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अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में डिजिटल छलांग के भरोसे उद्यमों का विकास संभव नहीं

एक गहरे ढंचागत बदलाव को छिपा रहे हैं आंकड़े, अभी बहुत कुछ करने की जरुरत
आर. सूर्यमूर्ति - 2025-11-27 11:20 UTC
भारत के अनौपचारिक क्षेत्र (अनइनकॉरपोरेटेड नॉन-एग्रीकल्चरल सेक्टर) के गत तिमाही के बुलेटिन, पहली नज़र में, वैश्विक झटकों से जूझ रही अर्थव्यवस्था के लिए एक मामूली जीत की तरह लगते हैं: डिजिटल संरचना अपनाने की रफ़्तार तेज़ी से बढ़ रही है, उद्यम थोड़े आगे बढ़े हैं, और रोज़गार स्थिर बना हुआ है। लगभग 39% उद्यम अब किसी न किसी रूप में इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। यह एक ऐसे सेक्टर के लिए एक चौंकाने वाला बदलाव है जो लंबे समय से खाता-बही और नकद लेन-देन पर टिका हुआ है। उद्यमों की संख्या बढ़कर 7.97 करोड़ हो गयी, रोज़गार 12.86 करोड़ पर बना रहा, और शहरी श्रमिकों को काम पर लेने में मज़बूती आयी।

भारत के बढ़ते विदेशी कर्ज़ के पीछे बढ़ता व्यापार घाटा

पिछले महीने का नया रिकॉर्ड केंद्र के लिए चिंता की बात होनी चाहिए
नन्तू बनर्जी - 2025-11-26 11:06 UTC
सरकार भले ही इससे सहमत न हो, लेकिन भारत का लगातार व्यापार घाटा देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर रहा है, जबकि विकास दर शानदार है। पिछले महीने, आयात पर ज़्यादा ध्यान देने वाले भारत का व्यापार घाटा 41 अरब डालर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, क्योंकि निर्यात में एक साल में सबसे ज़्यादा गिरावट देखी गई। बदकिस्मती से, अक्टूबर के दौरान देश में सोने के आयात में भारी उछाल आया, जो बड़े व्यापार घाटा का एक कारण है। यह स्थिति तब है जब 2024 ग्लोबल मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (एमपीआई) के अनुसार, भारत में दुनिया के सबसे ज़्यादा (23.4 करोड़) लोग अत्यंत गरीबी में जी रहे हैं।

भारत उथल-पुथल भरे औद्योगिक संबंधों के एक नए दौर में दाखिल हुआ

नई श्रम संहिताएं लागू हुईं, मज़दूरों का 26 नवंबर को विरोध प्रदर्शन
डॉ. ज्ञान पाठक - 2025-11-25 11:25 UTC
भारत सरकार द्वारा 21 नवंबर, 2025 को चार विवादित श्रम संहिताएं लागू करने की एकतरफ़ा घोषणा और 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियनों (सीटीयू) के जॉइंट प्लेटफॉर्म का 26 नवंबर को इसके खिलाफ़ पहले से तय अपने विरोध प्रदर्शन को और तेज़ करने का निर्णय, देश में उथल-पुथल भरे औद्योगिक संबंधों के एक नए दौर का साफ़ संकेत हैं। सरकार का कहना है कि श्रम संहिताएं मज़दूरों के पक्ष में है, जबकि सीटीयू का आरोप है कि यह मज़दूरों के खिलाफ़ और कॉर्पोरेट के पक्ष में है।

