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उत्तर प्रदेश में अंबेडकर उत्सव, नजर दलित वोटों पर

प्रदीप कपूर - 2016-04-09 09:43 UTC
लखनऊः आगामी 14 अप्रैल को भीम राव अंबेडकर की जयंती है। इस साल अंबेडकर की जयंती के उत्सव प्रदेश की सभी पार्टियां बड़े धूमधाम से मना रही हैं और ऐसा करने के पीछे उन सबकी नजर का दलित वोटों पर टिका होना है।

विधानसभा चुनाव सत्तारूढ़ भाजपा के लिए महत्वपूर्ण

कल्याणी शंकर - 2016-04-08 11:58 UTC
पांच विधानसभाओं के लिए हो रहे चुनाव में देश की दोनों बड़ी राष्ट्रीय पार्टियां, वामदल और क्षेत्रीय पार्टियों के लिए बहुत ही मायने रखते हैं। इनमें इन सबका टेस्ट हो रहा है। ये पांच राज्य हैं- असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी। इनमें से किसी भी राज्य में भाजपा कभी भी सत्ता में नहीं रही। चुनाव से पहले होने वाले सर्वेक्षणों के अनुसार पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को जीत मिल रही है और तमिलनाडु में मुख्यमंत्री जयललिता की पार्टी आगे चल रही है। केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चे को साफ बढ़त दिखाई दे रही है, तो असम में अधिकांश सर्वे भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन को बढ़त प्राप्त करता दिखा रहे हैं।

मणिपुर में भी कांग्रेस सरकार को खतरा

इस बार पार्टी का केन्दीय नेतृत्व सरकार बचाने को सक्रिय
बरुण दास गुप्ता - 2016-04-07 09:09 UTC
उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में अपनी सरकारें गंवाने के बाद कांग्रेस के केन्द्रीय नेताओं की नींद अब जाकर खुली है। अब वे अपनी मणिपुर की सरकार बचाने के लिए सचेष्ट हो गए हैं।

कांग्रेस आलाकमान को होना पड़ा शर्मसार

चांडी ने जीती लड़ाई, क्या वह युद्ध जीत पाएंगे?
पी श्रीकुमारन - 2016-04-06 12:01 UTC
तिरूअनंतपुरमः एक कहावत है कि जो जैसा बोता है, वह वैसा पाता है। केरल के मामले में कांग्रेस के केन्द्रीय आलाकमान पर यह कहावत बहुत सटीक बैठती है।

क्या वाममोर्चे की वापसी हो रही है?

पश्चिम बंगाल और केरल में यह हो सकता है
अमूल्य गांगुली - 2016-04-05 11:55 UTC
हाल में किए गए एक चुनाव पूर्व सवेक्षण से पता चला कि पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु में किसकी सरकार बन सकती है। लेकिन उस सर्वे से जीतने वाले ही नहीं, बल्कि हारने वाले भी अपनी पीठ थपथपा सकते हैं।

असम में मुस्लिम तय करेंगे ऊंट की करवट

मुकाबले में दो राष्ट्रीय पार्टियां हैं
अनिल जैन - 2016-04-04 12:44 UTC
आगामी दो महीनों में देश के जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं उनमें असम ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां भाजपा अपने दो क्षेत्रीय सहयोगी दलों के साथ सीधे मुकाबले में है। वह पिछले 15 साल से सत्तारुढ कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर पूर्वोत्तर में अपनी पहली सरकार बनाने के लिए जी तोड कोशिश कर रही है। असम में आगामी 4 और 11 अप्रैल को मतदान होना है।

भारतीय जनता पार्टी दिखा रही है हताशा

भारत माता की जय उसका नया कार्ड
बी के चम - 2016-04-02 11:49 UTC
चंडीगढ़ः क्या भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं के ताजा बयान उनकी हताशा को दिखाता है या इसके पीछे उनकी कोई सोची समझी चाल है? क्या उसे डर लग रहा है कि पिछले कुछ सप्ताहों में जो घटनाएं घटी हैं, उनसे पार्टी की छवि को झटका लगा है और उसके कारण पांच राज्यो में हो रहे चुनावों मे पार्टी को नुकसान हो सकता है?
उत्तराखंड का राजनैतिक संकट

कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व पर एक विपरीत टिप्पणी

कल्याणी शंकर - 2016-04-01 10:51 UTC
उत्तराखंड में चल रही ’आया राम, गया राम’ की राजनीति से यही पता चलता है कि हमारी राजनैतिक व्यवस्था में सबकुछ ठीकठाक नहीं चल रहा है। हमारे देश में कड़ा दलबदल विरोधी कानून है, इसके बावजूद छोटे राज्यों के विधायक इसे अंगूठा दिखाने मे सफल हो जाते हैं। उत्तराखंड में तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई है और अनेक पेचिदगियां वहां पैदा हो गई हैं। पेश किए गए बजट को पारित होने या न होने को लेकर विवाद पैदा हो गया है। राष्ट्रपति शासन भी वहां लागू हो गया है और उस आदेश को लेकर मामला कोर्ट में भी जा पहुंचा है। कोर्ट राष्ट्रपति शासन के उस आदेश पर ही सवाल खड़ा कर रहा है। इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है। छह महीने पहले उत्तराखंड में भी कुछ वैसा ही हो रहा था। वहां भी उत्तराखंड की तरह कांग्रेस विधायकों ने विद्रोह कर दिया था और अंत में वहां भी राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा था।

उत्तराखंड का राजनैतिक संकट

भाजपा ने की एक और चूक
उपेन्द्र प्रसाद - 2016-04-01 10:47 UTC
उत्तराखंड में चल रही राजनैतिक अस्थिरता का अंत होता अभी दिखाई नहीं पड़ रहा है। जब कभी इसकी विधानसभा के आमचुनाव होंगे, उसके बाद ही इस अस्थिरता का अंत हो पाएगा। इसमें कोई दो मत नहीं कि भारतीय जनता पार्टी ने इस अस्थिरता को हवा दी है और इसके कारण आज सबसे ज्यादा फजीहत उसी की हो रही है। वह सफाई दे रही है कि इस समस्या के लिए कांग्रेस का आंतरिक कलह जिम्मेदार है। यह आंशिक रूप से ही सही है। कांग्रेस में आंतरिक कलह है और कोई नया नहीं है। पिछली विधानसभा का चुनाव जीतकर जब कांग्रेस सत्ता में आई थी, कलह उस समय भी थी। जब विजय बहुगुणा को हटाकर हरीश रावत को मुख्यमंत्री बना दिया गया, उस समय कलह और तेज हो गई। लेकिन उस समय तो वह राजनैतिक बवंडर खड़ा नहीं हुआ, जो आज हुआ है। अंतर यह है कि आज भारतीय जनता पार्टी उस कलह का इस्तेमाल कर कांग्रेस की सरकार को वहां गिरा चुकी है और वैसा करके उसने अपने आप को राजनैतिक रूप से थोड़ा और कुख्यात कर लिया है।

यूडीएफ में सीटों को लेकर मारामारी

कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती
पी श्रीकुमारन - 2016-03-30 11:09 UTC
तिरुअनंतपुरमः सत्तारूढ़ यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के सामने सीटों के बंटवारे की एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। कांग्रेस के सहयोगी दल अपने लिए ज्यादा से ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस झुकने के लिए तैयार नहीं है।