रोजगार सृजन के लिए अतिधनाढ्य लोगों पर 2 प्रतिशत कर लगाना जरूरी
केन्द्रीय बजट का लक्ष्य हो सामाजिक न्याय और समानता के साथ विकास
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2024-07-19 10:30 UTC
नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट 23 जुलाई को पेश होने में केवल तीन दिन बचे हैं। अर्थव्यवस्था की बुनियाद अभी भी मजबूत है, लेकिन संकटग्रस्तता के दायरे में बेरोजगारी की बड़ी समस्या शामिल है, जिसमें शिक्षित युवा और महिलाएं सबसे ज्यादा संकट महसूस कर रही हैं। अरबपतियों की संख्या में बहुत तेजी से वृद्धि हुई है, जबकि श्रमिकों और ग्रामीण गरीबों की वास्तविक मजदूरी में गिरावट आयी है। संक्षेप में, एनडीए के नेतृत्व वाली नरेंद्र मोदी सरकार के दस साल के शासन में हुए आर्थिक विकास में सामाजिक न्याय की कमी और असमानताओं में बढ़ोतरी हुई है। संसदीय लोकतंत्र में किसी भी सरकार के लिए लोकसभा चुनाव जीतने के बाद का पहला बजट वंचितों के जीवन स्तर को सुधारने के उद्देश्य से नीतिगत दिशा को सही करने का बड़ा अवसर देता है।