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भारत

जनता दल परिवार की एकता

दिल्ली अभी दूर है
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-05-02 15:50 UTC
जनता दल परिवार के 6 दलों के विलय की घोषणा के लगभग एक महीने हो गए हैं, लेकिन अभी भी विलय नहीं हुआ है। बिना विलय के ही विलय की घोषणा एक अजूबी घटना है और यह शायद भारत में ही संभव हो सकता है। विलय के साथ घटक दलों का अपना अस्त्तित्व समाप्त हो जाता है और एक नया दल या पुराने घटकों में से किसी एक का ही अस्तित्व रहा जाता है। पर जनता दल परिवार के विलय का जो नाटक हो रहा है, उसमें नया दल या एकीकृत दल के नाम का पता नहीं, पर घटक दलों के नाम बदस्तूर बने हुए हैं। मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी कायम है। लालू यादव अपने राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष बने हुए हैं। नीतीश कुमार जनता दल(यू) के सुप्रीमों के रूप में अपना वजूद बनाए हुए हैं। एच डी देवेगौड़ा जनता दल(एस) के अध्यक्ष बने हुए हैं। इसके बावजूद ये नेता मान रहे हैं कि उनके दलों का विलय हो गया है और बस उस पार्टी के नाम और निशान की घोषणा होनी बाकी है, जिसमें इन दलों का विलय हुआ है। यह दावा एक बड़ा राजनैतिक मजाक के अलावा और कुछ नहीं, लेकिन हमारे देश में इस तरह के मजाक होते रहते हैं।
भारत

राहुल गांधी का नया अवतार

उन्हें अब पूर्णकालिक राजनीतिज्ञ बनना पड़ेगा
कल्याणी शंकर - 2015-05-01 17:00 UTC
क्या कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी मिले अवसर का सही इस्तेमाल कर पाएंगे? यह अवसर उन्हें अवकाश से वापस आने के बाद तुरंत मिला है। यह सवाल कांग्रेस के अंदर ही नहीं, बल्कि बाहर भी पूछा जा रहा है। इसका कारण यह है कि उनकी पार्टी के लोगों को भी नहीं पता है कि राहुल अपनी भविष्य की भूमिका के लिए कितने गंभीर हैं। उन्हें इस बात की गारंटी देने वाला कोई नहीं है कि वे एक बार फिर देश के राजनैतिक परिदृश्य से गायब नहीं हो जाएंगे।
भारत: केरल

सीपीएम के नये प्रदेश सचिवालय का गठन

चयन प्रक्रिया पर हो रही है तीखी प्रतिक्रिया
पी श्रीकुमारन - 2015-04-30 11:20 UTC
तिरुअनंतपुरमः सीपीएम के पूर्व प्रदेश सचिव पी विजयन अभी भी पार्टी की प्रदेश राजनीति पर हावी दिखाई पड़ रहे हैं। आज भी प्रदेश पार्टी पर उन्हीं की चल रही है। वे कन्नूर लाॅबी का नेतृत्व करते हैं और उस लाॅबी के खिलाफ गुस्सा भी पार्टी में लगातार बढ़ता जा रहा है।
भारत: मध्य प्रदेश

व्यापम घोटाले की जांच पर गंदी राजनीति

चौहान और दिग्विजय के बीच तीखा संघर्ष
एल एस हरदेनिया - 2015-04-29 17:17 UTC
भोपालः 24 अप्रैल का दिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान के लिए खुशी का दिन था। लेकिन वह दिन पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के लिए दुख का दिन था। दिग्विजय सिंह ही नहीं, बल्कि उनकी कांग्रेस पार्टी के लिए भी वह बुरा दिन था। उसका कारण यह है कि उसी दिन विशेष जांच टीम के उस दावे पर जबलपुर उच्च न्यायालय ने स्वीकात कर लिया कि दिग्विजय सिंह द्वारा पेश किया गया कथित दस्तावेजी प्रमाण जाली था। गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह ने अदालती हलफनामे के साथ कुछ दस्तावेज विशेष जांच टीम को यह कहते हुए दिए थे कि उन दस्तावेजों से यह साबित होता है कि मुख्यमंत्री और उनका परिवार भी व्यापम घोटाले में शामिल था। अदालती हलफनामा देने का मतलब यह होता है कि यदि उनका दावा गलत होता है अथवा उनका दिया हुआ प्रमाण जाली साबित होता है, तो उनके खिलाफ अदालती कार्रवाई की जा सकती है और उन्हे सजा के तौर पर जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।

राहुल का आर्थिक सुधार कार्यक्रम विरोधी अभियान

अर्थव्यवस्था को लेकर कांग्रेस अभी भी भ्रमित
अमूल्य गांगुली - 2015-04-29 01:25 UTC
लगभग दो महीने की अनुपस्थिति के बाद राहुल गांधी जब दिल्ली के रामलीला मैदान में भूमि अधिग्रहण विधेयक के खिलाफ भाषण देने वाले थे, तो वहां कांग्रेसियों ने उन्हें हल का एक माॅडल भेंट किया। कांग्रेस की सोच यह यह भेंट बहुत मिलती जुलती थी। यदि उन्हें ट्रैक्टर का माॅडल दिया जाता, तो वह गलत होता, क्योंकि ट्रैक्टर आधुनिक खेती का प्रतीक है, जब हल परंपरागत खेती का और आजकल कांग्रेस को आधुनिकता से चिढ़ हो रही है।
भारत: केरल

