Skip to main content

View Articles

त्रिपुरा उपचुनाव के नतीजों ने दिखाई तृणमूल कांग्रेस की खामियां

वाम-कांग्रेस गठबंधन अभी भी 2023 के चुनावों में भाजपा को चुनौती देने में सक्षम
आशीष बिस्वास - 2022-06-29 17:02 UTC
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता हाल ही में त्रिपुरा विधानसभा उपचुनावों में अपनी पार्टी के खराब प्रदर्शन से बहुत शर्मिंदा हैं। वे इस मुद्दे पर उल्लेखनीय रूप से मितभाषी रहे हैं, कम से कम इसलिए नहीं कि उन्हें जिस अपमान का सामना करना पड़ा है, वह सीधे पार्टी के सेकेंड-इन-कमांड सांसद अभिषेक बनर्जी के कारण है।

उपचुनावों में पार्टी को उचित नेतृत्व देने में नाकाम रहे अखिलेश

दोहरी जीत से 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा में नया उत्साह
प्रदीप कपूर - 2022-06-28 10:58 UTC
लखनऊः समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आजमगढ़ और रामपुर में अपनी पार्टी के उम्मीदवारों की हार के लिए जिम्मेदार हैं। चूंकि आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा सीटें अखिलेश यादव और एक अन्य महत्वपूर्ण नेता मोहम्मद आजम खान ने जीती थीं, इसलिए सपा के पारंपरिक गढ़ों में समाजवादी उम्मीदवारों की हार पार्टी और खासकर अखिलेश यादव के लिए एक बड़ा झटका है।

महाराष्ट्र में भाजपा को किसकी मदद से मिल रही है यह ताकत?

शक की सूई शरद पवार की ओर इशारा कर रही है
अनिल जैन - 2022-06-27 12:24 UTC
महाराष्ट्र एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। उद्धव ठाकरे की अगुवाई में ढाई साल पुरानी महाविकास अघाड़ी की सरकार पर एक बार फिर संकट में है। यह संकट दो तरफा है। एक ओर जहां मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी और परोक्ष रूप से केंद्र सरकार सत्ताधारी गठबंधन को तोड़ने में लगी है, वहीं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पार्टी शिव सेना में भी बड़े पैमाने पर विधायक बागी हो गए हैं, जिसके चलते संकट के बादल इतने गहरा गए हैं कि सरकार बचना लगभग असंभव हो गया है।

त्रिपुरा में चार उपचुनावों के नतीजे 2023 विधानसभा चुनावों को प्रभावित करेंगे

बीजेपी बैकफुट पर है, कानून-व्यवस्था और महंगाई से लोग परेशान
सागरनील सिन्हा - 2022-06-25 11:33 UTC
कुछ छिटपुट घटनाओं के बावजूद, पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा की चार विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव में 78 फीसदी से अधिक मतदान हुआ है। जिन चार सीटों पर उपचुनाव हुए उनमें अगरतला, टाउन बारदोवाली, जुबराजनगर और सूरमा (एससी) हैं।

25 जूनः आपातकाल की 47वीं बरसी

अपातकाल लगाना क्या जरूरी हो गया था?
एल. एस. हरदेनिया - 2022-06-24 12:24 UTC
जाने-माने कम्युनिस्ट नेता मोहित सेन अपनी आत्मकथा में इंदिरा गांधी के बारे में एक अत्यधिक सनसनीखेज रहस्य का उद्घाटन करते हैं। श्रीमती गांधी ने मोहित को बताया था कि अमेरिकी प्रशासन उनकी (श्रीमती गांधी की) हत्या का षड़यंत्र रच रहा था। श्रीमती गांधी ने बताया था कि प्रसिद्ध क्रांतिकारी और क्यूबा के सर्वमान्य नेता फिडेल कास्त्रो ने मुझे सावधान किया था कि मेरी हत्या का षड़यंत्र उसी तरह किया जा रहा था जैसा कि क्रांतिकारी नेता और चिली के राष्ट्रपति सलवाडोर अलेन्डे की हत्या का किया गया था। कास्त्रो ने यह चेतावनी स्वयं के स्रोतों और सोवियत संघ से प्राप्त गुप्त सूचनाओं के आधार पर दी थी। अमेरिका इंदिरा गांधी को विकासशील देशों में अपनी नीतियों को लागू करने में सबसे बड़ी बाधा मानता था। अमेरिका ने चिली में सीआईए द्वारा प्रायोजित षड़यंत्र के माध्यम से अलेन्दे की हत्या करवाई थी। अलेन्दे एक प्रगतिशील नेता थे जो लातिनी अमेरिका की जनता के प्रेरणास्त्रोत थे।

