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क्या भाजपा-एसएनडीपी गठबंधन सफल हो पाएगा?

हनीमून जल्द ही समाप्त हो सकता है
पी श्रीकुमारन - 2015-10-06 10:22 UTC
तिरुअनंतपुरमः भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का सिर आजकल सातवें आसमान पर है। इसका कारण पार्टी का श्री नारायण धर्म परिपालना योगम ( एसएनडीपी) के साथ किया गया गठबंधन है। यह गठबंधन हाल ही मे हुआ। गठबंधन के पहले योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नतेशन की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ बैठक हुई थी।

गोमांस पर लालू का बयान भारी पड़ सकता है नीतीश गठबंधन पर

उपेन्द्र प्रसाद - 2015-10-06 10:19 UTC
शुरू से ही बिहार का चुनाव एक अनिश्चय भरा चुनाव दिखाई पड़ रहा था। 1990 के बाद का यह पहला चुनाव है, जिसमें किसी भी प्रकार की भविष्यवाणी करना मुश्किल है। नीतीश और लालू के एक मंच पर आ जाने और कांग्रेस का भी साथ मिल जाने के बाद यह गठबंधन बेहद मजबूत बन गया था। लालू यादव का मूल आधार उनकी अपनी जाति यादव है। वे नीतीश को पसंद नहीं करते, लेकिन जब भाजपा नेताओं ने जंगल राज का मुद्दा उठाया और भागवत ने आरक्षण की समीक्षा की मांग कर दी, तो यादव जाति के लोग नीतीश की तरफ झुकने लगे थे। इन दोनों घटनाओं के कारण लालू और नीतीश के गठबंधन की मजबूत और बढ़ी। लेकिन नरेन्द्र मोदी का जादू भी बिहार में अभी कम नहीं हुआ है। उनकी सभाओं मंे उमड़ रही भीड़ और प्रदेश के अति पिछड़े वर्गो के बीच लालू अलोकप्रियता का लाभ भी भाजपा को मिलता दिखाई दे रहा था। जाहिर है, टक्कर कांटे की थी।

आदर्श गांव को नहीं लिया जा रहा है गंभीरता से

ग्रामीण भारत हो रहा है उपेक्षा का शिकार
एल एस हरदेनिया - 2015-10-01 09:52 UTC
भोपालः अब यह साफ हो गया है कि अधिकांश सांसद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ड्रीम परियोजना "आदर्श ग्राम" में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इस योजना के तहत प्रधानमंत्री ने सांसदों से अनुरोध किया था कि वे एक एक गांव को गोद लें और उनको मिलने वाले विकास फंड का इस्तेमाल उस गांव को आदर्श गांव बनाने में करें।

पंजाब में बन सकते हैं नये राजनैतिक समीकरण

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में भीषण गुटबाजी
बी के चम - 2015-10-01 09:49 UTC
चंडीगढ़ः पंजाब की मुख्यधारा की पार्टियों में उथलपुथल मचा हुआ है। सबसे ज्यादा उथलपुथल कांग्रेस में है। उसके बाद भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी का स्थान आता है। अकाली दल भी इससे अछूता नहीं है। उसके अंदर भी असंतोष उभरने लगे हैं। सिर्फ वामपंथी पार्टियां ही इसका अपवाद है, लेकिन वह अब बहुत ही सिकुड़ गई हैं। अब वे वामपंथी पार्टियां आपस मंे एकताबद्ध होकर राजनैतिक रूप से अपने आपकों प्रासंगिक करने की कोशिश कर रही हैं।
भारत

सूखा प्रकृति का भी और व्यवस्था का भी

लगातार दूसरा साल देश मानसून की कमी का दंश झेल रहा है
अनिल जैन - 2015-09-29 11:19 UTC
देश के कृषि क्षेत्र पर पहले से मंडरा रहे संकट के बादल अब और गहरा गए हैं। इसी वर्ष फरवरी-मार्च में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की मार झेल चुके कृषि क्षेत्र को अब एक बार फिर सूखे के संकट से दो-चार होना है। मानसून का सीजन अब बीतने को है और भारतीय मौसम विभाग की भविष्यवाणी सही साबित होती दिख रही है। जिस अल नीनो प्रभाव की बात विदेशी वैज्ञानिक काफी पहले से कर रहे थे वह भी अब रंग दिखाने लगा है। इस साल मानसून का सीजन शुरू होने से ठीक पहले मौसम विभाग ने मानसून के कमजोर रहने का अंदेशा जताया था। उसने अनुमान जताया था कि इस वर्ष 88 फीसदी ही बारिश होगी। अगर बारिश का आंकड़ा 96 फीसदी से नीचे रहता है तो उसे सामान्य से कम माना जाता है। एक जून से अब तक देशभर में 640 मिलीमीटर बारिश हुई है जो सामान्य से 12 फीसदी कम है। यानी सीजन के बचे हुए समय में भी बारिश मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के मुताबिक रही तो इस साल मानसून की बारिश 88 फीसदी से भी कम दर्ज होगी। इस कमजोर मानसून का सीधा मतलब हुआ कि देश को 2009 के बाद सबसे बड़े सूखे का सामना करना है।