दक्षिण एशियाई देशों के लिए सावधानी और सहयोग से चलने का समय

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश को उकसावे और संघर्ष से बचना चाहिए
डॉ. अरुण मित्रा - 2025-11-24 11:01 UTC
पिछले कुछ समय से दक्षिण एशिया में एक के बाद एक तेज़ी से हो रही घटनाएं चिंता की बात हैं। हमने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकवादी हिंसा देखी, जिसमें 26 बेगुनाह लोग मारे गए। अब 10 नवंबर 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में हुए धमाके में 15 लोग मारे गए हैं। उसी दिन इस्लामाबाद में हुए धमाके में 10 लोग मारे गए। यह इस बात का इशारा है कि आतंकवादी जब चाहें कहीं भी लोगों को मार सकते हैं। इन घटनाओं ने इस इलाके में सुरक्षा की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अंदरूनी सुरक्षा संकट से बाहरी तनाव पैदा हो सकता है, और भारत और पाकिस्तान भी एक-दूसरे पर इल्ज़ाम लगाने में देर नहीं लगाते। इन घटनाओं से तनाव बढ़ता है और बयानबाज़ी बढ़ती है, जिससे हथियारों की होड़ बढ़ जाती है। ऐसी घटनाओं से बाहरी ताकतों को भी फ़ायदा उठाने का मौका मिलता है।

एनडीए ने बिहार विधानसभा चुनाव में उठाया एसआईआर पर असुरक्षा की भावना का लाभ

इंडिया ब्लॉक को निष्पक्ष चुनाव के लिए संघर्ष करते हुए आत्मनिरीक्षण करना होगा
नीलोत्पल बसु - 2025-11-22 10:48 UTC
बिहार विधानसभा चुनाव हमारे देश के चुनावी इतिहास में एक अहम मोड़ है। 25 जून को घोषित मतदाता सूची का विशेष गहन पुरनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न) (एसआईआर) की पृष्ठभूमि में हुए इस चुनाव में, वयस्क मताधिकार के लिए नए बुनियादी नियम बनाए गए।

सर्वोच्च न्यायालय के परामर्शी विचार के दूरगामी असर होंगे

राष्ट्रपति द्वारा मांगी गयी सलाह पर फैसले के फायदे और जोखिम
डॉ. ज्ञान पाठक - 2025-11-21 10:30 UTC
यद्यपि भारत के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की अगुवाई वाली सर्वोच्च् न्यायालय की पांच जजों की संविधान पीठ के परामर्शी विचार, जो भारत के संविधान की धारा 143 के तहत दिये गए हैं, बाध्यकारी नहीं है, इसके दूरगामी असर होने की संभावना है, जो कार्यपालिका, न्यायपालिका, राज्यपाल, और देश के राष्ट्रपति के भावी कार्यों के अलावा, राज्यों और केंद्र में सत्तारूढ़ राजनीतिक पार्टियों के कामों पर भी असर डालेगी। ऐसा इसलिए है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के विचार एक आधिकारिक संवैधानिक विचार के तौर पर काफी अहमियत रखती है।

डिजिटल गार्ड हो गये फेल, साइबर सुरक्षा की कमजोरी हुई उजागर

क्राउडस्ट्राइक और क्लाउडफ्लेयर आउटेज डिजिटल नेटवर्क की कमजोरी का संकेत
के रवींद्रन - 2025-11-20 11:10 UTC
साइबर-सिक्योरिटी फर्म और वेब-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता कंपनी द्वारा की गई रुकावट एक गंभीर याद दिलाती है कि किस प्रकार रक्षक भी कमजोर हैं। 19 जुलाई 2024 को क्राउडस्ट्राइक ने अपडेट से जुड़ा ब्लैकआउट किया था, जिससे कुल मिलाकर 5.4 अरब डालर से ज़्यादा का नुकसान हुआ। ट्रांसपोर्ट फर्म, बैंक और अस्पताल ठप हो गए क्योंकि दुनिया भर में सिस्टम क्रैश हो गए और ऑपरेशन रुक गए। अब 18 नवम्बर 2025 को दुनिया भर में आउटेज के लिए, क्लाउडफ्लेयर, जो इसी तरह के ऑपरेशन में लगा हुआ था, जिम्मेदार था क्योंकि वेब-सर्विस प्रोवाइडर ने हजारों वेबसाइटों को ऑफलाइन कर दिया, कुछ मर्जर और एक्विजिशन प्रोसेस को रोक दिया और एक इंफ्रास्ट्रक्चर लेयर पर ग्लोबल बिजनेस की निर्भरता को उजागर कर दिया।

