उत्तर प्रदेश विशेष
हताशापूर्ण कदम है मायावती का निर्णय
केन्द्र को एक पुनर्गठन आयोग गठित करना चाहिए
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2011-11-21 12:52 UTC
पचपन साल पहले बने राज्य पुनर्गठन आयोग के ज्यादा सदस्य उत्तर प्रदेश को विभाजित करने के पक्ष में थे। तब उस समय केन्द्रीय गृहमंत्री गाविंद बल्लभ पंत ने कहा था कि उत्तर प्रदेश का विभाजन उनकी लाश पर होगा। उन्होंने यह भी कहा था कि कोई भी इस राम और रहीम की भूमि का विभाजन नहीं कर सकता। लेकिन पुनर्गठन आयोग के एक महत्वपूर्ण सदस्य के एम पण्णिकर साफ साफ शब्दों मंे अपनी राय लिखी थी कि विभाजन के लिए उत्तर प्रदेश का मामला सबसे ज्यादा उचित है। उसके बावजूद देश के सबसे अधिक आबादी वाले प्रदेश की सीमा को नहीं छुआ गया तो उसका कारण सिर्फ राजनैतिक ही था।