जब संसद खामोश हो जाती है, तो शुरु होती है कैमरे पर राजनीति
नए डिजिटल मंच पर कोई अध्यक्ष नहीं होता और नियम भी होते हैं बहुत कम
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2026-08-03 11:16 UTC
भारत की राजनीतिक बातचीत का एक नया ठिकाना बनता दिख रहा है। अब यह सिर्फ़ संसद भवन, पार्टी मुख्यालय, चुनावी रैलियों या टीवी स्टूडियो तक सीमित नहीं है। अब अक्सर इसकी शुरुआत मोबाइल फ़ोन को सही एंगल पर रखकर, सोच-समझकर चुने गए बैकग्राउंड और कैमरे में देखकर सीधे लोगों से बात करने के जाने-पहचाने निर्देशन के साथ होती है।