विजयन कैंप की राजनैतिक शरारत

येचुरी पर दबाव शायद काम नहीं आए
पी श्रीकुमारन - 2015-04-28 05:40 UTC
तिरुअनंतपुरमः केरल सीपीएम की कन्नूर लाॅबी पार्टी प्रदेश की पार्टी ईकाई पर हमेशा हावी रही है। इसके नेता पी विजयन हैं, जो कुछ समय पहले तक प्रदेश ईकाई के पार्टी सचिव हुआ करते थे। अब पार्टी के केन्द्रीय महासचिव सीताराम येचुरी बन गए हैं। इसके बावजूद विजयन के नेतृत्व वाली यह कन्नूर लाॅबी पार्टी के अंदर अपनी धौंस जमाने से बाज नहीं आ रही है।
भारत

भोपाल में हिंदू मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए सेमिनार

भाजपा कर रही है मध्यप्रदेश का धार्मिक विभाजन
एल एस हरदेनिया - 2015-04-25 17:39 UTC
भोपालः मध्यप्रदेश सरकार ने पिछले 17 अप्रैल से 19 अप्रैल तक तीन दिनों का एक सेमिनार आयोजित किया, जिसका मकसद था हिन्दू मूल्यों को बढ़ावा देना। सरकार ने यह सेमिनार दिल्ली स्थित संगठन ’’शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास’’ माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता संस्थान के साथ मिलकर आयोजित किया।
भारत

येचुरी के नेतृत्व में सीपीएम

क्या पार्टी अपनी खोई जमीन वापस कर पाएगी
कल्याणी शंकर - 2015-04-24 17:31 UTC
विशाखापतनम में सीपीएम के नये महासचिव के रूप सीताराम येचुरी का चुनाव हुआ। प्रकाश कारत के बाद उन्हें अपनी पार्टी का नेतृत्व संभालने का मौका मिला है। वे अपनी पार्टी के पांचवें महासचिव हैं। पार्टी का नेतृत्व उन्होंने एक ऐसे समय में संभाला है, जब पार्टी अपने अस्तित्व रक्षा की लड़ाई लड़ रही है। अब सीपीएम राष्ट्रीय पार्टी नहीं रही और वह अपने क्षेत्रीय स्वरूप को बचाए रखने के लिए भी संघर्ष करती दिखाई पड़ रही है। वाम मोर्चे की यह सबसे बड़ी पार्टी है और राष्ट्रीय स्तर पर बने अनेक मोर्चे का यह हिस्सा रह चुकी है अथवा उन मोर्चे का प्रभावशाली सहयोगी रही है। इसने 1989 की राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार का समर्थन किया था। 1996 की संयुक्त मोर्चा की सरकार का भी इसने समर्थन किया था और 2004 में केन्द्र में बनी संयुक्त प्रगतिशील मोर्चे का भी इसने समर्थन किया था। लेकिन 2011 से इसका लगातार पतन हो रहा है। उस साल उसने पश्चिम बंगाल की अपनी सत्ता गंवा दी। वहां 1977 से ही उसकी सरकार थी। इसने केरल की अपनी सरकार भी गंवा दी। इस समय उसके पास त्रिपुरा की सरकार है। 2014 के लोकसभा चुनाव में तो उसे अपने इतिहास का सबसे बुरा दिन देखना पड़ा। उसे अपने मोर्चे की पार्टियों के साथ मात्र 10 सीटों से ही संतोष करना पड़ा।
भारत

जंतर मंतर पर किसान की आत्महत्या

कब रुकेगी किसानों की दुर्दशा पर राजनीति?
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-04-24 05:07 UTC
गजेन्द्र सिंह नाम के एक युवा किसान ने दिल्ली के जंतर मंतर पर आत्महत्या कर ली और उसके बाद सभी राजनैतिक दलों ने उस पर गंदी राजनीति करनी शुरू कर दी है। यह आज की भारतीय राजनीति का सबसे खौफनाक चेहरा है। राजनेतागण बयानबाजी में मशगूल हैं, लेकिन किसी के भी बयान में किसानों के प्रति कोई दर्द नहीं दिखाई पड़ रहा है। सभी इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर अपने राजनैतिक स्वार्थ की रोटियां सेंकने में व्यस्त हैं और किसान की दुर्दशा से शायद ही किसी का कोई ताल्लुक रहा है।
भारत

येचुरी के महासचिव बनने का असर

अच्युतानंदन अब चैन की सांस ले सकते हैं
पी श्रीकुमारन - 2015-04-22 10:53 UTC
तिरुअनंतपुरमः सीपीमए की केरल यूनिट आज देश में सीपीएम की सबसे मजबूत पार्टी यूनिट है। सीताराम येचुरी के पार्टी महासचिव बनने पर इस यूनिट पर जबर्दस्त असर पड़ता दिखाई पड़ रहा है।
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