजनीतिक हलकों में, खासकर कांग्रेस सदस्यों के बीच, इस साल के आखिर में प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की अटकलें ज़ोरों पर हैं, जिससे स्थिरता और भविष्य के शासन को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

दिल्ली शिखर सम्मेलन में भारत-रूस संबधों में नया रणनीतिगत बदलाव देखने को मिलेगा

तीन-तरफ़ा सहयोग के हिसाब से खनिज तेल का भारतीय आयात अब कोई रुकावट नहीं
के रवींद्रन - 2025-12-01 10:40 UTC
राजनीतिक इरादे और आर्थिक व्यावहारिक सोच का बढ़ता मेल भारत-रूस रिश्ते को नई रफ़्तार दे रहा है, जिससे नई दिल्ली में होने वाला शिखर सम्मेलन एक ऐसी भागीदारी में एक अहम पल बन रहा है जिसने पहले ही दशकों के भूराजनीतिक बदलावों को झेला है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दौरा, जिसे 'स्पेशल और प्रिविलेज्ड पार्टनरशिप' (विशेष और तरजीही भागीदारी) की शब्दावली में बताया गया है, दोनों तरफ़ से एक ऐसे एजंडा को आगे बढ़ाने की इच्छा का संकेत देता है जो अब पहले की रुकावटों तक सीमित नहीं है और अब सिर्फ़ पुरानी मजबूरियों से बना नहीं है।

असरदार सामाजिक सुरक्षा की ज़रूरत पर ज़ोर देता है भारत पर आईएमएफ का दस्तावेज

मौसम के झटकों से फसल की पैदावार और ग्रामीण उपभोग पर असर पड़ने की दी चेतावनी
अंजन रॉय - 2025-11-29 10:59 UTC
अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की भारत के साथ ताजा देश स्तरीय विचार-विमर्श के बाद किये गये आकलन से भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान हालत की अच्छी तस्वीर सामने आई है। आईएमएफ के कार्यपालक निदेशकों ने भारत सरकार को अपनी सलाह-मशविरा रपट सौंपी है, और साथ ही सरकार और उसकी अर्थव्यवस्था के प्रबंधकों के लिए अपनी सिफारिशें भी दी हैं। आईएमएफ की समीक्षा और सिफारिशों से दो बातें सामने आई हैं जिन पर ध्यान से विचार करने की ज़रूरत है।

दक्षिण एशिया में कमजोर हो रही हैं धर्मनिरपेक्ष शक्तियां

भारत के लिए भी धर्मनिरपेक्षता का कमजोर होना चिंता का विषय
एल.एस. हरदेनिया - 2025-11-28 11:28 UTC
ऐसा लगता है कि भारतीय उपमहाद्वीप में धर्मनिरपेक्षता की ताकतें पूरी तरह कमजोर हो गई हैं। जब भारत और पाकिस्तान आजाद हुए थे तब भारत में धर्मनिरपेक्ष ताकतें बहुत मजबूत थीं क्योंकि उस समय महात्मा गांधी भी थे, जवाहर लाल नेहरू भी थे और सरदार पटेल भी, जो सभी धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखते थे। सरदार पटेल ने कहा था कि वे भारत में मुसलमानों की सुरक्षा की गारंटी देते हैं परंतु उनकी मुसलमानों से भी यह अपेक्षा थी कि वे भारत के प्रति वफादार रहें।

केंद्र की चार अधिसूचित श्रम संहिताएं करती हैं मज़दूरों की सुरक्षा को कमज़ोर

ट्रेड यूनियनों की संयुक्त कार्रवाई ही उनके अधिकारों को सुरक्षित करने की एकमात्र गारंटी
नीलोत्पल बसु - 2025-11-28 10:47 UTC
बिहार विधानसभा चुनावों में एनडीए की बड़ी चुनावी जीत और उसके साथ हुई खुशी के तुरंत बाद भारत सरकार ने चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को अधिसूचित कर दिया है। मज़दूरी, औद्योगिक संबंध, काम से जुड़ी सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर बनी ये संहिताएं देश के ‘29 श्रम कानूनों को आसान बनाने’ के नाम पर हावी हो गए हैं।
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