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भारत के लिए आसियान क्यों महत्वपूर्ण है?

दक्षिण पूर्व एशिया से प्र्र्रगाढ़ संबंध हमारे हित में है
निलंजन बनिक - 2018-01-29 09:49 UTC
जब कभी विश्व अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा करने की बात आती है, तो चीनी अजगर हमेशा भारतीय हाथी के खिलाफ हाथ जीत जाता है। विश्व व्यापार में भारत का हिस्सा 2011 से करीब 1.8 प्रतिशत पर है, जबकि चीन के लिए यह करीब 12 प्रतिशत है। 2020 तक चीन से आधा होने के लिए भी भारत का निर्यात आंकड़ा की सालाना वृद्धि दर 30 प्रतिशत से अधिक करने की जरूरत है। यह एक कठिन काम प्रतीत होता है, लेकिन भारत को आसियान में एक सच्चा दोस्त मिल गया है। हम उसकी दोस्ती का लाभ उठाकर असंभव को भी संभव कर सकते हैं।

दिशाहीनता और मुकदमेबाजी से ग्रस्त विश्व व्यापार संगठन

जी श्रीनिवासन - 2017-12-19 11:14 UTC
व्यापार की बहुपक्षीय बातचीत की भाषा में वार्तालाप का टूटना, गतिरोध या आम सहमति का अभाव जैसे शब्द सीधे तौर पर यही बताते हैं कि विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) के, 164 देशों के बीच संवाद स्थापित करने वाली व्यवस्था बेतरतीब हो चुकी है। यह सिर्फ एक बातचीत की दुकान बनकर रह गया है क्योंकि विकसित तथा उभरती हुई व्यवस्था के कुछ प्रभावशाली सदस्य अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं तथा विकास के मुद्दों पर झुकने को तैयार नहीं हैं।

पाकिस्तान के निजी जेलों में कैद हिंदु बंधुआ मजदूर

पाकिस्तान में गुलामी की संख्या काफी ज्यादा
जय भगवान - 2017-12-18 10:05 UTC
पाकिस्तान के सिंध तथा बलूचिस्तान प्रांतों में हजारों हिंदु वहां के जमींदारों के बंधुआ हैं जो खेती, इंट के भट्टों तथा मछली पालन में काम करते हैं और रात में ‘निजी जेलों’ में बंद कर दिया जाते हैं। पिछले बुधवार को पुलिस ने सिंध के एक जमींदार के यहां 13 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया।

नेपाल के चुनावी नतीजे

भारत के सामने नई चुनौती
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-12-15 14:16 UTC
नेपाल के चुनावी नतीजों के बाद वहां वामपंथी मोर्चा की सरकार बन रही है और के पी ओली वहां के प्रधानमंत्री बन रहे हैं। चूंकि मोर्चे को पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ है, इसलिए इसकी पूरी संभावना है कि यह सरकार पूरे 5 सालों तक चलेगी और पिछले 11 सालों से वहां चल रहा अस्थिरता का दौर अब समाप्त हो जाएगा। वहां 2006 से ही राजनैतिक अस्थिरता का दौर चल रहा था। उसी साल नेपाल में राजतंत्र की समाप्ति हुई थी और एक लंबे गृहयुद्ध के बाद राजा ने सत्ता त्याग दी थी। लेकिन उस सत्ता त्याग की पृष्ठभूमि भी खून से रंगी हुई थी। महाराजा बीरेन्द्र की हत्या उसके कुछ साल पहले ही हो गई थी। सिर्फ उनकी ही नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार की ही हत्या कर दी गई थी और हत्यारा और कोई नहीं, बल्कि उनका अपना बेटा ही था। हालांकि कुछ लोग उस हत्याकांड को एक बड़ी साजिश भी बताते हैं, जिसमें राजकुमार को मुखौटा बनाया गया था।

अमेरिकी के सामने झुकने के लिए करजई ने की अशरफ गनी की आलोचना

अफगानिस्तान में ‘सभी बमों की मां’ का इस्तेमाल कर रहे हैं अमेरिकी
शंकर रे - 2017-11-21 11:38 UTC
अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने वर्तमान राष्ट्रपति अशरफ गनी के खिलाफ मोर्चा शुरू कर दिया है। वे अमेरिका के सामने नतमस्तक हो जाने के लिए उनकी आलोचना कर रहे हैं। उनका आरोप है कि अमेरिकी सैनिकों को मनमानी करने की इजाजत दे रहे हैं और उसके कारण ही अमेरिकी सेना ने पूर्वी अफगानिस्तान में 9797 किलाग्राम का एक बम गिराया, जिससे करीब 100 लोग मारे गए। इस बम को ‘सभी बमों की मां’ भी कहा जाता है।

क्या ब्रह्मपुत्र पर खतरे में है?

