मोदी सरकार और पेगासस का भूत
न्यूयॉर्क टाइम्स का नया खुलासा
-
2022-02-05 11:16 UTC
‘‘.....इजरायल की सरकार की समझदारी थी कि इस सशक्त गुप्तशस्त्र को दमन में नहीं उपयोग किया जाय पर पेगासस को पोलैंड, हंगरी और भारत जैसे देशों को ही बेचा गया जिन्हें मानवीय अधिकारों के उल्लंघन के लिये जाना जाता था.....’’ न्यूयार्क टाइम्स के दो पत्रकार, रोनेन बर्गमैन और मार्क मैजेट्टी अपने अखबार में इसी तथ्य को उजागर करते हैं। वे भारत सरकार के पेगासस, जो जासूसी का एक अन्यतम साधन है, को इजरायल की सरकार से 2017 में खरीदने के सौदे को प्रकाश में ला रहे हैं। यह सुरक्षा का सबसे बड़ा सौदा था जिसमें सरफेस टू सरफेस मिसाइल लॉन्चर्स और संचार के लिये इजरायल से आधुनिकतम तकनीक की खरीदारी पर अप्रैल, 2017 में मुहर लगाई गईं। इस सौदे के बाद जुलाई 4-6, 2017 में भारत के प्रधानमंत्री कई वर्षों में पहली बार मैत्रीपूर्ण यात्रा पर इजरायल आए। न्यूयॉंर्क टाइम्स के इन दोनों पत्रकारों के अनुसार इजरायल के लिये पेगासस एक कूटनीतिक शहद के समान था, जिसका उपयोग उन देशों को एकसाथ इकट्ठा करने में किया जाना था जो किसी भी नैतिकता के बंधन से मुक्त थे, दक्षिणपंथी राष्ट्रवाद को मानते थे, अल्पसंख्यकों को कुचलकर बहुसंख्यकों की बुनियाद पर देश की सरकार चलाते थे और जनवाद की ताकत को तोड़ने की कोशिश में लगे रहते थे।