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भारत

नवीन ने चुनाव के पहले ही कांग्रेस को हाशिए पर धकेला

भाजपा बन सकती है उड़ीसा की मुख्य विपक्षी पार्टी
अशोक बी शर्मा - 2014-04-05 11:09 UTC
ओडिसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक लगातार चैथी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के लिए आश्वस्त दिख रहे हैं। विधानसभा चुनावों में इस बार उनको पहले से भी बड़ी जीत मिलने की संभावना है। इस समय उनकी पार्टी को लोकसभा में 14 सीटें मिली हुई हैं। चुनाव के बाद ये सीटें बढ़ जाने के पूरे आसार हैं।
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तमिलनाडु में जयललिता की हालत अच्छी

कर्नाटक में कांग्रेस का प्रदर्शन होगा बेहतर
कल्याणी शंकर - 2014-04-04 15:28 UTC
दक्षिण के चारों राज्यों का केन्द्र की सरकार के गठन में हमेशा महत्वपूर्ण योगदान रहा है, पर इस बार वह न तो यूपीए के लिए और न ही एनडीए को ज्यादा सीटें देने जा रहा है। इसका कारण यह है कि दोनों मोर्चे इस बार सिकुड़ गए हैं। 2004 और 2009 में केन्द्र में कांग्रेस सरकार के गठन में दक्षिण भारत के इन राज्यों को बहुत बड़ा योगदान रहा था।
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बदल रहा है पश्चिम बंगाल का मूड

भाजपा की बढ़त से परेशान हैं ममता
आशीष बिश्वास - 2014-04-03 11:37 UTC
कोलकाताः तृणमूल कांग्रेस अब पहले की तरह विश्वास के साथ यह नहीं कह रही है कि वह लोकसभा चुनाव में अपने विरोधियों का सूफड़ा साफ कर देगी। दिल्ली में अन्ना के साथ ममता की रैली की विफलता के पहले जो उत्साह तृणमूल नेताओं में देखा जा रहा था, वह अब कहीं दिखाई नहीं दे रहा है।
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लोकसभा चुनाव प्रचार के केन्द्र में मोदी क्यों

उपेन्द्र प्रसाद - 2014-04-02 14:15 UTC
सोलहवीं लोकसभा के लिए हो रहा यह चुनाव इस मायने में भी अभूतपूर्व है कि पहली बार कोई एक व्यक्ति चुनाव के केन्द्र में है, जो प्रधानमंत्री पद पर नहीं है। इसके पहले भी हमारे देश में चुनाव व्यक्ति केन्द्रित रहे हैं। 1977 में इन्दिरा गांधी लोकसभा चुनाव के दौरान गैरकांग्रेसी पार्टियों के निशाने पर थीं। लेकिन वह उस समय देश की प्रधानमंत्री थीं और उन्होंने आपातकाल लगाया था। 1980 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस का नारा था, ’’ इन्दिरा लाओ, देश बचाओ’’। कांग्रेस ने तो श्रीमती गांधी को अपनी राजनीति का मुख्य केन्द्र बना रखा था, लेकिन उस समय गैरकांग्रेसी पार्टियों ने इन्दिरा गांधी की सत्ता में फिर से वापसी को मुद्दा उस तरह नहीं बनाया था, जिस तरह आज भाजपा विरोधी पार्टियां नरेन्द्र मोदी को मुद्दा बना रही हैं।
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भोपाल के उम्मीदवार पर भाजपा में विद्रोह

कांग्रेस में भी टिकट वितरण को लेकर असंतोष
एल एस हरदेनिया - 2014-04-01 11:33 UTC
भोपालः मध्यप्रदेश के इतिहास में भारतीय जनता पार्टी को उस तरह के विरोध का सामना कभी नहीं करना पड़ा, जिस तरह के विरोध का सामना उसे भोपाल लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार तय करने के बाद करना पड़ रहा है। भाजपा नेतृत्व ने इस सीट से आलोक संजार को अपना उम्मीदवार बनाया है। जब उनकी उम्मीदवारी की घोषणा हुई, तो उसका सबसे तेज विरोध बाबूलाल गौर ने किया। श्री गौर चैहान मंत्रिमंडल के सबसे वरिष्ठ मंत्री हैं। वे एक बार मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि वे भोपाल लोकसभा क्षेत्र में पड़ने वाले एक विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी हैं। उन्होंने वहां से 1974 में पहली बार विधानसभा का एक उपचुनाव जीता था। उसके बाद वे वहां से लगातार विधायक हैं और कभी भी कोई चुनाव नहीं हारे हैं।
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राजनैतिक पार्टियों में वंशवादी बुखार जोरों पर