चीन द्वारा सुरंग बनाने की खबर
बरुण दास गुप्ता - 2017-11-07 13:03 UTC
हांगकांग से छपने वाले एक अखबार दक्षिण चीन माॅर्निंग पोस्ट में एक खबर छपी कि चीन एक हजार किलोमीटर लंबी सुरंग बना रहा है, जो ब्रह्मपुत्र के पानी को तिब्बत से शिनशियांग प्रांत में भेजने का काम करेगा। गौरतलब हो कि शिनशियांग चीन का पश्चिमी प्रांत है और वहां पानी की भारी किल्लत रहती है। ब्रह्मपुत्र को तिब्बत में यारलंग त्सांगपो कहा जाता है।

शरणार्थी संकट पर एक जुट हो दुनिया

ग्लोबल संकट बनता पलायनवाद
प्रभुनाथ शुक्ल - 2017-09-28 10:55 UTC
म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों आए संकट और पलायन के बाद पूरी दुनिया में एक बार फिर शरणार्थी समस्या बहस का मसला बन गयी है। पलायनवाद एक समुदाय विशेष की समस्या के बजाय एक वैश्विक विभीषिका के रुप में उभरा है। संयुक्तराष्ट संघ भी इस पर गहरी चिंता जता चुका है। लेकिन आतंरिक गृहयुद्ध, जातिय हिंसा के साथ आतंकवाद की वजह से सबसे अधिक लोगों का पलायन हुआ है। शरणार्थी समस्या मानवीयता से जुड़ा मसला है। इसे धर्म और जाति, समुदाय से जोड़ना गलत होगा।

रोहिंग्या संकट से दक्षिण एशिया में अस्थिरता

भारत बांग्लादेश और म्यान्मार के बीच फंसा
कल्याणी शंकर - 2017-09-28 10:30 UTC
राज्यविहीन रोहिंग्या की समस्या ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वे म्यान्मार से खदेड़े जा रहे हैं और बांग्लादेश और भारत जैसे पड़ोसी देशों में शरण ले रहे हैं। अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों ने रोहिंग्या की समस्या पर संयुक्त राष्ट्र संघ मे चिंता जताई है।

परमाणु हथियारों से स्वास्थ्य संकट

परमाणु संपन्न देशों को प्रतिबंध के समझौते पर दस्तखत करना चाहिए
डाॅक्टर अरुण मित्र - 2017-09-26 10:11 UTC
7 जुलाई 2017 का दिन दुनिया के लिए एक ऐतिहासिक दिवस है। उस दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पास कर परमाणु हथियारों को अवैध घोषित कर दिया। उसके बाद 20 सितंबर से परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक संधि पत्र पर सदस्य देशों द्वारा दस्तखत किए जाने का दिन शुरू हो गया है। इस संधि के तहत परमाणु हथियारों का विकास, परीक्षण, उत्पादन, भंडारन और से किसी तरह हासिल करना अवैध होगा। इस संधि के अनुसार परमाणु हथियारों को किसी अस्त या शस्त्र पर तैनात करना भी गैरकानूनी होगा।

रोहिंग्या एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है

इसे सुलझाने के लिए भारत को पहल करनी होगी
उपेन्द प्रसाद - 2017-09-22 12:18 UTC
रोहिंग्या की समस्या बद से बदतर रूप ले रही है और इधर भारत में इस पर गंदी राजनीति हो रही है। आज जरूरत इस बात की है कि भारत इस समस्या हो हल करने के लिए कोई ठोस पहले करे, लेकिन सरकार सिर्फ इस बात पर अड़ी है कि यहां आए हुए शरणार्थियों को वापस भेज दिया जाएगा। अब तो केन्द्रीय गृह मंत्री ने उन रोहिंग्या शरणार्थियों को शरणाथी मानने से भी इनकार कर दिया है और उन्हें घुसपैठिया कह रहे हैं।
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