लालू यादव का ओबीसी कार्ड

काठ की हाड़ी दो बार चूल्हे पर नहीं चढ़ती
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-09-28 13:20 UTC
राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू यादव बिहार के इस चुनाव को अपने अंतिम चुनाव की तरह ले रहे हैं और इसके द्वारा अपने बेटों को राजनीति में स्थापित करने के लिए वह सबकुछ करने को तैयार हैं, जो उन्होंने पहले कभी नहीं किया था। अपने चुनाव अभियान की शुरुआत उन्होंने बिहार के उस विधानसभा क्षेत्र से कीए जहां आधिकारिक रूप से चुनाव प्रचार का समय भी शुरु नहीं हुआ था। गौरतलब हो कि नामांकन वापसी की अंतिम तारीख बीत जाने के बाद जब निर्वाचन अधिकारी किसी क्षेत्र के सभी उम्मीदवारों की सूची उनके चुनाव चिन्हों के साथ जारी कर देते हैं, उसके बाद का समय ही उस विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार का दौर शुरू होता है। लालू यादव ने अपना पहला चुनावी भाषण 27 सितंबर को राघोपुर विधानसभा क्षेत्र से शुरू किया और उस क्षेत्र में अभी नामांकन शुरू भी नहीं हुआ था। वहां मतदान तीसरे दौर में होगा। कायदे से चुनाव का प्रचार तो पहले दौर वाले विधानसभा क्षेत्रों से शुरू होना चाहिए था, लेकिन लालू यादव ने तीसरे दौर के क्षेत्र में चुनाव प्रचार शुरू किया, क्योंकि वहां से उनके बेटे चुनाव लड़ने वाले हैं। इससे पता चलता है कि लालू यादव की राजनीति में प्रतिबद्धता क्या है।
भारत

द्वितीय चरण का जेल सुधार खटाई में!

एम वाई सिद्दीकी - 2015-09-26 16:23 UTC
गृह मंत्रालय ने द्वितीय चरण के जेल सुधार कार्यक्रम को यह कहकर धन देने इंकार कर दिया है कि चैदहवें वित आयोग ने पहले ही राज्य सरकारों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को कुल बजट आवंटन में 10 फीसदी की बढ़ोतरी करके 32 से 42 फीसदी कर दिया है ऐसे में राज्य सरकारों को अपने बजट से द्वितीय चरण के जले सुधार कार्यक्रम को पूरा करने होंगे जो 13,962 करोड़ रूपये का है। गृह मंत्रालय का कहना है कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह केंद्र द्वारा आवंटन बढ़ाए जाने के बाद जेल सुधार मद में उसी में से राशि खर्च करें। 14वें वित आयोग ने गृह मंत्रालय के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसमें मंत्रालय ने राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को जेल सुधार के लिए अतिरिक्त धन देने की मांग की थी। ज्ञात हो कि जेल सुधार के द्वितीय चरण के तहत जेलों को अत्याधुनिक बनाने की योजना थी जो अब खटाई में पड़ जाएगी।

राहुल के बार-बार छुट्टी पर जाने से कांग्रेस को हो रहा है नुकसान

बिहार, बंगाल और असम पर ध्यान दिए जाने की जरूरत
कल्याणी शंकर - 2015-09-26 16:20 UTC
कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर छुट्टी मनाने विदेश चले गए हैं। छुट्टी पर जाने के पहले उन्होंने दिल्ली के रामलीला मैदान में एक सफल रैली को संबोधित किया था। भूमि विधेयक केन्द्र सरकार द्वारा वापस लिए जाने की घोषणा के बाद वह रैली हुई थी। वह दरअसल राहुल गांधी की विजय रैली थी, क्योंकि उनके विरोध के कारण ही सरकार को झुकना पड़ा था।

समस्या पैदा कर रहा है नेपाल का नया संविधान

इसमें संशोधन किए जाने की जरूरत है
बरुण दास गुप्ता - 2015-09-24 12:50 UTC
संविधान बनाना नेपाल के लिए बहुत ही मुश्किल काम साबित हुआ। 2008 में वहां राजतंत्र समाप्त हो गया था और एक लोकतांत्रिक व्यवस्था का संविधान बनाने का प्रयास जारी था। संविधान के अनेक मसौदे तैयार किए गए, लेकिन उन पर सहमति बन पाना आसान नहीं था। जाहिर है, समय बीतता जा रहा था और सहमति बन नहीं पा रही थी। अंत में वहां के प्रमुख दल एक मसौदे पर सहमत हुए और उस सहमति के आधार पर नेपाल को एक नया संविधान मिल ही गया।

आरक्षण की समीक्षा से कौन डरता है?

संघ प्रमुख के विचार का स्वागत होना चाहिए
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-09-23 13:00 UTC
बिहार विधानसभा चुनाव का शंखनाद हो चुका है और वहां चुनाव लड़ रही पार्टियां जातीय समीकरण बनाने और अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए तरह तरह की जुगत लड़ा रही हैं। इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने एक ऐसी टिप्पणी कर दी है, जिसे बिहार विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनाया जा रहा है। श्री भागवत की वह टिप्पणी संघ के मुखपत्र पांचजन्य में प्रकाशित हुई है और उसमें आरक्षण की समीक्षा करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही श्री भागवत ने यह भी सवाल उठाया है कि एक समिति का गठन किया जाय, जो यह निर्णय करे कि आरक्षण किसे और कबतक मिले।