द्रौपदी मुर्मू राजग की राष्ट्रपति उम्मीदवार

विपक्षी उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को पार करनी है अनेक बाधाएं
अंजन रॉय - 2022-06-23 12:26 UTC
राष्ट्रपति चुनाव के लिए सत्तारूढ़ एनडीए के उम्मीदवार की पसंद को राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक माना जाना चाहिए। उन्होंने पहले अनुसूचित जाति के उम्मीदवार को चुनने के बाद अब एक आदिवासी उम्मीदवार को चुना है। इस प्रकार वे तथाकथित उच्च जाति के कुलीन वर्ग से दूर हो गए हैं और दलितों कारणों का समर्थन करते हैं। एक तरह से यह एक वैचारिक सफलता और कल्पना की छलांग है।

एससी एसटी एक्ट का हो रहा है भारी दुरुपयोग

इसे समाप्त कर देना ही उचित होगा
उपेन्द्र प्रसाद - 2022-06-22 13:05 UTC
जाति उत्पीड़न भारतीय समाज की सच्चाई है। छुआछूत की समस्या बहुत हद तक कम हुई है, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त होना अभी बाकी है। जाति उत्पीड़न छुआछूत के रूप में ही नहीं होता है, बल्कि यह अनेक प्रकारों से होता है। हां, छुआछूत जातीय उत्पीड़न की सबसे अधिक विभत्स और अमानवीय तरीका है। जिस समाज में ऐसा होता हो, उसे सभ्य समाज नहीं कहा जा सकता।

आवश्यक दवाओं में अत्यधिक लाभ की अनुमति नहीं दी जा सकती

दवाओं को सर्वसुलभ बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों में बड़े बदलाव की जरूरत
डॉ अरुण मित्रा - 2022-06-21 11:50 UTC
कोविड-19 महामारी ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को सबसे ऊपर रखते हुए दवाओं व टीकों पर अंतर्राष्ट्रीय समझौतों में बदलाव लाने की आवश्यकता को सामने ला दिया है। नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि दुनिया की 66.2 फीसदी आबादी को कोविड-19 वैक्सीन की कम से कम एक खुराक मिली है, जबकि कम आय वाले देशों में यह संख्या केवल 17.7 फीसदी है।

जनता से जुड़े सवालों को लेकर सड़कों पर कब उतरेगी कांग्रेस?

शक्ति प्रदर्शन अपने नेता की भक्ति का प्रदर्शन साबित हुआ
अनिल जैन - 2022-06-20 10:41 UTC
आजादी के बाद देश पर सर्वाधिक समय (लगभग 55 साल) तक शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी इस समय अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। पिछले दो लोकसभा चुनावों में दर्दनाक और ऐतिहासिक हार का सामना करने के साथ ही पिछले आठ साल के दौरान एक-एक करके वे सभी राज्य उसके हाथ से निकल चुके हैं जहां उसकी सरकारें थीं। इस समय जिन दो राज्यों में उसकी सरकारें हैं, उनकी आबादी देश की कुल आबादी का लगभग महज आठ फीसदी है। इस दारुण अवस्था में पहुंच जाने के बावजूद यह पार्टी अभी भी वक्ती तकाजे के मुताबिक अपने को बदलने के लिए तैयार नहीं है।

भारत में बेरोजगारी आज स्वतंत्रता के बाद से किसी भी वर्ष से भी बदतर है

नरेंद्र मोदी का आठ साल का शासन नव-उदारवाद की विफलता का एक उत्कृष्ट मामला है
प्रभात पटनायक - 2022-06-18 15:16 UTC
साम्राज्यवाद की चालाकी असीमित है। वर्तमान में दुनिया के कई देशों में नव-फासीवादी सरकारें हैं, जो अपने-अपने बड़े पूंजीपतियों (सभी वैश्वीकृत पूंजी के साथ गठबंधन) द्वारा समर्थित हैं, और नव-उदारवादी नीतियों को उनकी विशिष्ट क्रूरता के साथ लागू कर रही हैं, कई अन्य देशों में, नव-फासीवादी संगठन अपने बड़े बुर्जुआ संरक्षकों से वादा करके सत्ता में आने का प्रयास कर रहे हैं कि वे सत्ता में होने पर भी ऐसा ही करेंगे। संक्षेप में नव-उदार-नव-फासीवादी गठबंधन काफी व्यापक हो गया है।