केन्द्रीय बजट की शोभा बनी रोजगार योजनाएं महज एक छलावा
सरकारी खजाने से निजी क्षेत्र को धन की हेराफेरी मूल उद्देश्य
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2024-07-27 10:40 UTC
भारतीय अर्थव्यवस्था एक महत्वपूर्ण चौराहे पर है, जहां सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि किसी भी तरह से रोजगार सृजन क्षमता को बढ़ावा नहीं दे रही है। यहां तक कि सृजित नौकरियों में से 57.3 प्रतिशत स्वरोजगार वाले हैं, 18.3 प्रतिशत अवैतनिक घरेलू कामगार हैं और 45 प्रतिशत से अधिक कृषि में कार्यरत हैं। मार्च 2020 में शुरू की गयी उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार पैदा करने में पूरी तरह विफल रही और आश्चर्यजनक रूप से भारत की साल-दर-साल विनिर्माण उत्पादकता 2022-23 में 2.38 प्रतिशत गिर गयी। दूसरी ओर मोदी सरकार की ओर से प्रोत्साहन और कई अन्य लाभकारी लाभों के कारण, भारत की सूचीबद्ध कंपनियों ने 2023-24 में 10.1 प्रतिशत की दर से भारी शुद्ध लाभ कमाया, जो 2007-08 के बाद से सबसे अधिक है।