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केरल में आतंकवाद पर सरकार की नई पहल

कांग्रेस का रवैया स्पष्ट नहीं
पी श्रीकुमारन - 2010-07-26 12:29 UTC
तिरुअनंतपुरमः केरल की सरकार ने आतंकवाद की समस्या को हल करने के लिए कजस तेजी से काम किया है, उसके कारण इसे उन लोगों की प्रशंसा भी मिल रही है, जो आमतौर पर वाम दलों को देखकर नाक भौं सिकोड़ते हैं।

भारतीय रुपए की विकास यात्रा

मनीष देसाई - 2010-07-26 11:42 UTC
भारतीय रुपए के लिए 15 जुलाई, 2010 का दिन एक ऐतिहासिक दिन कहलाएगा। इसी दिन भारतीय रुपये को भी विष्व की अन्य प्रमुख मुद्राओं की भांति अलग पहचान मिली। डॉलर, यूरो, पौंड और येन की तरह अब रुपये को भी नया प्रतीक मिल गया है। रुपये का नया प्रतीक देवनागरी लिपि के "र' और रोमन लिपि के "आर' को मिला कर बना है। अभी तक रुपये की अभिव्यक्ति विभिन्न भाषाओं में अलग-अलग संक्षिप्ताक्षरों में की जाती थी।

आर्थिक प्रगति के थोथे दावे हैं डा. मनमोहन सरकार

विजय कुमार मधु - 2010-07-24 11:44 UTC
राष्ट्रीय सलाहकार समिति की अध्यक्षा श्रीमति सोनिया गांधी और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की सेवा कर रहे हैं देश के प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ऐसा आशय का एहसास उन्होंने अपनी पत्रकार वार्ता में दे ही दे दिया है।

भारतीय जनता पार्टी में लालकृष्ण आडवाणी का वर्चस्व मजबूत

विशेष संवाददाता - 2010-07-24 11:36 UTC
अभी हाल ही में हुए राज्यसभा के द्विवर्षीय चुनावों में भाजपा के लिए जिन नामों की चर्चा हुई उसमें ज्यादातर आडवाणी भक्त ही थे। और आयतित सदस्यों को भी भाजपा की यदि टिकट दी गई तो उसमें केवल आडवाणी की ही मंजूरी से ही यह सब हुआ है। जहां कांग्रेस ने अपने ही नेता को निर्दलीय बना दिया वहीं भाजपा ने निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को अपना उम्मीदवार बनाकर सभी राजनैतिक विश्लेषकों को चौंका दिया।

आंध्र और कर्नाटक की रेड्डी समस्या

कांग्रेस और भाजपा का सिरदर्द जैसा है
कल्याणी शंकर - 2010-07-23 11:32 UTC
दक्षिण के दो राज्यों में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी एक तरह की समस्या का सामना कर रही हैं। कर्नाटक में यह समस्या भाजपा के सामने है, तो आंध्र में कांग्रेस को इसका सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या का नाम है रेड्डी समस्या। जगन मोहन रेड्डी कांग्रेस के लिए आंध्र प्रदेश में सिरदर्द बने हुए हैं, तों जनार्दन और करुणाकर रेड़डी भाजपा के लिए कर्नाटक में परेशानी का सबब बने हुए हैं।

मुलायम की मुसलमानों से क्षमायाचना

बसपा और कांग्रेस अपने जनाधार का जायजा ले रही है
प्रदीप कपूर - 2010-07-22 11:25 UTC
लखनऊः जिस तरीके से समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने मुसलमानों से माफी मांगी है, उससे मुस्लिम वोटों के लिए उत्तर प्रदेश में पार्टियों के बीच होड़ लगती दिखाई दे रही है। इस होड़ में सपा के अलावा बसपा और कांग्रेस शामिल है।

भोपाल सम्मेलन में नक्सलियों से बात करने की गुहार

आजाद की मौत की जांच की भी मांग
एल एस हरदेनिया - 2010-07-21 11:20 UTC
भोपालः देश भर के गांधीवादी पिछले दिनों भोपाल में इकट्ठे थे। वे माओवादी समस्या के हल के लि आपस में माथापच्ची कर रहे थे। 14 और 15 जुलाई को हुई उनकी बैठकों में हिंसक माओवादी समस्या के हल के लिए अहिंसक गांधीवादी रास्ते की तलाश की कोशिश की गई। दो दिनों की बैठक के बाद उन्होंने एक 15 सूत्री चार्टर तैयार किया, जिसका नाम उन्होंने रखा है भोपाल घोषणा।

एनसीपी का वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के साथ गठबंधन

क्या मोर्चे को लाभ होगा?
पी श्रीकुमारन - 2010-07-20 11:11 UTC
तिरुअनंतपुरमः क्या राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वाम लोकतांजिक मोर्चा में शामिल होने से मोर्चे को कोई फायदा होगा? यह आज लाख टके का सवाल है। मोर्चे के अंदर इस पर दो तरह की राय है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का मानना है कि इससे मोर्चे को फायदा होगा, जबकि मोर्चे के दो अन्य घटक कांग्रेस (एस) और आएसपी का मानना है कि इससे मोर्चे को फायदा नहीं होगा। गौरतलब है कि सीपीआई और सीपीएम ने एनसीपी को मोर्चा में शामिल करने में उत्साह दिखाया था, जबकि कांग्रेस (एस) और आरएसपी ने इसका विरोध किया था।

सीबीआई जांच के दायरे में नीतीश

बिहार की राजनीति का नया पेंच
उपेन्द्र प्रसाद - 2010-07-19 11:06 UTC
अगले कुछ महीनों में बिहार विधानसभा के चुनाव होने हैं। नीतीश कुमार दुबारा से सत्ता में आने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। 5 साल पहले उनकी सरकार बिहार की लालू विरोधी भावनाओं की उपज थी। इस बार नीतीश कुमार अपनी उपलब्धियों और अनुकूल जाति समीकरणों के बूते जीतना चाह रहे हैं, लेकिन पिछला एक महीना उनके लिए अच्छा नहीं रहा है। अब तो ट्रेजरी घोटाले में उनके खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं। उच्च न्यायालय का यह फैसला उनकी राजनीति के लिए बहुत ही खतरनाक हो सकता है, क्योंकि अपनी अच्छी छवि को ही ढाल बनाकर वे राजनीति कर रह रहे हैं।

केन्द्र को उल्फा से बातचीत करनी चाहिए

देर करने से उग्रवादी मजबूत होंगे
बरुण दास गुप्ता - 2010-07-17 11:01 UTC
कोलकाताः उल्फा समस्या के हल की जो हल्की उम्मीद पहले बनी थी, वह धीरे धीरे समाप्त होती जा रही है। शांति के लिए बातचीत अभी तक आरंभ भी नहीं हो पाई है। सरकार और उग्रवादी संगठन दोनों की दिलचस्पी एकाएक बातचीत के प्रति समाप्त हो गई लगती है। गौहाटी जेल में बंद उल्फा के नेता अब कह रहे हैं कि वे बातचीत में तबतक भाग नहीं लेंगे, जबतक उन्हें रिहा नहीं कर दिया जाता है।
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