कांग्रेस सूची में सबसे ऊपर
हरिहर स्वरूप - 2014-03-31 17:04 UTC
जिस तरह से देश के कोने कोने में सभी पार्टियों मंे वंशवाद का प्रचलन इस तरह बढ गया है कि अब हम भारतीय लोकतंत्र को वंशवादी लोकतंत्र भी कह सकते हैं। हमारी राजनीति में वंशवाद कोई नई चीज नहीं है, लेकिन अब इसने अपनी गिरफ्त में लगभग सभी पार्टियों को ले लिया है। उत्तर प्रदेश इस वंशवादी राजनीति की राजधानी कहा जा सकता है, जहां 26 उम्मीदवार इस समय वंशवादी राजनीति के कारण टिकट पा सके हैं। कांग्रेस में वैसे 10 उम्मीदवार हैं। समाजवादी पार्टी ने 7 वैसे उम्मीदवार खड़े किए हैं। बहुजन समाज पार्टी के 6 और भारतीय जनता पार्टी के 4 उम्मीदवार भी इस श्रेणी में हैं।
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दिल्ली में त्रिकोणात्मक संघर्ष

कांग्रेस की मुख्य मुकाबले में वापसी
उपेन्द्र प्रसाद - 2014-03-29 15:19 UTC
नई दिल्लीः राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 10 अप्रैल को मतदान होंगे और उसके पहले चुनावी सरगर्मी अपने उत्कर्ष पर पहुंच गई है। परंपरागत रूप में कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला होता रहा है। पिछले कई चुनावो से दिल्ली में लोकसभा चुनाव में या तो कांग्रेस का उम्मीदवार जीतता है या भारतीय जनता पार्टी का। 1989 में पिछली बार एक गैर कांग्रेसी गैर भाजपा उम्मीदवार की जीत हुई थी। जिस उम्मीदवार की जीत हुई थी, उनका नाम था राज सिंह मान। लेकिन उनकी जीत भी इसलिए हुई थी, क्यांेकि उन्हें भाजपा का समर्थन हासिल था।
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राजनीति में वंशवाद की बल्ले बल्ले

एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के कब्जे में जा रही ही पार्टियां
कल्याणी शंकर - 2014-03-28 14:50 UTC
देश की राजनैतिक पार्टियों में वर्तमान पीढ़ी द्वारा अगली पीढ़ी को उत्तराधिकार देने का प्रचलन तेज होता जा रहा है। 2014 के लोकसभा चुनावों को देखा जाए, तो साफ हो जाता है कि यह और भी तेज हो रहा है। इस सिलसिले में 2013 का साल बहुत ही महत्वपूर्ण था। पिछले साल जनवरी महीने में राहुल गांधी को जयपुर सत्र में कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनाया गया। उसके 9 महीने बाद भारतीय जनता पार्टी ने नरेन्द्र मोदी को अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया।

पश्चिम बंगाल में भी भाजपा का बढ़ रहा है समर्थन

ममता बनर्जी ने मोदी पर हमले तेज किए
आशीष बिश्वास - 2014-03-27 14:46 UTC
कोलकाताः पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ रहे मुख्य पार्टियों के अधिकांश नेता चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों को गलत बता रहे हैं। वे इन्हें बोगस कहते हैं। सिर्फ भारतीय जनता पार्टी ही इसे सही मान रही है, लेकिन अन्य पार्टियों के व्यवहार से साफ लगता है कि उन्हें भी कहीं न कहीं लगता है कि ये सर्वे सही हैं। और अपनी रणनीति बनाते समय इन सर्वेक्षणों के नतीजों को गंभीरता से ले रहे हैं।

मोदी हैं भाजपा के नये रैम्बो

पार्टी के शीर्ष पर संघर्ष और होगा तेज
अमूल्य गांगुली - 2014-03-26 11:07 UTC
जब शिवसेना पते की बात करे, तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए। उसने अभी कुछ दिन पहले कहा है कि भारतीय जनता पार्टी में मोदी युग की शुरुआत हो गई है, लेकिन आडवाणी युग अभी भी समाप्त नहीं हुआ है। इससे पता चलता है कि भारतीय जनता पार्टी में अभी सत्ता संघर्ष समाप्त नहीं हुआ है।
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