पंजाब के अधिकारों में कटौती से आ रही राजनीतिक प्रतिशोध की बू

केंद्र स्थिति का पुनर्मूल्यांकन करे और छात्रों की भावनाओं का सम्मान करे
जग मोहन ठाकन - 2025-11-19 11:11 UTC
चंडीगढ़: पंजाब के लोगों को ऐसा क्यों लगता है कि राज्य की शक्तियों, पकड़ और अधिकारों में कटौती की जा रही है? कौन से संकेत इस धारणा को दर्शा रहे हैं? क्या पंजाब विश्वविद्यालय सीनेट के ढांचे को खत्म करना, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में पंजाब की भूमिका को कमज़ोर करना, चंडीगढ़ प्रशासन के संचालन में पंजाब की हिस्सेदारी को कम करके केंद्र द्वारा नियंत्रण करना महज़ एक संयोग है? शायद नहीं, ये सारी हरकतें अपने आप में किसी साज़िश की ओर इशारा करती हैं; राजनीतिक पर्यवेक्षक ऐसा ही मानते हैं। पंजाब के राजनीतिक नेता भी अपनी संबद्धता को दरकिनार करते हुए इसी तरह के आरोप लगा रहे हैं।

शेख हसीना को न्यायाधिकरण द्वारा मृत्युदंड दिए जाने के बाद बांग्लादेश में नई उथल-पुथल

नरेंद्र मोदी के लिए भारतीय धरती से अभियुक्तों की चुनौतियों से राजनयिक संकट गहराया
नित्य चक्रवर्ती - 2025-11-18 11:55 UTC
बांग्लादेश में सोमवार, 17 नवंबर को एक नई उथल-पुथल मच गई, जब बांगलादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना को पिछले साल के छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन, जिसके कारण 5 अगस्त, 2024 को उनकी अवामी लीग सरकार गिर गई थी, के दौरान किए गए "मानवता के विरुद्ध अपराधों" के लिए मृत्युदंड की सजा सुनाई।

सरकार को छोड़कर सभी से अनुपालन की मांग करते हैं भारत के नए गोपनीयता नियम

डिजिटल जीवन को व्यक्तिगत गोपनीयता कायम रखकर नियंत्रित किया जाना चाहिए
आर. सूर्यमूर्ति - 2025-11-17 11:15 UTC
भारत ने आखिरकार अपनी लंबे समय से विलंबित डेटा सुरक्षा व्यवस्था को लागू कर दिया है, और पहली नज़र में, यह क्षण एक मील का पत्थर जैसा लगता है - 1.4 अरब लोगों का देश उन देशों की श्रेणी में शामिल हो रहा है जो डिजिटल अधिकारों को गंभीरता से लेते हैं। लेकिन आधिकारिक बयानों, अनुपालन की उल्टी गिनती और सावधानीपूर्वक तैयार की गई बयानबाजी को छोड़ दें, तो कुछ और भी परेशान करने वाले तथ्य सामने आते हैं। नए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 कंपनियों और व्यक्तियों से सख्त, लगभग यूरोपीय स्तर के अनुशासन की मांग करते हैं - जबकि भारत सरकार को जब चाहे कानून को दरकिनार करने का एकतरफा अधिकार देते हैं। यही असली कहानी है। नोटिस या समय सीमा नहीं। मूल तथ्य यह है कि सरकार ने अपने लिए एक ऐसा व्यापक रास्ता बना लिया है जो प्रभावी रूप से राज्य को भारत की अपनी गोपनीयता व्यवस्था की परिधि से बाहर कर देता है।
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