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हेलिकाॅप्टर घोटाले पर बयान नहीं, कार्रवाई चाहिए

लोगों को बहुत निराश कर रही है मोदी सरकार
उपेन्द्र प्रसाद - 2016-04-30 10:59 UTC
इन्दिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी बहुत छोटा भाषण देते थे। कभी कभी तो दो मिनट में ही वे अपना भाषण खत्म कर देते थे। भाषण का अंत करते हुए कहते थे, ’’काम अधिक, बातें कम’’। यह उनका आदर्श वाक्य था। आपातकाल के दौरान उनकी बहुत बदनामी हो गई थी। लेकिन उनका वह आदर्शवाक्य लोगों को बहुत पसंद था। आज मोदी सरकार मे उनकी पत्नी मेनका गांधी एक मंत्री हैं और उनका बेटा वरुण गांधी मोदीजी की भारतीय जनता पार्टी के एक सांसद हैं। और मोदी सरकार और मोदीजी की पार्टी का आदर्श वाक्य संजय गांधी के आदर्श वाक्य से बिल्कुल उलटा है। लगता है कि उनका आदर्श वाक्य है, ’’ काम कम और बातें ज्यादा’’।

संसद हो रही है क्षुद्र राजनीति की शिकार

एक और सत्र हो रहा है बर्बाद
कल्याणी शंकर - 2016-04-29 09:49 UTC
संसद का एक और सत्र बर्बादी की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसका कारण सत्तापक्ष और कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष के बीच हो रहा टकराव है। दोनों पक्षों के पास एक दूसरे पर हमले के लिए पर्याप्त हथियार है और दोनों में से कोई एक दूसरे के साथ समझौते के लिए तैयार नहीं हैं। सरकार खुद विपक्ष को मनाने की कोई कोशिश नहीं कर रही है।
भारत: केरल

भ्रष्टाचार अब मुख्य मुद्दा बन गया है

अच्युतानंदन के जाल में फंस गए मुख्यमंत्री चांडी
पी श्रीकुमारन - 2016-04-28 09:43 UTC
तिरुअनंतपुरमः राजनीति में ज्यादा चतुराई दिखाने से हमेशा फायदा ही नहीं होता है। कभी कभी नुकसान भी हो जाता है। केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी को इस सच्चाई का अहसास हो गया होगा। वे चतुराई दिखाकर विधानसभा में विपक्ष के नेता वीएस अच्युतानंदन को धमका रहे थे, लेकिन उनका दांव उलटा पड़ रहा है।

कश्मीर में भाजपा सीख रही है

एनआईटी की घटना पर जागें भक्त
अमूल्य गांगुली - 2016-04-27 09:21 UTC
इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि भारतीय जनता पार्टी किस तरह प्रतिक्रिया जाहिर करती, यदि एनआईटी श्रीनगर में पिछले दिनों हुई घटना उस समय होती, जब कांग्रेस और नेशनल कान्फ्रेंस के राज में होती।

उत्तराखंड की गुत्थियां: भाजपा नेतृत्व की अपरिपक्वता सामने आई

उपेन्द्र प्रसाद - 2016-04-26 09:00 UTC
उत्तराखंड में राजनैतिक अस्थिरता का जो दौर शुरू हुआ है, उसका अंत विधानसभा के आम चुनाव के बाद ही होगा। इस बीच यह मामला इतना पेचिदा हो गया है कि इसके बारे में सबकुछ अनिश्चित सा लगता हैं। हां, इन सारे प्रकरण को देखकर इतना तो दावे के साथ कहा जा सकता है कि भारतीय जनता पार्टी के शिखर नेतृत्व ने इस मामले मे पूरी अपरिपक्वता दिखाई और इसके कारण सबसे ज्यादा निराशा उसे ही हाथ लग रही है।

केरल विधानसभा चुनाव: कांग्रेस के जाल में फंस रही है सीपीएम

पी श्रीकुमारन - 2016-04-25 12:50 UTC
तिरुअनंतपुरमः कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ अपनी रणनीति में सफल होता दिखाई पड़ रहा है। वह चुनाव प्रचार के दौरान अपनी सरकार के कार्यकाल की खामियों को मुद्दा बनने देना नहीं चाहता। इसके लिए उसने विपक्षी सीपीएम के नेतृत्व वाले एलडीएफ के खिलाफ जाल बिछाया है और सीपीएम और उसके नेतृत्व वाला यूडीएफ उस जाल में फंसते जा रहे हैं।

भोपाल का स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट: पर्यावरणवादी कर रहे हैं विरोध

एल एस हरदेनिया - 2016-04-23 09:35 UTC
भोपालः भोपाल में भी एक स्मार्ट सिटी बनाने की मंजूरी मिली है। इस परियोजना की शुरूआत होना अभी बाकी है, लेकिन पहले से ही इसके खिलाफ माहौल बनने लगा है। कहा जा रहा है कि इसके कारण आसपास के इलाके के पर्यावरण की भारी क्षति होगी। इसलिए जिस इलाके में इसे बनाया जाना है, उस इलाके के लोग इसका विरोध कर रहे हैं।

तमिलनाडु चुनाव में पुराना फिल्मी नाच

विजयकांत बनाम रजनीकांत की पुरानी लड़ाई एक बार फिर
कल्याणी शंकर - 2016-04-22 09:37 UTC
तमिलनाडु का चुनावी संग्राम तेज हो रहा है और उसमें फिल्मी मसाला भी रंग भर रहा है। दो सिने अभिनेता भी आमने सामने खड़े हैं। एक तरफ अभिनेता से नेता बन चुके विजयकांत खड़े हैं, तो दूसरी तरह रजनीकांत खड़े हैं। दोनों के अपना अपना प्रशंसक समूह है। विजयकांत को उनके प्रशंसक कैप्टन कहते हैं। इसका कारण उनकी एक फिल्म का नाम कैप्टन प्रभाकरण था। वह फिल्म बहुत हिट हुई थी। उसके बाद ही लोग उन्हें कैप्टन कहने लगे। आज तमिलनाडु में कैप्टन के पास प्रशंसकों का सबसे बड़ा ग्रुप है। इस चुनाव के दौरान विपक्षी पार्टियों द्वारा कैप्टन की सबसे ज्यादा खोज की जा रही थी।

अम्बेडकर के जन्मस्थान पर छुआछूत का राज

जन्मोत्सव मनाने का कोई मतलब नहीं बनता
एल एस हरदेनिया - 2016-04-21 10:01 UTC
भोपालः पिछले 14 अप्रैल को देश की अनेक पार्टियां अम्बेडकर जयंती मनाने में एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करती दिखाई दे रही थीं, लेकिन जिन लोगों के लिए अम्बेडकर ने संघर्ष किया, उन लोगों की दशा के प्रति कोई पार्टियां चिंतित नहीं थी। जिस दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मध्यप्रदेश में अम्बेडकर प्रतिमा के सामने अपना सिर झुका रहे थे, उसी दिन एक गांव में दलित महिलाओं को अगड़ी जातियों के दबंगों द्वारा पीने के पानी के सा्रेत तक जाने से रोक दिया गया था।

खूब फल-फूल रहा है पेड न्यूज का धंधा

एम.वाई. सिद्दीकी - 2016-04-20 12:58 UTC
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा देश की संसद को तीन बार जुलाई 2010, नवंबर 2010 और जुलाई 2011 में आश्वस्त करने के बावजूद पेड न्यूज का धंधा दिन दुनी रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ रही है। प्रेस काउंसिल केमाध्यम से पेड न्यूज को खत्म करने के लिए सरकार ने जो समय सीमा तय किए वे ठंडे बस्ते में हैं और खुद प्रेस काउंसिल की अनुशंसाएं भी मजा क का पात्र बनी हुई हैं। यह सोलहवीं लोकसभा की संसदीय समिति की 27वीं रिपोर्ट है। इसे देखते हुए समिति ने सरकार के इस रूख पर कड़ी आपत्ति जाहिर की है और कहा है कि इससे जनहित अधिनियम 1951 के मूल सिद्धांतों का सरासर हनन हो रहा है। कमिटी सूचना प्रसारण मंत्रालय के इस रूख से हतोत्साहित है कि वह पेड न्यूज को ले कर सख्त कार्रवाई की नीति को अंजाम नहीं दे रहा जबकि प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने जुलाई 2010 में अपनी रिपोर्ट दे दी थी। मंत्रालय के इस रूख के कारण चुनावों के दौरान छपने/प्रसारित होने वाले विभिन्न तरह के एडवोटोरियल/न्यूज से जनता के अधिकारों का हनन होता है।